अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَا أَكْثَرُ النَّاسِ: अधिकतर लोग
- حَرَصْتَ: तूने चाहा, तूने कोशिश की
- بِمُؤْمِنِينَ: ईमान लाने वाले
व्याख्या:
ऐ नबी! तुम्हारी क़ौम के अधिकतर लोग, चाहे तुम कितना भी चाहो और उनके ईमान लाने के लिए कितनी भी कोशिश कर लो, फिर भी ईमान लाने वाले नहीं बनेंगे। यह बात केवल तुम्हारी क़ौम के बारे में नहीं है, बल्कि सामान्य रूप से अधिकतर लोगों की स्थिति यही है। उनमें से अधिकांश ईमान नहीं लाते, चाहे उन्हें कितना भी समझाया जाए और उनके लिए कितनी भी दलीलें पेश की जाएँ।
यह ईमान अल्लाह की मर्ज़ी और उसकी तौफ़ीक़ पर निर्भर है। अल्लाह जिसे चाहता है हिदायत देता है और जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है। नबी का काम केवल पहुँचाना है, हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। इसलिए ऐ नबी! उनके ईमान न लाने पर तुम दुखी मत होओ और अपनी जान को हलाकत में मत डालो। तुम्हारी ज़िम्मेदारी केवल संदेश पहुँचाना है, जो तुमने पूरा कर दिया है।
फ़ायदे:
- नबी की मेहनत और लोगों की नाफ़रमानी: यह आयत हमें सिखाती है कि नबी ﷺ ने अपनी उम्मत की हिदायत के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन फिर भी अधिकतर लोग ईमान नहीं लाए। यह हमारे लिए सबक है कि हमें भी दूसरों को अच्छी बात पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए, लेकिन परिणाम अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए।
- निराशा से बचाव: यह आयत उन लोगों के लिए तसल्ली है जो दूसरों को ईमान की दावत देते हैं और जब वे ईमान नहीं लाते तो दुखी होते हैं। यह सिखाती है कि हिदायत अल्लाह के हाथ में है, हमारा काम केवल पहुँचाना है।
- अल्लाह की मर्ज़ी का सम्मान: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की मर्ज़ी के आगे हमें सिर झुकाना चाहिए। जिसे अल्लाह हिदायत देना चाहता है, वही हिदायत पाता है। यह हमारे अंदर अल्लाह के प्रति समर्पण और विनम्रता पैदा करता है।
- दावत के काम में लगे रहने की प्रेरणा: भले ही अधिकतर लोग ईमान न लाएँ, लेकिन हमें अपने दावत के काम में लगे रहना चाहिए। जो लोग ईमान लाएँगे, वे हमारी मेहनत का फल हैं। यह आयत हमें निराश न होकर लगातार अच्छाई की ओर बुलाते रहने की प्रेरणा देती है।
- नबी ﷺ से मुहब्बत: यह आयत नबी ﷺ की उम्मत के प्रति उनकी गहरी चिंता और मुहब्बत को दर्शाती है। वे अपनी उम्मत के ईमान के लिए इतने परेशान थे कि अल्लाह ने उन्हें तसल्ली दी। यह हमारे दिलों में नबी ﷺ की मुहब्बत और बढ़ाती है।
📜 आयत 101-105 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 103
सूरा यूसुफ आयत 103 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम उनके पास मौजूद न थे और कितने ही चाहो…सूरा आयत 103/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 101–105. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








