Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- دُلُوكِ الشَّمْسِ: सूर्य के ढलने का समय, यानी जब सूर्य आकाश के मध्य से हटकर पश्चिम की ओर झुक जाए।
- غَسَقِ اللَّيْلِ: रात का अंधेरा घिर जाना।
- قُرْآنَ الْفَجْرِ: सुबह की नमाज़ (फज्र), जिसे 'क़ुरआन' कहा गया क्योंकि इसमें क़ुरआन की तिलावत लंबी होती है।
- مَشْهُودًا: जिसके गवाह हों, यानी जिसे फ़रिश्ते देखते और उसमें शामिल होते हैं।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ को और उनके ज़रिए पूरी उम्मत को नमाज़ की पाबंदी का हुक्म दे रहे हैं। यह आदेश बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ में दिया गया है कि नमाज़ को सूर्य के ढलने से लेकर रात के अंधेरे तक क़ायम करो। इसका मतलब यह है कि ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और इशा — ये चारों नमाज़ें अपने-अपने वक़्त पर अदा करो। यानी पूरे दिन और रात के एक बड़े हिस्से में अल्लाह की याद और उसकी इबादत का सिलसिला जारी रहे।
फिर अल्लाह तआला खास तौर पर फज्र की नमाज़ का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि सुबह की नमाज़ (फज्र) को भी क़ायम करो और उसमें क़ुरआन की तिलावत लंबी करो। इस नमाज़ को 'क़ुरआन' कहा गया क्योंकि इसमें क़ुरआन पढ़ना इसका मुख्य हिस्सा होता है और यह तिलावत ज़ोर से की जाती है।
फिर अल्लाह तआला इस नमाज़ की फज़ीलत बयान करते हुए फ़रमाते हैं: "बेशक फज्र की नमाज़ के गवाह होते हैं।" यानी इस वक़्त रात के फ़रिश्ते और दिन के फ़रिश्ते दोनों मौजूद होते हैं। जब रात के फ़रिश्ते ऊपर जाते हैं और दिन के फ़रिश्ते नीचे आते हैं, तो वे फज्र की नमाज़ पढ़ने वालों को देखते हैं और उनके लिए गवाही देते हैं। यह कितनी बड़ी सौगात है कि इंसान की नमाज़ पर अल्लाह के खास फ़रिश्ते गवाह बनते हैं!
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि नमाज़ सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि अल्लाह से जुड़ने का सबसे प्यारा ज़रिया है। जब हम सूरज ढलने से लेकर रात के अंधेरे तक और फिर सुबह की रोशनी में नमाज़ पढ़ते हैं, तो हमारा पूरा दिन अल्लाह की याद में गुज़रता है। फज्र की नमाज़ की खास फज़ीलत यह है कि उस वक़्त दुनिया में सन्नाटा होता है, इंसान अपने बिस्तर और आराम को छोड़कर अल्लाह के सामने खड़ा होता है — यही सच्ची मुहब्बत की निशानी है।
अल्लाह तआला ने हमें यह बशारत दी है कि फज्र की नमाज़ में फ़रिश्ते गवाह होते हैं। ज़रा सोचिए! जिस नमाज़ में अल्लाह के फ़रिश्ते शामिल हों और गवाही दें, उसका इनाम कितना बड़ा होगा? यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि हमारी छोटी सी इबादत को अल्लाह के करीबी फ़रिश्ते देखते हैं और उसकी गवाही देते हैं।
तो आओ, हम सब अपनी नमाज़ों को तय्यार (पूरी तरह) से अदा करें, खासकर फज्र की नमाज़ को — क्योंकि यह वह नमाज़ है जो हमारे लिए गवाही का ज़रिया बनेगी और क़यामत के दिन हमारे पक्ष में बोलेगी। अल्लाह हम सबको नमाज़ की पाबंदी और फज्र की नमाज़ की हिफाज़त की तौफीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 76-80 — सूरा अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 78
सूरा अल-इसरा आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) सूरज के ढलने से रात के अंधेरे तक…सूरा आयत 78/111 — सूरा अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इसरा सुनें, सूरा अल-इसरा अनुवाद, सूरा अल-इसरा mp3, सूरा अल-इसरा pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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