हूद · 85/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَيَا قَوْمِ أَوْفُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ بِالْقِسْطِ ۖ وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ ۝٨٥
Wa yaa qawmi awful mikyaala walmeezaana bilqisti wa laa tabkhasun naasa ashyaaa`ahum wa laa ta`saw fil ardi mufsideen
📖 हिंदी अर्थ
और ऐ मेरी क़ौम पैमाने और तराज़ू ऌन्साफ़ के साथ पूरे पूरे रखा करो और लोगों को उनकी चीज़े कम न दिया करो और रुए ज़मीन में फसाद न फैलाते फिरो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوْفُوا: पूरा करो, पूरा-पूरा दो।
  • الْمِكْيَالَ: नापने का पैमाना (जिससे तरल या दाने नापे जाते हैं)।
  • الْمِيزَانَ: तौलने का तराज़ू (जिससे वज़न तौला जाता है)।
  • بِالْقِسْطِ: न्याय और इंसाफ़ के साथ।
  • تَبْخَسُوا: कम करो, घटाओ, नुक़्सान पहुँचाओ।
  • تَعْثَوْا: फ़साद फैलाओ, ज़मीन में बिगाड़ पैदा करो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मेरी क़ौम के लोगो! जब भी तुम किसी को नापकर दो या तौलकर दो, तो उसे पूरा-पूरा दो और न्याय का पूरा ध्यान रखो। नापने और तौलने में किसी भी तरह की कमी या धोखाधड़ी मत करो। लोगों को उनका हक़ पूरा दो, उनकी चीज़ों में कमी मत करो, चाहे वह चीज़ अनाज हो, सोना-चाँदी हो या कोई और चीज़। किसी को उसका हक़ देने में कंजूसी या धोखा न करो, क्योंकि यह बड़ा गुनाह है।

और ज़मीन में फ़साद फैलाने के लिए मत चलो। यानी अल्लाह की नाफ़रमानी के कामों में मत लगो, लोगों को नुक़्सान मत पहुँचाओ, और न ही ज़मीन में किसी तरह की बुराई और बिगाड़ पैदा करो। याद रखो कि यह दुनिया अल्लाह की है और उसने इसे अच्छे कामों के लिए बनाया है, इसलिए इसमें बुराई और फ़साद फैलाना अल्लाह की नाराज़गी का कारण है।


फ़ायदे (उपदेश):

  1. ईमानदारी और दयालुता: यह आयत हमें सिखाती है कि व्यापार और लेन-देन में ईमानदारी बहुत ज़रूरी है। जो व्यक्ति नाप-तौल में पूरा हक़ देता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में बरकत देता है।
  2. दूसरों के हक़ का सम्मान: इस्लाम हमें सिखाता है कि किसी भी इंसान का हक़ मारना बड़ा गुनाह है। चाहे वह हक़ माल का हो, मेहनत का हो या किसी और चीज़ का। अल्लाह ने हर इंसान का हक़ निर्धारित किया है, और उसे पूरा देना हमारा धर्म है।
  3. ज़मीन पर फ़साद से बचाव: यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि ज़मीन पर फ़साद फैलाना, चाहे वह चोरी हो, धोखा हो, झूठ हो या किसी और तरह की बुराई, अल्लाह की नज़र में बहुत बुरा काम है। एक अच्छा मुसलमान वही है जो समाज में अमन और सुधार लाए, न कि बिगाड़ और फ़साद।
  4. समाज में भरोसा: जब लोग नाप-तौल में ईमानदारी करेंगे और एक-दूसरे का हक़ पूरा देंगे, तो समाज में भरोसा और मुहब्बत बढ़ेगी। यही एक खूबसूरत इस्लामी समाज की पहचान है।


📜 आयत 83-87 — हूद

83مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ ۖ وَمَا هِيَ مِنَ الظَّالِمِينَ بِبَعِيدٍ
जिन पर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से निशान बनाए हुए थे और वह बस्ती (उन) ज़ालिमों (कुफ्फ़ारे मक्का) से कुछ दूर नहीं
84۞ وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ وَلَا تَنقُصُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ ۚ إِنِّي أَرَاكُم بِخَيْرٍ وَإِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ مُّحِيطٍ
और हमने मदयन वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बना कर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई ख़ुदा नहीं और नाप और तौल में कोई कमी न किया करो मै तो तुम को आसूदगी (ख़ुशहाली) में देख रहा हूँ (फिर घटाने की क्या ज़रुरत है) और मै तो तुम पर उस दिन के अज़ाब से डराता हूँ जो (सबको) घेर लेगा
85وَيَا قَوْمِ أَوْفُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ بِالْقِسْطِ ۖ وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
और ऐ मेरी क़ौम पैमाने और तराज़ू ऌन्साफ़ के साथ पूरे पूरे रखा करो और लोगों को उनकी चीज़े कम न दिया करो और रुए ज़मीन में फसाद न फैलाते फिरो
86بَقِيَّتُ اللَّهِ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ ۚ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ
अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो ख़ुदा का बक़िया तुम्हारे वास्ते कही अच्छा है और मैं तो कुछ तुम्हारा निगेहबान नहीं
87قَالُوا يَا شُعَيْبُ أَصَلَاتُكَ تَأْمُرُكَ أَن نَّتْرُكَ مَا يَعْبُدُ آبَاؤُنَا أَوْ أَن نَّفْعَلَ فِي أَمْوَالِنَا مَا نَشَاءُ ۖ إِنَّكَ لَأَنتَ الْحَلِيمُ الرَّشِيدُ
वह लोग कहने लगे ऐ शुएब क्या तुम्हारी नमाज़ (जिसे तुम पढ़ा करते हो) तुम्हें ये सिखाती है कि जिन (बुतों) की परसतिश हमारे बाप दादा करते आए उन्हें हम छोड़ बैठें या हम अपने मालों में जो कुछ चाहे कर बैठें तुम ही तो बस एक बुर्दबार और समझदार (रह गए) हो
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अनुवाद — हूद 85

सूरा हूद आयत 85 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ मेरी क़ौम पैमाने और तराज़ू ऌन्साफ़ के साथ…

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Tuesday, August 18, 2026

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