अल-हिज्र · 11/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
وَمَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ ۝١١
Wa maa yaateehim mir Rasoolin illaa kaanoo bihee yastahzi`oon
📖 हिंदी अर्थ
और (उनकी भी यही हालत थी कि) उनके पास कोई रसूल न आया मगर उन लोगों ने उसकी हँसी ज़रुर उड़ाई

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَهْزِئُونَ: मज़ाक उड़ाना, उपहास करना, ठट्ठा करना।

व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को सांत्वना देते हुए बताते हैं कि हे नबी! जिस प्रकार आपकी क़ौम के लोग आपका मज़ाक उड़ाते हैं और आपको झुठलाते हैं, यह कोई नई बात नहीं है। हमने आपसे पहले भी पिछली उम्मतों की ओर अपने रसूल भेजे थे, लेकिन जब भी कोई रसूल उनके पास आया, तो उन लोगों ने उसका उपहास किया और उसे झुठलाया। यह उन काफ़िरों का पुराना तरीक़ा रहा है कि वे सत्य के प्रति उपेक्षा और तिरस्कार दिखाते हैं। इसलिए आपको इस पर अफ़सोस नहीं करना चाहिए, बल्कि धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि यही पैग़म्बरों की परंपरा रही है। जिस प्रकार पिछले रसूलों के साथ उनकी क़ौमों ने मज़ाक़ किया, उसी प्रकार आपके साथ भी आपकी क़ौम के मुशरिकीन कर रहे हैं। यह आपके लिए कोई अनोखी बात नहीं है, बल्कि यह तो रसूलों की आज़माइश का एक हिस्सा रहा है।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से नबी ﷺ और उनके अनुयायियों को धैर्य और सब्र का पाठ मिलता है कि जब पिछले नबियों को भी इसी तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा, तो हमें भी अपने ईमान पर क़ायम रहना चाहिए।
  2. यह आयत बताती है कि सत्य के दुश्मनों का तरीक़ा हमेशा से एक जैसा रहा है—वे सत्य का मज़ाक उड़ाकर उसे कमज़ोर करने की कोशिश करते हैं, लेकिन अल्लाह का दीन हमेशा बुलंद रहता है।
  3. इससे मुसलमानों को यह सीख मिलती है कि जब कोई व्यक्ति अल्लाह के दीन की दावत देता है, तो उसे लोगों के उपहास और तंज़ का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए, और यह कि यह उसके ईमान की परीक्षा है।
  4. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि नबियों की सीरत को अपनाना चाहिए—धैर्य, सब्र और अल्लाह पर भरोसा—क्योंकि अंजाम हमेशा सच्चे लोगों के पक्ष में होता है।


📜 आयत 9-13 — सूरा अल-हिज्र

9إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ
बेशक हम ही ने क़ुरान नाज़िल किया और हम ही तो उसके निगेहबान भी हैं
10وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِي شِيَعِ الْأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले भी अगली उम्मतों में (और भी बहुत से) रसूल भेजे
11وَمَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और (उनकी भी यही हालत थी कि) उनके पास कोई रसूल न आया मगर उन लोगों ने उसकी हँसी ज़रुर उड़ाई
12كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ
हम (गोया खुद) इसी तरह इस (गुमराही) को (उन) गुनाहगारों के दिल में डाल देते हैं
13لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ الْأَوَّلِينَ
ये कुफ्फ़ार इस (क़ुरान) पर ईमान न लाएँगें और (ये कुछ अनोखी बात नहीं) अगलों के तरीक़े भी (ऐसे ही) रहें है
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
11आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 11

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Friday, October 2, 2026

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