अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الصَّيْحَةُ: अत्यंत भयानक और प्रचंड आवाज़, जो अल्लाह के आदेश से आकाश से आई।
- جَاثِمِينَ: मृत अवस्था में मुँह के बल गिरे हुए, बेजान और हिलने-डुलने में असमर्थ।
तफ़सीर:
जब समूद की क़ौम ने हद से बढ़कर ज़ुल्म किया, अल्लाह के नबी सालेह अलैहिस्सलाम को झुठलाया और उनकी नसीहत को नकार दिया, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पहुँचा। एक अत्यंत प्रचंड और भयानक चीख़ ने उन्हें आ घेरा, जिसकी शिद्दत से उनके दिल फट गए और वे सब के सब मर गए। सुबह होते-होते वे अपने ही घरों में मुँह के बल गिरे हुए, बेजान और सुन्न पड़े थे। न कोई हिल सकता था, न कोई आवाज़ निकाल सकता था। यह उनकी सारी ताक़त और शानो-शौकत का अंत था—वे ज़मीन पर ऐसे पड़े थे जैसे सूखी लकड़ियाँ बिखरी हों। यह उन लोगों का हश्र था जिन्होंने अल्लाह के हुक्म की अवहेलना की और अपने नबी की नसीहत को ठुकरा दिया।
फ़ायदे:
- अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है—जब वह किसी ज़ालिम क़ौम को पकड़ता है, तो कोई ताक़त उसे बचा नहीं सकती। इससे हमें अल्लाह का खौफ़ दिल में रखना चाहिए और उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए।
- नबियों की दावत को झुठलाना और उनके खिलाफ़ ज़िद करना इंसान को हलाकत के कगार पर ला खड़ा करता है। सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम के पास दुनियावी ताक़त और सुख-सुविधाएँ थीं, लेकिन वे अल्लाह के अज़ाब से बचा न सकीं।
- यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसके हुक्म से हैं। जो लोग तौबा कर लें, उनके लिए रहमत है; और जो सरकशी पर अड़े रहें, उनके लिए अज़ाब है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह की ओर लौटना चाहिए और उसके दीन पर साबित क़दम रहना चाहिए।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की पकड़ अचानक आती है—जब लोग ग़ाफ़िल होते हैं, तभी अज़ाब आकर उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लेता है। इसलिए हमें हर वक़्त अल्लाह की याद में रहना चाहिए और उसकी नाराज़गी से डरना चाहिए।
📜 आयत 65-69 — हूद
अनुवाद — हूद 67
सूरा हूद आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक सख्त…सूरा आयत 67/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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