हूद · 84/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
۞ وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ وَلَا تَنقُصُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ ۚ إِنِّي أَرَاكُم بِخَيْرٍ وَإِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ مُّحِيطٍ ۝٨٤
Wa ilaa Madyana akhaahum Shu`aibaa; qaala yaa qawmi` budul laaha maa lakum min ilaahin ghairuhoo wa laa tanqusul mikyaala walmeezaan; inneee araakum bikhairinw wa innee akhaafu `alaikum `azaaba Yawmim muheet
📖 हिंदी अर्थ
और हमने मदयन वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बना कर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई ख़ुदा नहीं और नाप और तौल में कोई कमी न किया करो मै तो तुम को आसूदगी (ख़ुशहाली) में देख रहा हूँ (फिर घटाने की क्या ज़रुरत है) और मै तो तुम पर उस दिन के अज़ाब से डराता हूँ जो (सबको) घेर लेगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَدْيَنَ (मदयन): यह एक क़बीले का नाम है, जो हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) की क़ौम थी।
  • أَخَاهُمْ (उनका भाई): यहाँ भाई से मुराद नस्ली भाईचारा है, यानी वह उन्हीं में से थे।
  • الْمِكْيَالَ (पैमाना): नापने का बर्तन या पैमाना, जिससे चीज़ें नापी जाती हैं।
  • الْمِيزَانَ (तराज़ू): तौलने का यंत्र, जिससे वज़न किया जाता है।
  • بِخَيْرٍ (भलाई में): यहाँ मतलब सुख-समृद्धि और खुशहाली से है।
  • يَوْمٍ مُحِيطٍ (घेर लेने वाला दिन): ऐसा दिन जो हर तरफ से घेर ले, यानी क़यामत का दिन।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने मदयन की क़ौम की तरफ उनके भाई हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) को रसूल बनाकर भेजा। उन्होंने अपनी क़ौम को पहले तौहीद (एकेश्वरवाद) की दावत दी और कहा: "ऐ मेरी क़ौम! अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है।" यानी इबादत के लायक़ सिर्फ वही है, इसलिए उसी के लिए अपनी इबादत को खालिस करो।

फिर उन्होंने उन्हें दूसरी बड़ी बुराई से रोका—नाप-तौल में कमी करना। उन्होंने कहा: "लोगों को उनका हक़ देते वक़्त न नाप में कमी करो और न तौल में।" यह बात इसलिए ज़रूरी थी क्योंकि मदयन के लोग शिर्क के साथ-साथ नाप-तौल में धोखा देते थे।

हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें नसीहत करते हुए कहा: "मैं देखता हूँ कि तुम लोग खुशहाली और आराम में हो, अल्लाह ने तुम्हें बहुत कुछ दिया है। फिर तुम्हें नाप-तौल में कमी करने की क्या ज़रूरत है? यह नाशुक्री है।" और फिर उन्हें डराया: "मुझे तुम पर उस दिन के अज़ाब का डर है जो तुम्हें हर तरफ से घेर लेगा—यानी क़यामत का दिन, जिससे बचने की कोई जगह नहीं होगी।"


फ़ायदे (सबक़):

  1. तौहीद हर नबी की पहली दावत है: हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) ने सबसे पहले लोगों को अल्लाह की इबादत की तरफ बुलाया, क्योंकि यही हर रसूल का मूल संदेश है।
  2. नाप-तौल में कमी करना बड़ा गुनाह है: इस आयत से साबित होता है कि लोगों के हक़ मारना, चाहे वह नाप-तौल में हो या किसी और तरह से, अल्लाह के यहाँ सख्त गुनाह है।
  3. अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए: जब अल्लाह किसी को खुशहाली देता है, तो उसे चाहिए कि वह नेमत का सही इस्तेमाल करे और अल्लाह की नाफ़रमानी से उसे ज़ाया न करे।
  4. गुनाह पर अज़ाब का डर: इंसान को चाहिए कि वह अपने गुनाहों से तौबा करे और अल्लाह के अज़ाब से डरे, क्योंकि क़यामत का दिन ऐसा है जो हर किसी को घेर लेगा और उससे बचना सिर्फ अल्लाह की रहमत से मुमकिन है।
  5. दुनिया की भलाई और आख़िरत की सलामती: इस आयत में दुनिया की खुशहाली और आख़िरत की सलामती दोनों की तरफ इशारा है—अगर लोग सीधे रहेंगे तो दुनिया में भी भलाई मिलेगी और आख़िरत में भी कामयाबी।


📜 आयत 82-86 — हूद

82فَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا جَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهَا حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍ مَّنضُودٍ
फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने (बस्ती की ज़मीन के तबके) उलट कर उसके ऊपर के हिस्से को नीचे का बना दिया और उस पर हमने खरन्जेदार पत्थर ताबड़ तोड़ बरसाए
83مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ ۖ وَمَا هِيَ مِنَ الظَّالِمِينَ بِبَعِيدٍ
जिन पर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से निशान बनाए हुए थे और वह बस्ती (उन) ज़ालिमों (कुफ्फ़ारे मक्का) से कुछ दूर नहीं
84۞ وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ وَلَا تَنقُصُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ ۚ إِنِّي أَرَاكُم بِخَيْرٍ وَإِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ مُّحِيطٍ
और हमने मदयन वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बना कर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई ख़ुदा नहीं और नाप और तौल में कोई कमी न किया करो मै तो तुम को आसूदगी (ख़ुशहाली) में देख रहा हूँ (फिर घटाने की क्या ज़रुरत है) और मै तो तुम पर उस दिन के अज़ाब से डराता हूँ जो (सबको) घेर लेगा
85وَيَا قَوْمِ أَوْفُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ بِالْقِسْطِ ۖ وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
और ऐ मेरी क़ौम पैमाने और तराज़ू ऌन्साफ़ के साथ पूरे पूरे रखा करो और लोगों को उनकी चीज़े कम न दिया करो और रुए ज़मीन में फसाद न फैलाते फिरो
86بَقِيَّتُ اللَّهِ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ ۚ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ
अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो ख़ुदा का बक़िया तुम्हारे वास्ते कही अच्छा है और मैं तो कुछ तुम्हारा निगेहबान नहीं
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Tuesday, August 18, 2026

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