यूसुफ · 17/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
قَالُوا يَا أَبَانَا إِنَّا ذَهَبْنَا نَسْتَبِقُ وَتَرَكْنَا يُوسُفَ عِندَ مَتَاعِنَا فَأَكَلَهُ الذِّئْبُ ۖ وَمَا أَنتَ بِمُؤْمِنٍ لَّنَا وَلَوْ كُنَّا صَادِقِينَ ۝١٧
Qaaloo yaaa abaanaaa innaa zahabnaa nastabiqu wa taraknaa Yoosufa `inda mataa`inaa fa akhalahuz zi`b, wa maaa anta bimu`minil lanaa wa law kunnaa saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
और कहने लगे ऐ अब्बा हम लोग तो जाकर दौड़ने लगे और यूसुफ को अपने असबाब के पास छोड़ दिया इतने में भेड़िया आकर उसे खा गया हम लोग अगर सच्चे भी हो मगर आपको तो हमारी बात का यक़ीन आने का नहीं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَسْتَبِقُ (नस्तबिकु): हम दौड़ लगा रहे थे या तीरंदाजी में प्रतिस्पर्धा कर रहे थे।
  • مَتَاعِنَا (मताइना): हमारा सामान, जिसमें कपड़े और खाने-पीने की चीज़ें शामिल थीं।
  • بِمُؤْمِنٍ (बिमु'मिन): विश्वास करने वाला, सच मानने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने उन्हें कुएँ में डाल दिया, तो वे रात को रोते-पीटते अपने पिता याक़ूब (अलैहिस्सलाम) के पास आए और झूठी कहानी बनाकर कहने लगे: "ऐ हमारे पिता! हम सब दौड़ने और तीरंदाज़ी के खेल में प्रतिस्पर्धा करने के लिए गए थे, और यूसुफ़ को हमने अपने कपड़ों और सामान की देखभाल के लिए छोड़ दिया था। हमने उसे अकेला नहीं छोड़ा था, बल्कि वह हमारे सामान के पास ही था। तभी अचानक एक भेड़िया आया और उसे खा गया।"

फिर उन्होंने पहले ही यह कहकर अपनी बात को मज़बूत करना चाहा: "और आप तो हमारी बात पर विश्वास नहीं करेंगे, चाहे हम सच्चे ही क्यों न हों।" यह कहकर उन्होंने पिता के सामने यह बात पेश की कि आपका अविश्वास आपके दिल में यूसुफ़ के प्रति अत्यधिक प्रेम की वजह से है, इसलिए आप हमारी बात को सच नहीं मानेंगे। इस तरह उन्होंने अपने झूठ को छिपाने के लिए पहले से ही बहाना बना लिया था।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि झूठ और धोखे की आड़ में भी सच्चाई कभी छिपी नहीं रहती। अल्लाह तआला हर चीज़ को जानता है और सच्चाई को उजागर करके रहता है।
  2. माता-पिता के प्रति आदर और सम्मान की शिक्षा मिलती है, क्योंकि भाइयों ने पिता को "याअबाना" (ऐ हमारे पिता) कहकर संबोधित किया, भले ही वे झूठ बोल रहे थे।
  3. इस आयत से यह भी पता चलता है कि संतान की परवरिश में माता-पिता का दिल बहुत नाज़ुक होता है, और बच्चों को चाहिए कि वे अपने माता-पिता के साथ सच्चाई और भलाई से पेश आएँ।
  4. यह क़िस्सा हमें सब्र और अल्लाह पर भरोसे की तालीम देता है — जैसे याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने इस मुश्किल घड़ी में सब्र किया और अल्लाह से ही मदद माँगी।
  5. यह भी सबक है कि बुरे कामों में लगे लोग अपने किए पर पर्दा डालने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाते हैं, लेकिन अल्लाह की पकड़ से कोई नहीं बच सकता।
🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — यूसुफ

15فَلَمَّا ذَهَبُوا بِهِ وَأَجْمَعُوا أَن يَجْعَلُوهُ فِي غَيَابَتِ الْجُبِّ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَيْهِ لَتُنَبِّئَنَّهُم بِأَمْرِهِمْ هَٰذَا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
ग़रज़ यूसुफ को जब ये लोग ले गए और इस पर इत्तेफ़ाक़ कर लिया कि उसको अन्धे कुएँ में डाल दें और (आख़िर ये लोग गुज़रे तो) हमने युसुफ़ के पास 'वही' भेजी कि तुम घबराओ नहीं हम अनक़रीब तुम्हें मरतबे (उँचे मकाम) पर पहुँचाएगे (तब तुम) उनके उस फेल (बद) से तम्बीह (आग़ाह) करोगे
16وَجَاءُوا أَبَاهُمْ عِشَاءً يَبْكُونَ
जब उन्हें कुछ ध्यान भी न होगा और ये लोग रात को अपने बाप के पास (बनवट) से रोते पीटते हुए आए
17قَالُوا يَا أَبَانَا إِنَّا ذَهَبْنَا نَسْتَبِقُ وَتَرَكْنَا يُوسُفَ عِندَ مَتَاعِنَا فَأَكَلَهُ الذِّئْبُ ۖ وَمَا أَنتَ بِمُؤْمِنٍ لَّنَا وَلَوْ كُنَّا صَادِقِينَ
और कहने लगे ऐ अब्बा हम लोग तो जाकर दौड़ने लगे और यूसुफ को अपने असबाब के पास छोड़ दिया इतने में भेड़िया आकर उसे खा गया हम लोग अगर सच्चे भी हो मगर आपको तो हमारी बात का यक़ीन आने का नहीं
18وَجَاءُوا عَلَىٰ قَمِيصِهِ بِدَمٍ كَذِبٍ ۚ قَالَ بَلْ سَوَّلَتْ لَكُمْ أَنفُسُكُمْ أَمْرًا ۖ فَصَبْرٌ جَمِيلٌ ۖ وَاللَّهُ الْمُسْتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ
और ये लोग यूसुफ के कुरते पर झूठ मूठ (भेड़) का खून भी (लगा के) लाए थे, याक़ूब ने कहा (भेड़िया ने ही खाया (बल्कि) तुम्हारे दिल ने तुम्हारे बचाओ के लिए एक बात गढ़ी वरना कुर्ता फटा हुआ ज़रुर होता फिर सब्र व शुक्र है और जो कुछ तुम बयान करते हो उस पर ख़ुदा ही से मदद माँगी जाती है
19وَجَاءَتْ سَيَّارَةٌ فَأَرْسَلُوا وَارِدَهُمْ فَأَدْلَىٰ دَلْوَهُ ۖ قَالَ يَا بُشْرَىٰ هَٰذَا غُلَامٌ ۚ وَأَسَرُّوهُ بِضَاعَةً ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِمَا يَعْمَلُونَ
और (ख़ुदा की शान देखो) एक काफ़ला (वहाँ) आकर उतरा उन लोगों ने अपने सक्के (पानी भरने वाले) को (पानी भरने) भेजा ग़रज़ उसने अपना डोल डाला ही था (कि यूसुफ उसमें बैठे और उसने ख़ीचा तो निकल आए) वह पुकारा आहा ये तो लड़का है और काफला वालो ने यूसुफ को क़ीमती सरमाया समझकर छिपा रखा हालॉकि जो कुछ ये लोग करते थे ख़ुदा उससे ख़ूब वाकिफ था
यूसुफकुरान सूची
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अनुवाद — यूसुफ 17

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Tuesday, August 18, 2026

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