अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَصْلَوْنَهَا: इसमें प्रवेश करेंगे और इसकी गर्मी (आग) की पीड़ा को भोगेंगे।
- الْقَرَار: ठहरने की जगह, निवास स्थान।
व्याख्या:
यह आयत उन काफिरों के अंतिम परिणाम को बयान कर रही है, जिन्होंने अल्लाह की नेमतों के बदले कुफ्र को चुना और अपने अनुयायियों को विनाश के घर की ओर ले गए। उनका ठिकाना जहन्नुम (नरक) है, जिसमें वे प्रवेश करेंगे और उसकी भयंकर आग की गर्मी को अपने शरीर से महसूस करेंगे। यह आग उन्हें हर तरफ से घेर लेगी, और वे इससे बचने का कोई रास्ता नहीं पाएँगे। अल्लाह ने इस स्थान को "बुरा ठिकाना" कहकर स्पष्ट कर दिया कि यह ठहरने की दृष्टि से सबसे खराब जगह है—न वहाँ आराम है, न राहत, न कोई सुख-चैन। यह उनके कर्मों का सटीक बदला है, क्योंकि उन्होंने सत्य को अस्वीकार किया और अपने लिए यही स्थान चुना।
शिक्षाएँ और लाभ:
- यह आयत हमें अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करने की सीख देती है, क्योंकि नेमतों को नकारने का अंजाम विनाश है।
- नरक का वर्णन सुनकर हर मुसलमान को अपने आचरण की समीक्षा करनी चाहिए और अल्लाह की रहमत की ओर लौटना चाहिए।
- यह जानना कि नरक एक वास्तविक स्थान है, हमें गुनाहों से बचने और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है।
- अल्लाह का न्याय पूर्ण है—जो सत्य को ठुकराकर गुमराही अपनाते हैं, उनके लिए बुरा ठिकाना ही उचित है। यह हमें सत्य के मार्ग पर दृढ़ रहने की ताकत देता है।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि दुनिया की अस्थायी सुख-सुविधाओं के लिए आख़िरत की स्थायी भलाई को नहीं बेचना चाहिए।
📜 आयत 27-31 — सूरा इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 29
सूरा इब्राहीम आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि सबके सब जहन्नुम वासिल होगें और वह (क्या) बुरा…सूरा आयत 29/52 — सूरा इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा इब्राहीम सुनें, सूरा इब्राहीम अनुवाद, सूरा इब्राहीम mp3, सूरा इब्राहीम pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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