Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نَسْتَبِقُ (नस्तबिकु): हम दौड़ लगा रहे थे या तीरंदाजी में प्रतिस्पर्धा कर रहे थे।
- مَتَاعِنَا (मताइना): हमारा सामान, जिसमें कपड़े और खाने-पीने की चीज़ें शामिल थीं।
- بِمُؤْمِنٍ (बिमु'मिन): विश्वास करने वाला, सच मानने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने उन्हें कुएँ में डाल दिया, तो वे रात को रोते-पीटते अपने पिता याक़ूब (अलैहिस्सलाम) के पास आए और झूठी कहानी बनाकर कहने लगे: "ऐ हमारे पिता! हम सब दौड़ने और तीरंदाज़ी के खेल में प्रतिस्पर्धा करने के लिए गए थे, और यूसुफ़ को हमने अपने कपड़ों और सामान की देखभाल के लिए छोड़ दिया था। हमने उसे अकेला नहीं छोड़ा था, बल्कि वह हमारे सामान के पास ही था। तभी अचानक एक भेड़िया आया और उसे खा गया।"
फिर उन्होंने पहले ही यह कहकर अपनी बात को मज़बूत करना चाहा: "और आप तो हमारी बात पर विश्वास नहीं करेंगे, चाहे हम सच्चे ही क्यों न हों।" यह कहकर उन्होंने पिता के सामने यह बात पेश की कि आपका अविश्वास आपके दिल में यूसुफ़ के प्रति अत्यधिक प्रेम की वजह से है, इसलिए आप हमारी बात को सच नहीं मानेंगे। इस तरह उन्होंने अपने झूठ को छिपाने के लिए पहले से ही बहाना बना लिया था।
शिक्षाएँ और लाभ:
- यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि झूठ और धोखे की आड़ में भी सच्चाई कभी छिपी नहीं रहती। अल्लाह तआला हर चीज़ को जानता है और सच्चाई को उजागर करके रहता है।
- माता-पिता के प्रति आदर और सम्मान की शिक्षा मिलती है, क्योंकि भाइयों ने पिता को "याअबाना" (ऐ हमारे पिता) कहकर संबोधित किया, भले ही वे झूठ बोल रहे थे।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि संतान की परवरिश में माता-पिता का दिल बहुत नाज़ुक होता है, और बच्चों को चाहिए कि वे अपने माता-पिता के साथ सच्चाई और भलाई से पेश आएँ।
- यह क़िस्सा हमें सब्र और अल्लाह पर भरोसे की तालीम देता है — जैसे याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने इस मुश्किल घड़ी में सब्र किया और अल्लाह से ही मदद माँगी।
- यह भी सबक है कि बुरे कामों में लगे लोग अपने किए पर पर्दा डालने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाते हैं, लेकिन अल्लाह की पकड़ से कोई नहीं बच सकता।
📜 आयत 15-19 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 17
सूरा यूसुफ आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कहने लगे ऐ अब्बा हम लोग तो जाकर दौड़ने…सूरा आयत 17/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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