अल-इसरा · 86/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इसरा
وَلَئِن شِئْنَا لَنَذْهَبَنَّ بِالَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ بِهِ عَلَيْنَا وَكِيلًا ۝٨٦
Wa la`in shi`naa lanaz habanna billazeee awhainaaa ilaika summa laa tajidu laka bihee `alainaa wakeelaa
📖 हिंदी अर्थ
(इसकी हक़ीकत नहीं समझ सकते) और (ऐ रसूल) अगर हम चाहे तो जो (क़ुरान) हमने तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए भेजा है (दुनिया से) उठा ले जाएँ फिर तुम अपने वास्ते हमारे मुक़ाबले में कोई मददगार न पाओगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَنَذْهَبَنَّ — हम ज़रूर ले जाएँगे / मिटा देंगे
  • بِالَّذِي أَوْحَيْنَا — उस (वह्य/क़ुरआन) को जो हमने प्रकट किया
  • وَكِيلًا — सहायक, पैरोकार, कोई जो आपकी ओर से वापस दिला सके

व्याख्या:

यह आयत नबी करीम ﷺ को एक बहुत बड़ी शक्ति और सच्चाई से अवगत कराती है—और साथ ही पूरी उम्मत के लिए एक गहरा सबक़ भी। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "और अगर हम चाहें तो उस वह्य को जो हमने आप पर उतारी है, ज़रूर उठा लें (यानी आपके सीने से और दिलों से और किताबों से मिटा दें), फिर आप अपने लिए उसके (वापस लाने के) लिए हमारे सामने कोई वकील/सहायक न पाएँगे।"

यानी अल्लाह ने यह क़ुरआन अपनी रहमत से उतारा है, और यह उसकी क़ुदरत में है कि वह इसे किसी भी वक़्त मिटा दे। अगर वह ऐसा कर दे, तो कोई ताक़त—न कोई फ़रिश्ता, न कोई नबी, न कोई इंसान—इसे वापस नहीं ला सकता। यह बात नबी ﷺ के दिल को इस बात पर मज़बूत करती है कि यह क़ुरआन अल्लाह की अमानत है, और उसकी हिफ़ाज़त अल्लाह ही के हाथ में है।

इस आयत में एक और गहरा पैग़ाम है: क़ुरआन की हिफ़ाज़त अल्लाह ने अपने ज़िम्मे ली है, और यह आयत उसी का एलान है। अल्लाह ने चाहा तो यह क़ुरआन महफ़ूज़ है, और जब तक वह चाहेगा, यह क़ियामत तक बाक़ी रहेगा। लेकिन अगर वह चाहे तो इसे उठा ले—और यह उसकी क़ुदरत का इज़हार है, ताकि लोगों को पता चले कि यह किताब किसी इंसान की बनाई हुई नहीं, बल्कि अल्लाह की भेजी हुई है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें क़ुरआन की क़द्र करनी चाहिए, उसे पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। यह अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है, और नेमत की क़द्र उसी वक़्त होती है जब हम उसे संभाल कर रखें। अगर हम क़ुरआन से दूर हो जाएँ, तो यह हमारे लिए बड़ी महरूमी है। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसकी तिलावत की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 84-88 — सूरा अल-इसरा

84قُلْ كُلٌّ يَعْمَلُ عَلَىٰ شَاكِلَتِهِ فَرَبُّكُمْ أَعْلَمُ بِمَنْ هُوَ أَهْدَىٰ سَبِيلًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हर (एक अपने तरीक़े पर कारगुज़ारी करता है फिर तुम में से जो शख़्श बिल्कुल ठीक सीधी राह पर है तुम्हारा परवरदिगार (उससे) खूब वाक़िफ है
85وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الرُّوحِ ۖ قُلِ الرُّوحُ مِنْ أَمْرِ رَبِّي وَمَا أُوتِيتُم مِّنَ الْعِلْمِ إِلَّا قَلِيلًا
और (ऐ रसूल) तुमसे लोग रुह के बारे में सवाल करते हैं तुम (उनके जवाब में) कह दो कि रूह (भी) मेरे परदिगार के हुक्म से (पैदा हुईहै) और तुमको बहुत थोड़ा सा इल्म दिया गया है
86وَلَئِن شِئْنَا لَنَذْهَبَنَّ بِالَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ بِهِ عَلَيْنَا وَكِيلًا
(इसकी हक़ीकत नहीं समझ सकते) और (ऐ रसूल) अगर हम चाहे तो जो (क़ुरान) हमने तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए भेजा है (दुनिया से) उठा ले जाएँ फिर तुम अपने वास्ते हमारे मुक़ाबले में कोई मददगार न पाओगे
87إِلَّا رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّ فَضْلَهُ كَانَ عَلَيْكَ كَبِيرًا
मगर ये सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की रहमत है (कि उसने ऐसा किया) इसमें शक़ नहीं कि उसका तुम पर बड़ा फज़ल व करम है
88قُل لَّئِنِ اجْتَمَعَتِ الْإِنسُ وَالْجِنُّ عَلَىٰ أَن يَأْتُوا بِمِثْلِ هَٰذَا الْقُرْآنِ لَا يَأْتُونَ بِمِثْلِهِ وَلَوْ كَانَ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ ظَهِيرًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (अगर सारे दुनिया जहाँन के) आदमी और जिन इस बात पर इकट्ठे हो कि उस क़ुरान का मिसल ले आएँ तो (ना मुमकिन) उसके बराबर नहीं ला सकते अगरचे (उसको कोशिश में) एक का एक मददगार भी बने
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
86आयत

अनुवाद — अल-इसरा 86

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सूरा आयत 86/111 — सूरा अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इसरा सुनें, सूरा अल-इसरा अनुवाद, सूरा अल-इसरा mp3, सूरा अल-इसरा pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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