अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَاصْدَعْ: इसका अर्थ है "प्रकट करो, खोलकर बताओ, स्पष्ट रूप से घोषित करो।" यह शब्द उस क्रिया के लिए आता है जो किसी चीज़ को तोड़कर या खोलकर स्पष्ट कर दे।
- بِمَا تُؤْمَرُ: "उस चीज़ के साथ जिसका तुम्हें आदेश दिया जा रहा है" अर्थात वह सब कुछ जो अल्लाह ने तुम्हें पहुँचाने का आदेश दिया है।
- وَأَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِكِينَ: "और मुशरिकों (बहुदेववादियों) से मुँह मोड़ लो" अर्थात उनकी बातों, उनके उपहास और उनके विरोध की परवाह मत करो।
व्याख्या:
हे नबी! अल्लाह तआला आपको आदेश देता है कि आप उस सत्य को, जो आपको सौंपा गया है, अब पूरी तरह से प्रकट कर दें। इसे छिपाकर न रखें, बल्कि इसे खुलेआम लोगों के सामने रख दें — चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न लगे। यह आदेश उस समय आया जब आपने अपने रिश्तेदारों को पहले इस्लाम की दावत दी थी, और अब अल्लाह आपको आदेश देता है कि इस दावत को सार्वजनिक रूप से सभी लोगों तक पहुँचाएँ। आपको हर उस बात को बताना है जो अल्लाह ने आपको आदेश दिया है — चाहे वह तौहीद (एकेश्वरवाद) का संदेश हो, आख़िरत का डर हो, या अच्छे कर्मों की प्रेरणा हो। साथ ही, आपको मुशरिकों (बहुदेववादियों) से किनारा कर लेना है — उनकी धमकियों, उनके उपहास, उनके प्रस्तावों और उनके विरोध की कोई परवाह नहीं करनी है। आपका काम केवल संदेश पहुँचाना है, उनके जवाब या उनकी स्वीकृति की ज़िम्मेदारी आप पर नहीं है। अल्लाह ने आपको उनकी बातों से बरी (मुक्त) कर दिया है, इसलिए आप निडर होकर सत्य का प्रचार करें।
शिक्षाएँ और लाभ:
- सत्य को प्रकट करने का साहस: यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को कहने में कभी डरना नहीं चाहिए। चाहे सामने कितना भी विरोध क्यों न हो, सत्य को खुलेआम बोलना चाहिए।
- अल्लाह पर भरोसा: जब हम अल्लाह के आदेश का पालन करते हैं, तो अल्लाह हमारी रक्षा करता है। हमें केवल उसी की रज़ा (प्रसन्नता) का ध्यान रखना चाहिए, लोगों की नाराज़गी की नहीं।
- विरोध की परवाह न करना: इस्लाम सिखाता है कि जब आप सत्य पर हों, तो विरोधियों की बातों से विचलित न हों। उनकी बातें सुनकर अपने मार्ग से न हटें।
- दायित्व का बोध: हर मुसलमान का कर्तव्य है कि वह जो जानता है, उसे दूसरों तक पहुँचाए, भले ही वह एक ही आयत क्यों न हो। संदेश पहुँचाना हमारा काम है, परिणाम अल्लाह के हाथ में है।
- सच्चाई की जीत: यह आयत हमें विश्वास दिलाती है कि अंततः सत्य की ही जीत होती है, चाहे शुरुआत में विरोध कितना भी भयंकर क्यों न हो।
📜 आयत 92-96 — अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 94
सूरा अल-हिज्र आयत 94 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मुशरेकीन की तरफ से मुँह फेर लोसूरा आयत 94/99 — अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हिज्र सुनें, अल-हिज्र अनुवाद, अल-हिज्र mp3, अल-हिज्र pdf. आयत 92–96. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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