हूद · 67/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَأَخَذَ الَّذِينَ ظَلَمُوا الصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دِيَارِهِمْ جَاثِمِينَ ۝٦٧
Wa akhazal lazeena zalamus saihatu fa asbahoo fee diyaarihim jaasimeena
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक सख्त चिघाड़ ने ले डाला तो वह लोग अपने अपने घरों में औंधें पड़े रह गये

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصَّيْحَةُ: अत्यंत भयानक और प्रचंड आवाज़, जो अल्लाह के आदेश से आकाश से आई।
  • جَاثِمِينَ: मृत अवस्था में मुँह के बल गिरे हुए, बेजान और हिलने-डुलने में असमर्थ।

तफ़सीर:

जब समूद की क़ौम ने हद से बढ़कर ज़ुल्म किया, अल्लाह के नबी सालेह अलैहिस्सलाम को झुठलाया और उनकी नसीहत को नकार दिया, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पहुँचा। एक अत्यंत प्रचंड और भयानक चीख़ ने उन्हें आ घेरा, जिसकी शिद्दत से उनके दिल फट गए और वे सब के सब मर गए। सुबह होते-होते वे अपने ही घरों में मुँह के बल गिरे हुए, बेजान और सुन्न पड़े थे। न कोई हिल सकता था, न कोई आवाज़ निकाल सकता था। यह उनकी सारी ताक़त और शानो-शौकत का अंत था—वे ज़मीन पर ऐसे पड़े थे जैसे सूखी लकड़ियाँ बिखरी हों। यह उन लोगों का हश्र था जिन्होंने अल्लाह के हुक्म की अवहेलना की और अपने नबी की नसीहत को ठुकरा दिया।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है—जब वह किसी ज़ालिम क़ौम को पकड़ता है, तो कोई ताक़त उसे बचा नहीं सकती। इससे हमें अल्लाह का खौफ़ दिल में रखना चाहिए और उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए।
  2. नबियों की दावत को झुठलाना और उनके खिलाफ़ ज़िद करना इंसान को हलाकत के कगार पर ला खड़ा करता है। सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम के पास दुनियावी ताक़त और सुख-सुविधाएँ थीं, लेकिन वे अल्लाह के अज़ाब से बचा न सकीं।
  3. यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसके हुक्म से हैं। जो लोग तौबा कर लें, उनके लिए रहमत है; और जो सरकशी पर अड़े रहें, उनके लिए अज़ाब है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह की ओर लौटना चाहिए और उसके दीन पर साबित क़दम रहना चाहिए।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की पकड़ अचानक आती है—जब लोग ग़ाफ़िल होते हैं, तभी अज़ाब आकर उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लेता है। इसलिए हमें हर वक़्त अल्लाह की याद में रहना चाहिए और उसकी नाराज़गी से डरना चाहिए।


📜 आयत 65-69 — हूद

65فَعَقَرُوهَا فَقَالَ تَمَتَّعُوا فِي دَارِكُمْ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ ۖ ذَٰلِكَ وَعْدٌ غَيْرُ مَكْذُوبٍ
(वरना) फिर तुम्हें फौरन ही (ख़ुदा का) अज़ाब ले डालेगा इस पर भी उन लोगों ने उसकी कूँचे काटकर (मार) डाला तब सालेह ने कहा अच्छा तीन दिन तक (और) अपने अपने घर में चैन (उड़ा लो)
66فَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا صَالِحًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَمِنْ خِزْيِ يَوْمِئِذٍ ۗ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْقَوِيُّ الْعَزِيزُ
यही ख़ुदा का वायदा है जो कभी झूठा नहीं होता फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने सालेह और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दी और उस दिन की रुसवाई से बचा लिया इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार ज़बरदस्त ग़ालिब है
67وَأَخَذَ الَّذِينَ ظَلَمُوا الصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دِيَارِهِمْ جَاثِمِينَ
और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक सख्त चिघाड़ ने ले डाला तो वह लोग अपने अपने घरों में औंधें पड़े रह गये
68كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۗ أَلَا إِنَّ ثَمُودَ كَفَرُوا رَبَّهُمْ ۗ أَلَا بُعْدًا لِّثَمُودَ
और ऐसे मर मिटे कि गोया उनमें कभी बसे ही न थे तो देखो क़ौमे समूद ने अपने परवरदिगार की नाफरमानी की और (सज़ा दी गई) सुन रखो कि क़ौमे समूद (उसकी बारगाह से) धुत्कारी हुईहै
69وَلَقَدْ جَاءَتْ رُسُلُنَا إِبْرَاهِيمَ بِالْبُشْرَىٰ قَالُوا سَلَامًا ۖ قَالَ سَلَامٌ ۖ فَمَا لَبِثَ أَن جَاءَ بِعِجْلٍ حَنِيذٍ
और हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) इबराहीम के पास खुशख़बरी लेकर आए और उन्होंने (इबराहीम को) सलाम किया (इबराहीम ने) सलाम का जवाब दिया फिर इबराहीम एक बछड़े का भुना हुआ (गोश्त) ले आए
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Tuesday, August 18, 2026

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