हूद · 69/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَلَقَدْ جَاءَتْ رُسُلُنَا إِبْرَاهِيمَ بِالْبُشْرَىٰ قَالُوا سَلَامًا ۖ قَالَ سَلَامٌ ۖ فَمَا لَبِثَ أَن جَاءَ بِعِجْلٍ حَنِيذٍ ۝٦٩
Wa laqad jaaa`at Rusulunaaa Ibraaheema bilbushraa qaaloo salaaman qaala salaamun famaa labisa an jaaa`a bi`ijin haneez
📖 हिंदी अर्थ
और हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) इबराहीम के पास खुशख़बरी लेकर आए और उन्होंने (इबराहीम को) सलाम किया (इबराहीम ने) सलाम का जवाब दिया फिर इबराहीम एक बछड़े का भुना हुआ (गोश्त) ले आए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رُسُلُنَا: हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते)।
  • بِالْبُشْرَىٰ: ख़ुशख़बरी के साथ।
  • سَلَامًا: सलाम (शांति) कहते हुए।
  • سَلَامٌ: सलाम (शांति) हो (उत्तर में)।
  • فَمَا لَبِثَ: फिर उन्होंने देर नहीं की।
  • عِجْلٍ حَنِيذٍ: भुना हुआ बछड़ा (गोश्त), जिसे गर्म पत्थरों पर भूनकर तैयार किया गया हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की महान मेहमाननवाज़ी और उनके उच्च आचरण का सुंदर चित्रण करती है। अल्लाह तआला ने अपने फ़रिश्तों को हज़रत इब्राहीम के पास भेजा। ये फ़रिश्ते (जिनमें जिब्रील अलैहिस्सलाम भी शामिल थे) इंसानों की शक्ल में उनके पास पहुँचे। उनका उद्देश्य दो बातें थीं: एक तो हज़रत इब्राहीम और उनकी पत्नी को बेटे इशाक़ और उनके बाद पोते याक़ूब की ख़ुशख़बरी देना, और दूसरा क़ौमे-लूत (हज़रत लूत की क़ौम) पर अल्लाह के अज़ाब के फ़ैसले की सूचना देना।

जब फ़रिश्ते हज़रत इब्राहीम के पास पहुँचे, तो उन्होंने सलाम किया: "सलामुन अलैकुम" (आप पर शांति हो)। हज़रत इब्राहीम ने भी उन्हें सलाम का उत्तर दिया: "सलामुन" (आप पर भी शांति हो)। यह उनकी नेकी और अच्छे अख़लाक़ का प्रमाण है कि उन्होंने फ़ौरन उनका स्वागत किया।

इसके बाद हज़रत इब्राहीम ने कोई देर नहीं की, बल्कि तुरंत अपने घर गए और अपने मेहमानों की ख़ातिर के लिए एक मोटा-ताज़ा बछड़ा लाए, जिसे गर्म पत्थरों पर भूनकर (हनीज़) तैयार किया गया था। उन्होंने यह खाना इसलिए पेश किया क्योंकि उन्हें लगा कि ये मेहमान इंसान हैं, और मेहमानों की इज़्ज़त और ख़ातिरदारी उनकी आदत और सुन्नत थी। यह उनके इख़्लास और सख़ावत (दरियादिली) की मिसाल है कि उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने मेहमानों के लिए बेहतरीन खाना पेश किया।

फ़ायदे (सबक):

  1. मेहमाननवाज़ी की अहमियत: यह आयत हमें सिखाती है कि मेहमानों की ख़ातिरदारी करना अल्लाह के प्यारे नबियों की सुन्नत है। हज़रत इब्राहीम ने फ़ौरन और बेहतरीन तरीक़े से अपने मेहमानों की सेवा की। हमें भी अपने मेहमानों का स्वागत करना चाहिए और उनके लिए जो कुछ भी हो सके, पेश करना चाहिए।
  2. सलाम का आदान-प्रदान: फ़रिश्तों और नबी के बीच सलाम का यह आदान-प्रदान हमें सिखाता है कि सलाम करना और सलाम का उत्तर देना इस्लामी अख़लाक़ का हिस्सा है। यह आपसी मुहब्बत और भाईचारे को बढ़ाता है।
  3. ख़ुशख़बरी की अहमियत: अल्लाह के फ़रिश्ते ख़ुशख़बरी लेकर आए। यह हमें सिखाता है कि दूसरों को ख़ुशख़बरी देना और उनके चेहरे पर मुस्कान लाना एक अच्छा काम है। हमें भी दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए और उन्हें ख़ुश रखने की कोशिश करनी चाहिए।
  4. अल्लाह पर भरोसा: हज़रत इब्राहीम ने फ़रिश्तों को देखकर उनकी इज़्ज़त की और उनकी सेवा की, भले ही वे नहीं जानते थे कि वे फ़रिश्ते हैं। यह हमें सिखाता है कि हर मेहमान में अल्लाह की मेहमानी का सम्मान करना चाहिए, और अल्लाह हमेशा अपने नेक बंदों की मदद करता है।
  5. जल्दबाज़ी में भलाई: हज़रत इब्राहीम ने मेहमानों की ख़ातिर में देर नहीं की। यह हमें सिखाता है कि भलाई के कामों में जल्दी करनी चाहिए और किसी की ज़रूरत को पूरा करने में देर नहीं करनी चाहिए।


📜 आयत 67-71 — हूद

67وَأَخَذَ الَّذِينَ ظَلَمُوا الصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دِيَارِهِمْ جَاثِمِينَ
और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक सख्त चिघाड़ ने ले डाला तो वह लोग अपने अपने घरों में औंधें पड़े रह गये
68كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۗ أَلَا إِنَّ ثَمُودَ كَفَرُوا رَبَّهُمْ ۗ أَلَا بُعْدًا لِّثَمُودَ
और ऐसे मर मिटे कि गोया उनमें कभी बसे ही न थे तो देखो क़ौमे समूद ने अपने परवरदिगार की नाफरमानी की और (सज़ा दी गई) सुन रखो कि क़ौमे समूद (उसकी बारगाह से) धुत्कारी हुईहै
69وَلَقَدْ جَاءَتْ رُسُلُنَا إِبْرَاهِيمَ بِالْبُشْرَىٰ قَالُوا سَلَامًا ۖ قَالَ سَلَامٌ ۖ فَمَا لَبِثَ أَن جَاءَ بِعِجْلٍ حَنِيذٍ
और हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) इबराहीम के पास खुशख़बरी लेकर आए और उन्होंने (इबराहीम को) सलाम किया (इबराहीम ने) सलाम का जवाब दिया फिर इबराहीम एक बछड़े का भुना हुआ (गोश्त) ले आए
70فَلَمَّا رَأَىٰ أَيْدِيَهُمْ لَا تَصِلُ إِلَيْهِ نَكِرَهُمْ وَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۚ قَالُوا لَا تَخَفْ إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمِ لُوطٍ
(और साथ खाने बैठें) फिर जब देखा कि उनके हाथ उसकी तरफ नहीं बढ़ते तो उनकी तरफ से बदगुमान हुए और जी ही जी में डर गए (उसको वह फरिश्ते समझे) और कहने लगे आप डरे नहीं हम तो क़ौम लूत की तरफ (उनकी सज़ा के लिए) भेजे गए हैं
71وَامْرَأَتُهُ قَائِمَةٌ فَضَحِكَتْ فَبَشَّرْنَاهَا بِإِسْحَاقَ وَمِن وَرَاءِ إِسْحَاقَ يَعْقُوبَ
और इबराहीम की बीबी (सायरा) खड़ी हुई थी वह (ये ख़बर सुनकर) हॅस पड़ी तो हमने (उन्हेंफ़रिश्तों के ज़रिए से) इसहाक़ के पैदा होने की खुशख़बरी दी और इसहाक़ के बाद याक़ूब की
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Tuesday, August 18, 2026

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