अल-हिज्र · 12/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ ۝١٢
kazaalika naslukuhoo fee quloobil mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
हम (गोया खुद) इसी तरह इस (गुमराही) को (उन) गुनाहगारों के दिल में डाल देते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَسْلُكُهُ (हम इसे प्रवेश कराते हैं): इसका अर्थ है किसी चीज़ को किसी चीज़ के अंदर डालना, जैसे धागे को सुई में पिरोया जाता है। यहाँ अर्थ है कि हम इसे (कुफ्र और झुठलाने को) दिलों में डाल देते हैं।
  • الْمُجْرِمِينَ (अपराधियों): उन लोगों से अभिप्राय है जिन्होंने कुफ्र और रसूलों को झुठलाने का अपराध किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस प्रकार हमने पिछली उम्मतों के दिलों में कुफ्र और रसूलों का मज़ाक उड़ाने की बीमारी डाली थी, ठीक उसी प्रकार हम मक्का के मुशरिकों के दिलों में भी यही चीज़ डालते हैं, जिन्होंने अल्लाह के साथ कुफ्र और उसके रसूल को झुठलाने का अपराध किया। यह उनकी अपनी हठधर्मिता और अंधेपन का नतीजा है कि वे उस ज़िक्र (क़ुरआन) पर ईमान नहीं लाते जो आप पर उतारा गया है। अल्लाह की यही सुन्नत (रीति) पिछले काफिरों के साथ रही है कि वे हक़ को ठुकराते रहे और अल्लाह उन्हें उनके हाल पर छोड़ता रहा, फिर उनकी सज़ा आई। ये मुशरिक भी उन्हीं की तरह हैं, और जो लोग कुफ्र और झुठलाने पर क़ायम रहेंगे, उन्हें भी वैसी ही सज़ा दी जाएगी।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत बताती है कि अल्लाह का क़ानून (सुन्नत) बदलता नहीं — जो हक़ को जानबूझकर ठुकराते हैं, उनके दिल धीरे-धीरे सख्त हो जाते हैं और वे सत्य को स्वीकारने की तौफ़ीक़ खो देते हैं।
  2. यहाँ से हमें यह चेतावनी मिलती है कि हमें अपने दिलों को साफ़ रखना चाहिए और कुफ्र, शिर्क या नबी की शिक्षाओं का मज़ाक उड़ाने जैसे कामों से बचना चाहिए, क्योंकि ये दिल को अंधा कर देते हैं।
  3. यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि जब वे हक़ पर हों तो मुखालिफ़ों की ज़िद और हठ से घबराएँ नहीं, क्योंकि अल्लाह का वादा है कि सच्चाई बुलंद होगी और झुठलाने वालों का अंजाम बुरा होगा।
  4. इसमें रसूल (ﷺ) के लिए तसल्ली है कि आपके समुदाय की सख्ती कोई नई बात नहीं, बल्कि यह पुरानी उम्मतों का तरीका रहा है, और अल्लाह अपने नबी की मदद करता है।


📜 आयत 10-14 — अल-हिज्र

10وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِي شِيَعِ الْأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले भी अगली उम्मतों में (और भी बहुत से) रसूल भेजे
11وَمَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और (उनकी भी यही हालत थी कि) उनके पास कोई रसूल न आया मगर उन लोगों ने उसकी हँसी ज़रुर उड़ाई
12كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ
हम (गोया खुद) इसी तरह इस (गुमराही) को (उन) गुनाहगारों के दिल में डाल देते हैं
13لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ الْأَوَّلِينَ
ये कुफ्फ़ार इस (क़ुरान) पर ईमान न लाएँगें और (ये कुछ अनोखी बात नहीं) अगलों के तरीक़े भी (ऐसे ही) रहें है
14وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًا مِّنَ السَّمَاءِ فَظَلُّوا فِيهِ يَعْرُجُونَ
और अगर हम अपनी कुदरत से आसमान का एक दरवाज़ा भी खोल दें और ये लोग दिन दहाड़े उस दरवाज़े से (आसमान पर) चढ़ भी जाएँ
अल-हिज्रकुरान सूची
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अनुवाद — अल-हिज्र 12

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Tuesday, August 18, 2026

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