अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَنَذْهَبَنَّ — हम ज़रूर ले जाएँगे / मिटा देंगे
- بِالَّذِي أَوْحَيْنَا — उस (वह्य/क़ुरआन) को जो हमने प्रकट किया
- وَكِيلًا — सहायक, पैरोकार, कोई जो आपकी ओर से वापस दिला सके
व्याख्या:
यह आयत नबी करीम ﷺ को एक बहुत बड़ी शक्ति और सच्चाई से अवगत कराती है—और साथ ही पूरी उम्मत के लिए एक गहरा सबक़ भी। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "और अगर हम चाहें तो उस वह्य को जो हमने आप पर उतारी है, ज़रूर उठा लें (यानी आपके सीने से और दिलों से और किताबों से मिटा दें), फिर आप अपने लिए उसके (वापस लाने के) लिए हमारे सामने कोई वकील/सहायक न पाएँगे।"
यानी अल्लाह ने यह क़ुरआन अपनी रहमत से उतारा है, और यह उसकी क़ुदरत में है कि वह इसे किसी भी वक़्त मिटा दे। अगर वह ऐसा कर दे, तो कोई ताक़त—न कोई फ़रिश्ता, न कोई नबी, न कोई इंसान—इसे वापस नहीं ला सकता। यह बात नबी ﷺ के दिल को इस बात पर मज़बूत करती है कि यह क़ुरआन अल्लाह की अमानत है, और उसकी हिफ़ाज़त अल्लाह ही के हाथ में है।
इस आयत में एक और गहरा पैग़ाम है: क़ुरआन की हिफ़ाज़त अल्लाह ने अपने ज़िम्मे ली है, और यह आयत उसी का एलान है। अल्लाह ने चाहा तो यह क़ुरआन महफ़ूज़ है, और जब तक वह चाहेगा, यह क़ियामत तक बाक़ी रहेगा। लेकिन अगर वह चाहे तो इसे उठा ले—और यह उसकी क़ुदरत का इज़हार है, ताकि लोगों को पता चले कि यह किताब किसी इंसान की बनाई हुई नहीं, बल्कि अल्लाह की भेजी हुई है।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें क़ुरआन की क़द्र करनी चाहिए, उसे पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। यह अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है, और नेमत की क़द्र उसी वक़्त होती है जब हम उसे संभाल कर रखें। अगर हम क़ुरआन से दूर हो जाएँ, तो यह हमारे लिए बड़ी महरूमी है। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसकी तिलावत की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 84-88 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 86
सूरा अल-इसरा आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (इसकी हक़ीकत नहीं समझ सकते) और (ऐ रसूल) अगर हम…सूरा आयत 86/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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