अल-हिज्र · 58/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
قَالُوا إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ ۝٥٨
Qaaloo innaaa ursilnaaa ilaa qawmim mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
उन्होंने कहा कि हम तो एक गुनाहगार क़ौम की तरफ (अज़ाब नाज़िल करने के लिए) भेजे गए हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُرْسِلْنَا: हमें भेजा गया है।
  • قَوْمٍ مُجْرِمِينَ: अपराधी क़ौम, यानी वे लोग जो बड़े पापों और अवज्ञा में डूबे हुए थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़रिश्ते हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास सुसमाचार लेकर आए, तो उन्होंने यह भी बताया कि वे किस उद्देश्य से भेजे गए हैं। उन्होंने कहा: "हमें अल्लाह ने एक अपराधी क़ौम की ओर भेजा है।" यह क़ौम हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम थी, जो सदूम (सदोम) नामक बस्ती में रहती थी। ये लोग अत्याचार, व्यभिचार, और ऐसे घृणित कार्यों में लिप्त थे जो उनसे पहले किसी ने नहीं किए थे। वे अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले और पाप में डूबे हुए थे। फ़रिश्तों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका मिशन इस क़ौम को उनके अपराधों की सज़ा देना है, लेकिन हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके अनुयायियों को बचा लिया जाएगा, सिवाय उनकी पत्नी के जो अल्लाह की अवज्ञा में उनके साथ नहीं थी और सज़ा में शामिल होगी।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की ओर से भेजे गए फ़रिश्ते और रसूल सत्य के साथ आते हैं, और उनका हर कार्य अल्लाह की इच्छा और आदेश के अनुसार होता है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पापियों को उनके अपराधों पर तुरंत सज़ा नहीं देता, बल्कि उन्हें मौका देता है, लेकिन जब सज़ा का समय आता है, तो कोई उसे टाल नहीं सकता।
  3. अल्लाह की रहमत अपने नेक बंदों पर होती है, और वह उन्हें आज़माइशों और सज़ाओं से बचाता है, जैसे उसने हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) को बचाया।
  4. यह आयत हमें यह भी बताती है कि पाप और अवज्ञा का अंजाम बहुत भयानक होता है, इसलिए हमें अल्लाह के आदेशों का पालन करना चाहिए और उन कार्यों से बचना चाहिए जो उसकी नाराज़गी का कारण बनते हैं।
  5. इस क़िस्से से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की याद और उसकी रहमत की उम्मीद हमेशा रखनी चाहिए, क्योंकि वही सच्चा रक्षक और सहायक है।
🎧 सुनें

📜 आयत 56-60 — अल-हिज्र

56قَالَ وَمَن يَقْنَطُ مِن رَّحْمَةِ رَبِّهِ إِلَّا الضَّالُّونَ
इबराहीम ने कहा गुमराहों के सिवा और ऐसा कौन है जो अपने परवरदिगार की रहमत से ना उम्मीद हो
57قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ
(फिर) इबराहीम ने कहा ऐ (ख़ुदा के) भेजे हुए (फरिश्तों) तुम्हें आख़िर क्या मुहिम दर पेश है
58قَالُوا إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ
उन्होंने कहा कि हम तो एक गुनाहगार क़ौम की तरफ (अज़ाब नाज़िल करने के लिए) भेजे गए हैं
59إِلَّا آلَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ أَجْمَعِينَ
मगर लूत के लड़के वाले कि हम उन सबको ज़रुर बचा लेगें मगर उनकी बीबी जिसे हमने ताक लिया है
60إِلَّا امْرَأَتَهُ قَدَّرْنَا ۙ إِنَّهَا لَمِنَ الْغَابِرِينَ
कि वह ज़रुर (अपने लड़के बालों के) पीछे (अज़ाब में) रह जाएगी
अल-हिज्रकुरान सूची
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अनुवाद — अल-हिज्र 58

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Tuesday, August 18, 2026

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