Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- خَطْبُكُمْ: तुम्हारा मामला, तुम्हारा कार्य, या वह महत्वपूर्ण विषय जिसके लिए तुम आए हो।
- الْمُرْسَلُونَ: भेजे गए (फ़रिश्ते), जो अल्लाह की ओर से किसी कार्य से भेजे गए हों।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपने मेहमान फ़रिश्तों से कहा कि "मुझे तुमसे डर लग रहा है," तो फ़रिश्तों ने उन्हें आश्वस्त किया और उन्हें अल्लाह की ओर से दो शुभ सूचनाएँ दीं: एक यह कि उन्हें एक बुद्धिमान पुत्र (हज़रत इस्हाक़) मिलेगा, और दूसरी यह कि वे क़ौम-ए-लूत (अलैहिस्सलाम) को सज़ा देने के लिए भेजे गए हैं। इसके बाद हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने उनसे पूछा: "तो फिर तुम्हारा मामला क्या है, ऐ अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्तों?" यानी तुम्हारे आने का असली कारण और उद्देश्य क्या है? यह प्रश्न उन्होंने इसलिए किया ताकि वे उनके आने के मक़सद को स्पष्ट रूप से जान सकें, क्योंकि शुभ सूचना के अलावा भी उनके पास कोई और महत्वपूर्ण कार्य हो सकता था। फ़रिश्तों ने जवाब में बताया कि वे एक अपराधी क़ौम (क़ौम-ए-लूत) को सज़ा देने के लिए भेजे गए हैं। यह प्रश्न उनके अदब और शिष्टाचार को दर्शाता है, कि उन्होंने फ़रिश्तों से उनके कार्य के बारे में पूछा, न कि उनके रहस्यों में दखल दिया।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह के फ़रिश्तों का सम्मान: हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का फ़रिश्तों से इस तरह पूछना सिखाता है कि अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्तों और उनके कार्यों का आदर करना चाहिए, और उनसे अच्छे अंदाज़ में बात करनी चाहिए।
- शुभ सूचना के बाद भी सवाल: यह दर्शाता है कि इंसान को अल्लाह की रहमत और शुभ सूचनाओं पर खुश होना चाहिए, लेकिन साथ ही उसे अल्लाह के फ़ैसलों और उसके कार्यों के बारे में जानने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि उसका विश्वास और मज़बूत हो।
- निराशा से बचना: इस आयत से पहले हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने कहा था कि "अल्लाह की रहमत से केवल गुमराह लोग ही निराश होते हैं।" यह सिखाता है कि मुसलमान को कभी भी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।
- अल्लाह के कार्यों में हिकमत: फ़रिश्तों का क़ौम-ए-लूत को सज़ा देने के लिए भेजा जाना यह दर्शाता है कि अल्लाह हर काम हिकमत (बुद्धिमत्ता) के साथ करता है, और उसके फ़ैसले न्याय और अदल पर आधारित होते हैं।
📜 आयत 55-59 — सूरा अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 57
सूरा अल-हिज्र आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (फिर) इबराहीम ने कहा ऐ (ख़ुदा के) भेजे हुए (फरिश्तों)…सूरा आयत 57/99 — सूरा अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हिज्र सुनें, सूरा अल-हिज्र अनुवाद, सूरा अल-हिज्र mp3, सूरा अल-हिज्र pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हिज्र
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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