यूसुफ · 82/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूसुफ
وَاسْأَلِ الْقَرْيَةَ الَّتِي كُنَّا فِيهَا وَالْعِيرَ الَّتِي أَقْبَلْنَا فِيهَا ۖ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ ۝٨٢
Was`alil qaryatal latee kunnaa feehaa wal`eeral lateee aqbalnaa feehaa wa innaa lasaadiqoon
📖 हिंदी अर्थ
और आप इस बस्ती (मिस्र) के लोगों से जिसमें हम लोग थे दरयाफ्त कर लीजिए और इस क़ाफले से भी जिसमें आए हैं (पूछ लीजिए) और हम यक़ीनन बिल्कुल सच्चे हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْقَرْيَةَ: यहाँ अर्थ है 'नगर के निवासी', अर्थात मिस्र के लोग।
  • الْعِيرَ: क़ाफ़िला, यानी वह कारवाँ जिसके साथ वे लोग यात्रा करके आए थे।

तफ़सीर:

जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने अपने पिता याक़ूब (अलैहिस्सलाम) को यह खबर दी कि यूसुफ़ ने चोरी की है और इसलिए उन्हें मिस्र में रोक लिया गया है, तो उन्होंने अपने पिता को आश्वस्त करने के लिए कहा: "आप हमारी बात पर विश्वास न करें तो आप उस नगर (मिस्र) के निवासियों से पूछ लीजिए जहाँ हम थे, और उस क़ाफ़िले (कारवाँ) से भी पूछ लीजिए जिसके साथ होकर हम आए हैं। वे सब गवाह हैं कि हमने जो कुछ कहा है वह सत्य है।" उन्होंने यह भी कहा कि हम अपनी बात में बिल्कुल सच्चे हैं। उनका उद्देश्य यह था कि पिता को यक़ीन हो जाए कि यूसुफ़ वास्तव में चोरी के आरोप में पकड़ा गया है, और यह कोई झूठी रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने पिता को सुझाव दिया कि वे स्वयं जाँच-पड़ताल कर लें, क्योंकि मिस्र के लोग और क़ाफ़िले वाले सभी इस घटना के गवाह हैं।

फ़ायदे:

  1. सच्चाई और ईमानदारी की गवाही के लिए दूसरों को गवाह बनाना चाहिए, ताकि बात का यक़ीन हो सके।
  2. किसी मामले में विवाद हो तो उसे स्पष्ट करने के लिए सबूत और गवाही का सहारा लेना चाहिए, यह एक अच्छा तरीक़ा है।
  3. बड़ों (माता-पिता) के साथ नर्मी और अदब से पेश आना चाहिए, और उन्हें संतुष्ट करने के लिए उचित तर्क पेश करने चाहिए।
  4. इस्लाम सिखाता है कि हर मामले में सच बोलना चाहिए और झूठ से बचना चाहिए, क्योंकि सच्चाई ही अंततः सामने आती है।


📜 आयत 80-84 — सूरा यूसुफ

80فَلَمَّا اسْتَيْأَسُوا مِنْهُ خَلَصُوا نَجِيًّا ۖ قَالَ كَبِيرُهُمْ أَلَمْ تَعْلَمُوا أَنَّ أَبَاكُمْ قَدْ أَخَذَ عَلَيْكُم مَّوْثِقًا مِّنَ اللَّهِ وَمِن قَبْلُ مَا فَرَّطتُمْ فِي يُوسُفَ ۖ فَلَنْ أَبْرَحَ الْأَرْضَ حَتَّىٰ يَأْذَنَ لِي أَبِي أَوْ يَحْكُمَ اللَّهُ لِي ۖ وَهُوَ خَيْرُ الْحَاكِمِينَ
फिर जब यूसुफ की तरफ से मायूस हुए तो बाहम मशवरा करने के लिए अलग खड़े हुए तो जो शख़्श उन सब में बड़ा था (यहूदा) कहने लगा (भाइयों) क्या तुम को मालूम नहीं कि तुम्हार वालिद ने तुम लोगों से ख़ुदा का एहद करा लिया था और उससे तुम लोग यूसुफ के बारे में क्या कुछ ग़लती कर ही चुके हो तो (भाई) जब तक मेरे वालिद मुझे इजाज़त (न) दें या खुद ख़ुदा मुझे कोई हुक्म (न) दे मै उस सर ज़मीन से हरगिज़ न हटूंगा और ख़ुदा तो सब हुक्म देने वालो से कहीं बेहतर है
81ارْجِعُوا إِلَىٰ أَبِيكُمْ فَقُولُوا يَا أَبَانَا إِنَّ ابْنَكَ سَرَقَ وَمَا شَهِدْنَا إِلَّا بِمَا عَلِمْنَا وَمَا كُنَّا لِلْغَيْبِ حَافِظِينَ
तुम लोग अपने वालिद के पास पलट के जाओ और उनसे जाकर अर्ज़ करो ऐ अब्बा अपके साहबज़ादे ने चोरी की और हम लोगों ने तो अपनी समझ के मुताबिक़ (उसके ले आने का एहद किया था और हम कुछ (अर्ज़) ग़ैबी (आफत) के निगेहबान थे नहीं
82وَاسْأَلِ الْقَرْيَةَ الَّتِي كُنَّا فِيهَا وَالْعِيرَ الَّتِي أَقْبَلْنَا فِيهَا ۖ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ
और आप इस बस्ती (मिस्र) के लोगों से जिसमें हम लोग थे दरयाफ्त कर लीजिए और इस क़ाफले से भी जिसमें आए हैं (पूछ लीजिए) और हम यक़ीनन बिल्कुल सच्चे हैं
83قَالَ بَلْ سَوَّلَتْ لَكُمْ أَنفُسُكُمْ أَمْرًا ۖ فَصَبْرٌ جَمِيلٌ ۖ عَسَى اللَّهُ أَن يَأْتِيَنِي بِهِمْ جَمِيعًا ۚ إِنَّهُ هُوَ الْعَلِيمُ الْحَكِيمُ
(ग़रज़ जब उन लोगों ने जाकर बयान किया तो) याक़ूब न कहा (उसने चोरी नहीं की) बल्कि ये बात तुमने अपने दिल से गढ़ ली है तो (ख़ैर) सब्र (और ख़ुदा का) शुक्र ख़ुदा से तो (मुझे) उम्मीद है कि मेरे सब (लड़कों) को मेरे पास पहुँचा दे बेशक वह बड़ा वाकिफ़ कार हकीम है
84وَتَوَلَّىٰ عَنْهُمْ وَقَالَ يَا أَسَفَىٰ عَلَىٰ يُوسُفَ وَابْيَضَّتْ عَيْنَاهُ مِنَ الْحُزْنِ فَهُوَ كَظِيمٌ
और याक़ूब ने उन लोगों की तरफ से मुँह फेर लिया और (रोकर) कहने लगे हाए अफसोस यूसुफ पर और (इस क़दर रोए कि) उनकी ऑंखें सदमे से सफेद हो गई वह तो बड़े रंज के ज़ाबित (झेलने वाले) थे
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
82आयत

अनुवाद — यूसुफ 82

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Friday, October 2, 2026

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