अल-इसरा · 18/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
مَّن كَانَ يُرِيدُ الْعَاجِلَةَ عَجَّلْنَا لَهُ فِيهَا مَا نَشَاءُ لِمَن نُّرِيدُ ثُمَّ جَعَلْنَا لَهُ جَهَنَّمَ يَصْلَاهَا مَذْمُومًا مَّدْحُورًا ۝١٨
Man kaana yureedul `aajilata `ajjalnaa lahoo feehaa maa nashaaa`u liman nureedu summa ja`alnaa lahoo Jahannama yaslaahaa mazmoomammad hooraa
📖 हिंदी अर्थ
(और गवाह याहिद की ज़रुरत नहीं) और जो शख़्श दुनिया का ख्वाहाँ हो तो हम जिसे चाहते और जो चाहते हैं उसी दुनिया में सिरदस्त (फ़ौरन) उसे अता करते हैं (मगर) फिर हमने उसके लिए तो जहन्नुम ठहरा ही रखा है कि वह उसमें बुरी हालत से रौंदा हुआ दाख़िल होगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • العَاجِلَةَ: शीघ्र मिलने वाली चीज़, अर्थात संसार (दुनिया)।
  • يَصْلَاهَا: उसमें प्रवेश करके उसकी आग की तपिश सहेगा।
  • مَذْمُومًا: निंदित, जिसकी निंदा की जाए।
  • مَدْحُورًا: अपमानित, रहमत से दूर किया हुआ।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिनकी नीयत और मक़सद सिर्फ़ दुनिया की जल्दी मिलने वाली चीज़ें हासिल करना होता है। वे आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, न ही उसके लिए कोई अमल करते हैं। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने उनके हिस्से में दुनिया की जो चीज़ें लिख दी हैं, वह उन्हें दे देते हैं — लेकिन यह हमारी मर्ज़ी से होता है, न कि उनकी ख्वाहिश से। हम जिसे चाहते हैं उसे देते हैं और जितना चाहते हैं देते हैं, क्योंकि हर शख्स अपनी मर्ज़ी से सब कुछ नहीं पा सकता। फिर आख़िरत में उसका अंजाम यह होगा कि उसे जहन्नम में डाला जाएगा, जहाँ वह उसकी आग में जलेगा। वहाँ वह निंदित होगा — क्योंकि उसने दुनिया को आख़िरत पर तरजीह दी — और अल्लाह की रहमत से दूर कर दिया जाएगा। यह सज़ा उसके उसी रवैये का नतीजा है कि उसने सिर्फ़ दुनिया के लिए काम किया और आख़िरत को भुला दिया।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि दुनिया की चीज़ें अल्लाह के हाथ में हैं, और वह जिसे चाहे जितना दे। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह दुनिया के पीछे इस कदर न भागे कि आख़िरत ही भूल जाए।
  2. यह आयत हमें आख़िरत की याद दिलाती है और बताती है कि जो लोग सिर्फ़ दुनिया के लिए जीते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी में दुनिया और आख़िरत दोनों का ख़याल रखना चाहिए।
  3. अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ का यह नमूना है कि वह दुनिया में सबको मौका देता है, लेकिन आख़िरत में हर किसी को उसकी नीयत और अमल के हिसाब से बदला देगा। यह हमें सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत और अच्छे कामों की तरफ़ राग़िब करता है।
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📜 आयत 16-20 — अल-इसरा

16وَإِذَا أَرَدْنَا أَن نُّهْلِكَ قَرْيَةً أَمَرْنَا مُتْرَفِيهَا فَفَسَقُوا فِيهَا فَحَقَّ عَلَيْهَا الْقَوْلُ فَدَمَّرْنَاهَا تَدْمِيرًا
और हमको जब किसी बस्ती का वीरान करना मंज़ूर होता है तो हम वहाँ के खुशहालों को (इताअत का) हुक्म देते हैं तो वह लोग उसमें नाफरमानियाँ करने लगे तब वह बस्ती अज़ाब की मुस्तहक़ होगी उस वक्त हमने उसे अच्छी तरह तबाह व बरबाद कर दिया
17وَكَمْ أَهْلَكْنَا مِنَ الْقُرُونِ مِن بَعْدِ نُوحٍ ۗ وَكَفَىٰ بِرَبِّكَ بِذُنُوبِ عِبَادِهِ خَبِيرًا بَصِيرًا
और नूह के बाद से (उस वक्त तक) हमने कितनी उम्मतों को हलाक कर मारा और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार अपने बन्दों के गुनाहों को जानने और देखने के लिए काफी है
18مَّن كَانَ يُرِيدُ الْعَاجِلَةَ عَجَّلْنَا لَهُ فِيهَا مَا نَشَاءُ لِمَن نُّرِيدُ ثُمَّ جَعَلْنَا لَهُ جَهَنَّمَ يَصْلَاهَا مَذْمُومًا مَّدْحُورًا
(और गवाह याहिद की ज़रुरत नहीं) और जो शख़्श दुनिया का ख्वाहाँ हो तो हम जिसे चाहते और जो चाहते हैं उसी दुनिया में सिरदस्त (फ़ौरन) उसे अता करते हैं (मगर) फिर हमने उसके लिए तो जहन्नुम ठहरा ही रखा है कि वह उसमें बुरी हालत से रौंदा हुआ दाख़िल होगा
19وَمَنْ أَرَادَ الْآخِرَةَ وَسَعَىٰ لَهَا سَعْيَهَا وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ كَانَ سَعْيُهُم مَّشْكُورًا
और जो शख़्श आख़िर का मुतमइनी हो और उसके लिए खूब जैसी चाहिए कोशिश भी की और वह ईमानदार भी है तो यही वह लोग हैं जिनकी कोशिश मक़बूल होगी
20كُلًّا نُّمِدُّ هَٰؤُلَاءِ وَهَٰؤُلَاءِ مِنْ عَطَاءِ رَبِّكَ ۚ وَمَا كَانَ عَطَاءُ رَبِّكَ مَحْظُورًا
(ऐ रसूल) उनको (ग़रज़ सबको) हम ही तुम्हारे परवरदिगार की (अपनी) बख़्शिस से मदद देते हैं और तुम्हारे परवरदिगार की बख़्शिस तो (आम है) किसी पर बन्द नहीं
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अनुवाद — अल-इसरा 18

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Tuesday, August 18, 2026

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