हूद · 86/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
بَقِيَّتُ اللَّهِ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ ۚ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ ۝٨٦
Baqiyyatul laahi khairul lakum in kuntum mu`mineen; wa maa ana `alaikum bihafeez
📖 हिंदी अर्थ
अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो ख़ुदा का बक़िया तुम्हारे वास्ते कही अच्छा है और मैं तो कुछ तुम्हारा निगेहबान नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَقِيَّتُ اللَّهِ: अल्लाह की ओर से बचा हुआ (हलाल कमाई)।
  • خَيْرٌ: बेहतर, अधिक लाभदायक।
  • مُؤْمِنِينَ: सच्चे ईमान वाले।
  • بِحَفِيظٍ: निगरानी करने वाला, रक्षक (यहाँ अर्थ: तुम्हारे कर्मों का हिसाब रखने वाला)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह के नबी शुएब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को नाप-तौल में कमी करने और लोगों का हक़ मारने से रोका। इस आयत में वे उन्हें समझाते हैं कि जो कुछ अल्लाह ने तुम्हें हलाल रूप से दिया है और उसमें से जो कुछ तुम्हारे पास बचता है—बशर्ते तुम नाप-तौल में इंसाफ़ करो और लोगों के हक़ पूरे दो—वह बचा हुआ हलाल माल उस माल से कहीं बेहतर है जो तुम नाप-तौल में कमी करके या ज़मीन में फ़साद फैलाकर हासिल करते हो। यह बेहतरी इसलिए है क्योंकि हलाल कमाई में बरकत होती है और वह आख़िरत में भी काम आएगी, जबकि हराम कमाई न तो दुनिया में सुकून देती है और न आख़िरत में। यह नसीहत उन लोगों के लिए है जो सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखते हैं, क्योंकि ईमान ही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के हुक्म पर चलने और हलाल-हराम کی تمیز کرنے کی توفیق देता है।

इसके बाद नबी शुएब (अलैहिस्सलाम) फ़रमाते हैं: "मैं तुम्हारे ऊपर कोई निगरानी करने वाला नहीं हूँ जो तुम्हारे हर काम को गिनता रहे और तुम्हें ज़बरदस्ती नेकी पर मजबूर करे। मेरा काम सिर्फ़ अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाना है। हिसाब लेने वाला तो अल्लाह है, जो हर छोटे-बड़े काम को जानता है और उसका हिसाब रखता है।"

फ़ायदे (सबक):

  1. हलाल कमाई में बरकत होती है, भले ही वह कम हो, जबकि हराम कमाई में बरकत नहीं होती, भले ही वह ज़्यादा दिखे।
  2. ईमान की पहचान यह है कि इंसान अल्लाह के हुक्म को अपनी ख्वाहिशों पर तरजीह दे और हलाल-हराम का ख़याल रखे।
  3. नबियों का काम सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचाना है; हिसाब लेने का अधिकार सिर्फ़ अल्लाह को है। यह हमें सिखाता है कि हमें दूसरों को नेकी की दावत देनी चाहिए, लेकिन ज़बरदस्ती या जासूसी नहीं करनी चाहिए।
  4. जो इंसान अल्लाह पर भरोसा करके हलाल रोज़ी पर संतुष्ट रहता है, अल्लाह उसे अपनी तरफ़ से ऐसी बरकत देता है जो किसी हराम माल में नहीं होती।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की कमाई से बढ़कर आख़िरत की कमाई है, और सच्चा मुनाफ़ा वही है जो अल्लाह की रज़ा के साथ हो।


📜 आयत 84-88 — सूरा हूद

84۞ وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ وَلَا تَنقُصُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ ۚ إِنِّي أَرَاكُم بِخَيْرٍ وَإِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ مُّحِيطٍ
और हमने मदयन वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बना कर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई ख़ुदा नहीं और नाप और तौल में कोई कमी न किया करो मै तो तुम को आसूदगी (ख़ुशहाली) में देख रहा हूँ (फिर घटाने की क्या ज़रुरत है) और मै तो तुम पर उस दिन के अज़ाब से डराता हूँ जो (सबको) घेर लेगा
85وَيَا قَوْمِ أَوْفُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ بِالْقِسْطِ ۖ وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
और ऐ मेरी क़ौम पैमाने और तराज़ू ऌन्साफ़ के साथ पूरे पूरे रखा करो और लोगों को उनकी चीज़े कम न दिया करो और रुए ज़मीन में फसाद न फैलाते फिरो
86بَقِيَّتُ اللَّهِ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ ۚ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ
अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो ख़ुदा का बक़िया तुम्हारे वास्ते कही अच्छा है और मैं तो कुछ तुम्हारा निगेहबान नहीं
87قَالُوا يَا شُعَيْبُ أَصَلَاتُكَ تَأْمُرُكَ أَن نَّتْرُكَ مَا يَعْبُدُ آبَاؤُنَا أَوْ أَن نَّفْعَلَ فِي أَمْوَالِنَا مَا نَشَاءُ ۖ إِنَّكَ لَأَنتَ الْحَلِيمُ الرَّشِيدُ
वह लोग कहने लगे ऐ शुएब क्या तुम्हारी नमाज़ (जिसे तुम पढ़ा करते हो) तुम्हें ये सिखाती है कि जिन (बुतों) की परसतिश हमारे बाप दादा करते आए उन्हें हम छोड़ बैठें या हम अपने मालों में जो कुछ चाहे कर बैठें तुम ही तो बस एक बुर्दबार और समझदार (रह गए) हो
88قَالَ يَا قَوْمِ أَرَأَيْتُمْ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّي وَرَزَقَنِي مِنْهُ رِزْقًا حَسَنًا ۚ وَمَا أُرِيدُ أَنْ أُخَالِفَكُمْ إِلَىٰ مَا أَنْهَاكُمْ عَنْهُ ۚ إِنْ أُرِيدُ إِلَّا الْإِصْلَاحَ مَا اسْتَطَعْتُ ۚ وَمَا تَوْفِيقِي إِلَّا بِاللَّهِ ۚ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْهِ أُنِيبُ
शुएब ने कहा ऐ मेरी क़ौम अगर मै अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन दलील पर हूँ और उसने मुझे (हलाल) रोज़ी खाने को दी है (तो मै भी तुम्हारी तरह हराम खाने लगूँ) और मै तो ये नहीं चाहता कि जिस काम से तुम को रोकूँ तुम्हारे बर ख़िलाफ (बदले) आप उसको करने लगूं मैं तो जहाँ तक मुझे बन पड़े इसलाह (भलाई) के सिवा (कुछ और) चाहता ही नहीं और मेरी ताईद तो ख़ुदा के सिवा और किसी से हो ही नहीं सकती इस पर मैने भरोसा कर लिया है और उसी की तरफ रुज़ू करता हूँ
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Tuesday, September 8, 2026

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