अल-हिज्र · 59/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
إِلَّا آلَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ أَجْمَعِينَ ۝٥٩
Illaaa Aala Loot; innaa lamunajjoohum ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
मगर लूत के लड़के वाले कि हम उन सबको ज़रुर बचा लेगें मगर उनकी बीबी जिसे हमने ताक लिया है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آلَ لُوطٍ: हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) के अनुयायी और उन पर ईमान लाने वाले लोग।
  • لَمُنَجُّوهُمْ: हम उन्हें अवश्य बचा लेंगे (मुक्ति देंगे)।
  • أَجْمَعِينَ: सभी को, बिना किसी अपवाद के।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम पर आने वाले अज़ाब के सिलसिले में है। फ़रिश्तों ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को सूचना दी कि उन्हें उस बस्ती (सदूम) के लोगों को हलाक करने के लिए भेजा गया है, जो भारी अपराधों और कुकर्मों में डूबे हुए थे। लेकिन इस सामान्य विनाश से हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) के परिवार और उनके अनुयायियों को बाहर रखा गया है। अल्लाह ने फ़रमाया कि हम उन्हें पूरी तरह से उस अज़ाब से बचा लेंगे, जो उनकी क़ौम पर आएगा। यह अल्लाह की ओर से उनके ईमान और नेकी का इनाम है। हालाँकि, हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की पत्नी इस रहमत से महरूम रही, क्योंकि उसने क़ौम के कुकर्मों का साथ दिया था और ईमान नहीं लाई थी, इसलिए वह भी उन्हीं लोगों के साथ अज़ाब में शामिल रही।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को हर मुसीबत और अज़ाब से बचाता है, भले ही वे गुनाहगार क़ौम के बीच रहते हों। यह अल्लाह की रहमत और कृपा का प्रमाण है।
  2. ईमान और नेकी ही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के अज़ाब से महफ़ूज़ रखती है, चाहे उसका परिवार या क़ौम कितनी भी बुरी क्यों न हो।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का फ़ैसला अटल है, लेकिन वह अपने रहमत के हक़दार बंदों को पहचानता है और उन्हें बचाने का ज़रिया बनाता है।
  4. इससे यह भी पता चलता है कि रिश्तेदारी या ख़ानदान का नाता अल्लाह के यहाँ कोई वज़न नहीं रखता, बल्कि ईमान और अमल ही मायने रखते हैं। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की पत्नी का उदाहरण इसका सबूत है।
  5. यह आयत मुसलमानों को यह उम्मीद देती है कि अगर वे अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी इबादत में जुटे रहें, तो अल्लाह उन्हें हर बुराई और आफ़त से निकालने की तदबीर करेगा।


📜 आयत 57-61 — अल-हिज्र

57قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ
(फिर) इबराहीम ने कहा ऐ (ख़ुदा के) भेजे हुए (फरिश्तों) तुम्हें आख़िर क्या मुहिम दर पेश है
58قَالُوا إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ
उन्होंने कहा कि हम तो एक गुनाहगार क़ौम की तरफ (अज़ाब नाज़िल करने के लिए) भेजे गए हैं
59إِلَّا آلَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ أَجْمَعِينَ
मगर लूत के लड़के वाले कि हम उन सबको ज़रुर बचा लेगें मगर उनकी बीबी जिसे हमने ताक लिया है
60إِلَّا امْرَأَتَهُ قَدَّرْنَا ۙ إِنَّهَا لَمِنَ الْغَابِرِينَ
कि वह ज़रुर (अपने लड़के बालों के) पीछे (अज़ाब में) रह जाएगी
61فَلَمَّا جَاءَ آلَ لُوطٍ الْمُرْسَلُونَ
ग़रज़ जब (ख़ुदा के) भेजे हुए (फरिश्ते) लूत के बाल बच्चों के पास आए तो लूत ने कहा कि तुम तो (कुछ) अजनबी लोग (मालूम होते हो)
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अनुवाद — अल-हिज्र 59

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Tuesday, August 18, 2026

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