अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْأَنْعَامِ: ऊँट, गाय, भेड़ और बकरी — ये चार प्रकार के पशु।
- عِبْرَةً: सीख और शिक्षा लेने की जगह, नसीहत।
- فَرْثٍ: पेट के अंदर का चारा जो पचने के बाद गोबर बनने से पहले की अवस्था में होता है।
- خَالِصًا: बिल्कुल शुद्ध, जिसमें कोई मिलावट न हो।
- سَائِغًا: आसानी से गले से उतरने वाला, पीने में सुखद।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! इसमें कोई संदेह नहीं कि तुम्हारे लिए इन पशुओं (ऊँट, गाय, भेड़, बकरी) में बड़ी सीख और शिक्षा है। अल्लाह तआला तुम्हें उनके पेट से दूध पिलाता है। यह दूध उनके शरीर के अंदर उस चारे के बीच से निकलता है जो पचकर गोबर बनने की ओर बढ़ रहा होता है, और खून के बीच से भी गुज़रता है। लेकिन फिर भी यह दूध बिल्कुल शुद्ध, साफ, सफेद और स्वादिष्ट निकलता है — न उसमें गोबर की गंध होती है, न खून का रंग, न उसका स्वाद। यह पीने वालों के लिए बड़ा ही आसान, मीठा और गले से उतरने वाला होता है।
यह अल्लाह की कुदरत का अद्भुत नमूना है। जिस पशु के पेट में गंदगी और खून दोनों मौजूद हैं, उसी के बीच से अल्लाह एक ऐसा पवित्र और शुद्ध पेय पदार्थ निकालता है जो लाखों लोगों के लिए जीवन का स्रोत बनता है। यह कोई इंसानी कारीगरी नहीं, बल्कि अल्लाह की रचना का चमत्कार है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करना: यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने आस-पास की चीज़ों पर ध्यान दें। दूध जैसी साधारण चीज़ में अल्लाह की कितनी बड़ी ताकत छिपी है। जो खून और गोबर के बीच से शुद्ध दूध निकाल सकता है, वही अल्लाह हर काम कर सकता है।
- शुद्धता का पैग़ाम: जिस तरह दूध गंदगी के बीच से निकलकर भी पूरी तरह शुद्ध रहता है, उसी तरह एक मुसलमान को चाहिए कि वह दुनिया की गंदगियों और पापों के बीच रहकर भी अपने दिल और अमल को पाक और साफ रखे।
- रिज़्क़ में बरकत: अल्लाह ने इंसान के लिए पशुओं में यह नेमत रखी है। यह हमें सिखाता है कि हमारा रिज़्क़ अल्लाह के हाथ में है, और वह जिस तरह चाहता है, हमें देता है। इसलिए हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए।
- इस्लाम की प्यारी तालीम: इस्लाम हमें सिर्फ इबादत का हुक्म नहीं देता, बल्कि हमें अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी अल्लाह की नेमतों को पहचानने और उन पर ग़ौर करने की तालीम देता है। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि वह हर चीज़ में इंसान को अल्लाह के करीब ले जाता है।
📜 आयत 64-68 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 66
सूरा अन-नहल आयत 66 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसमें शक़ नहीं कि चौपायों में भी तुम्हारे लिए…सूरा आयत 66/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 64–68. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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