Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَكَرًا (सकरन): नशीली चीज़, शराब (यहाँ इसका अर्थ है वह चीज़ जो अक़्ल को ज़ाइल कर दे)।
- رِزْقًا حَسَنًا (रिज़्क़न हसनन): अच्छी और पाक रोज़ी, जैसे खजूर, अंगूर, किशमिश, सिरका आदि।
- لَآيَةً (लआयतन): निशानी, सबूत, दलील।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपनी उन महान नेमतों की तरफ़ इशारा कर रहा है जो उसने इंसानों पर इनाम की हैं। वह फ़रमाता है कि खजूर के दरख़्तों और अंगूर की बेलों के फलों से तुम लोग दो तरह की चीज़ें बनाते हो: एक तो सकर (नशीली चीज़) जो अक़्ल को ख़त्म कर देती है — और यह हुक्म नाज़िल होने से पहले की बात है, बाद में शराब को क़ुरआन और सुन्नत के ज़रिए हराम कर दिया गया। दूसरी चीज़ अच्छी रोज़ी है, जैसे पकी हुई खजूर, अंगूर, किशमिश, सिरका, शीरा (गुड़) और दूसरे पाक फल और खाद्य पदार्थ जिनसे लोग फ़ायदा उठाते हैं और अपनी गुज़र-बसर करते हैं।
इन चीज़ों में अल्लाह की क़ुदरत की बड़ी निशानियाँ हैं — कि कैसे एक बीज से दरख़्त उगता है, फिर उस पर मीठे और रंग-बिरंगे फल आते हैं, और उन्हीं फलों से इंसान कई किस्म की चीज़ें तैयार कर लेता है। यह सब उस ज़ात की तरफ़ इशारा करता है जो हर चीज़ पर क़ादिर है। मगर यह निशानी सिर्फ़ उन लोगों को समझ आती है जो अक़्ल रखते हैं, ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं और इन नेमतों पर दिल से ईमान लाते हैं। जो लोग अक़्ल का इस्तेमाल करते हैं, वही इन आयतों से सबक़ हासिल करते हैं और अल्लाह की बड़ाई बयान करते हैं।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करना ईमान की निशानी है — जब इंसान खजूर और अंगूर जैसी चीज़ों को देखता है तो उसे अल्लाह की क़ुदरत और हिकमत का एहसास होता है।
- इस आयत से साबित है कि शराब और हर नशीली चीज़ अच्छी रोज़ी नहीं है, बल्कि वह नुक़सानदेह है, इसलिए इस्लाम ने उसे हराम किया और उसकी जगह पाक और अच्छी चीज़ों को हलाल ठहराया।
- इस्लाम इंसान को अक़्ल और समझ की क़द्र करना सिखाता है — वह चीज़ जो अक़्ल को ख़त्म करे वह इस्लाह के ख़िलाफ़ है, और जो चीज़ अक़्ल और जिस्म को फ़ायदा पहुँचाए वही पसंदीदा है।
- क़ुरआन नेमतों को याद दिलाकर इंसान के दिल में अल्लाह की मुहब्बत और शुक्र का जज़्बा पैदा करता है, ताकि वह अपने रब की इबादत में लगा रहे और उसकी नाफ़रमानी से बचे।
📜 आयत 65-69 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 67
सूरा अन-नहल आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसी तरह खुरमें और अंगूर के फल से (हम…सूरा आयत 67/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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