Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاعْبُدْ: निरंतर इबादत करते रहो, अपने आपको पूरी तरह से अल्लाह की आज्ञाकारिता में समर्पित कर दो।
- رَبَّكَ: तुम्हारा पालनहार, जिसने तुम्हें पैदा किया और तुम्हारी परवरिश की।
- حَتَّىٰ: यहाँ तक कि, जब तक।
- الْيَقِينُ: निश्चित ज्ञान, जिसमें कोई संदेह न हो। यहाँ इसका अर्थ मृत्यु है, क्योंकि मृत्यु एक ऐसी सच्चाई है जिस पर किसी को संदेह नहीं होता।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को एक स्पष्ट और स्थायी आदेश दे रहा है कि आप अपने पालनहार की इबादत पर दृढ़ रहें और उसे कभी न छोड़ें। यह आदेश केवल एक समय या अवस्था के लिए नहीं है, बल्कि यह जीवन भर जारी रहने वाला है। अर्थात् जब तक आपकी आँखों के सामने वह निश्चित चीज़ न आ जाए — जो मृत्यु है — तब तक इबादत में लगे रहो। मृत्यु को "यक़ीन" इसलिए कहा गया है क्योंकि यह एक ऐसी सच्चाई है जिसमें किसी को कोई संदेह नहीं है; हर व्यक्ति को इसका अनुभव होना है। यह आदेश नबी ﷺ को भी है और उनके माध्यम से पूरी उम्मत को भी। इसका अर्थ यह है कि इबादत जीवन का एक स्थायी कार्यक्रम होना चाहिए, न कि केवल किसी विशेष समय या परिस्थिति तक सीमित। नबी ﷺ ने इस आदेश का पूर्ण रूप से पालन किया और जीवन भर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहे, यहाँ तक कि मृत्यु भी उन्हें इबादत की हालत में ही आई। यह आयत सूरह अल-हिज्र की अंतिम आयत है और यह उन सभी बातों का निष्कर्ष है जो इस सूरह में कुरैश के काफिरों के तानों और मुशरिकों के विरोध के जवाब में कही गईं — कि इन सबके बावजूद आप अपने रब की इबादत पर डटे रहें और उसी पर भरोसा रखें।
फ़ायदे (उपदेश):
- इबादत में स्थिरता और निरंतरता अल्लाह की सबसे पसंदीदा चीज़ है। मुसलमान को चाहिए कि वह इबादत को कभी न छोड़े, चाहे हालात कैसे भी हों।
- मृत्यु एक निश्चित सच्चाई है, और इसे याद रखना इंसान को आलस्य और ग़फलत से बचाता है। जो व्यक्ति मृत्यु को याद रखता है, वह अपने जीवन को बेकार के कामों में नहीं लगाता।
- यह आयत हमें सिखाती है कि कठिनाइयों और विरोध के बावजूद अल्लाह की इबादत पर कायम रहना चाहिए। सच्चा मुसलमान वही है जो हर हाल में अपने रब से जुड़ा रहे।
- इबादत का उद्देश्य केवल दुनिया की भलाई नहीं है, बल्कि यह आख़िरत की सफलता का ज़रिया है। जो व्यक्ति मृत्यु तक इबादत पर रहेगा, वह अल्लाह के सामने उस हालत में पेश होगा जो उसे पसंद है।
- यह आयत बताती है कि इस्लाम में इबादत का कोई अंत नहीं है; यह जीवन के अंतिम क्षण तक जारी रहती है। यही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है।
📜 आयत 97-99 — सूरा अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 99
सूरा अल-हिज्र आयत 99 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब तक तुम्हारे पास मौत आए अपने परवरदिगार की…सूरा आयत 99/99 — सूरा अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हिज्र सुनें, सूरा अल-हिज्र अनुवाद, सूरा अल-हिज्र mp3, सूरा अल-हिज्र pdf. आयत 97–99. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हिज्र
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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