الْمِكْيَالَ: नापने का पैमाना (जिससे तरल या दाने नापे जाते हैं)।
الْمِيزَانَ: तौलने का तराज़ू (जिससे वज़न तौला जाता है)।
بِالْقِسْطِ: न्याय और इंसाफ़ के साथ।
تَبْخَسُوا: कम करो, घटाओ, नुक़्सान पहुँचाओ।
تَعْثَوْا: फ़साद फैलाओ, ज़मीन में बिगाड़ पैदा करो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! जब भी तुम किसी को नापकर दो या तौलकर दो, तो उसे पूरा-पूरा दो और न्याय का पूरा ध्यान रखो। नापने और तौलने में किसी भी तरह की कमी या धोखाधड़ी मत करो। लोगों को उनका हक़ पूरा दो, उनकी चीज़ों में कमी मत करो, चाहे वह चीज़ अनाज हो, सोना-चाँदी हो या कोई और चीज़। किसी को उसका हक़ देने में कंजूसी या धोखा न करो, क्योंकि यह बड़ा गुनाह है।
और ज़मीन में फ़साद फैलाने के लिए मत चलो। यानी अल्लाह की नाफ़रमानी के कामों में मत लगो, लोगों को नुक़्सान मत पहुँचाओ, और न ही ज़मीन में किसी तरह की बुराई और बिगाड़ पैदा करो। याद रखो कि यह दुनिया अल्लाह की है और उसने इसे अच्छे कामों के लिए बनाया है, इसलिए इसमें बुराई और फ़साद फैलाना अल्लाह की नाराज़गी का कारण है।
फ़ायदे (उपदेश):
ईमानदारी और दयालुता: यह आयत हमें सिखाती है कि व्यापार और लेन-देन में ईमानदारी बहुत ज़रूरी है। जो व्यक्ति नाप-तौल में पूरा हक़ देता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में बरकत देता है।
दूसरों के हक़ का सम्मान: इस्लाम हमें सिखाता है कि किसी भी इंसान का हक़ मारना बड़ा गुनाह है। चाहे वह हक़ माल का हो, मेहनत का हो या किसी और चीज़ का। अल्लाह ने हर इंसान का हक़ निर्धारित किया है, और उसे पूरा देना हमारा धर्म है।
ज़मीन पर फ़साद से बचाव: यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि ज़मीन पर फ़साद फैलाना, चाहे वह चोरी हो, धोखा हो, झूठ हो या किसी और तरह की बुराई, अल्लाह की नज़र में बहुत बुरा काम है। एक अच्छा मुसलमान वही है जो समाज में अमन और सुधार लाए, न कि बिगाड़ और फ़साद।
समाज में भरोसा: जब लोग नाप-तौल में ईमानदारी करेंगे और एक-दूसरे का हक़ पूरा देंगे, तो समाज में भरोसा और मुहब्बत बढ़ेगी। यही एक खूबसूरत इस्लामी समाज की पहचान है।
और हमने मदयन वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बना कर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई ख़ुदा नहीं और नाप और तौल में कोई कमी न किया करो मै तो तुम को आसूदगी (ख़ुशहाली) में देख रहा हूँ (फिर घटाने की क्या ज़रुरत है) और मै तो तुम पर उस दिन के अज़ाब से डराता हूँ जो (सबको) घेर लेगा
वह लोग कहने लगे ऐ शुएब क्या तुम्हारी नमाज़ (जिसे तुम पढ़ा करते हो) तुम्हें ये सिखाती है कि जिन (बुतों) की परसतिश हमारे बाप दादा करते आए उन्हें हम छोड़ बैठें या हम अपने मालों में जो कुछ चाहे कर बैठें तुम ही तो बस एक बुर्दबार और समझदार (रह गए) हो
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।