अल-इसरा · 87/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
إِلَّا رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّ فَضْلَهُ كَانَ عَلَيْكَ كَبِيرًا ۝٨٧
Illaa rahmatam mir Rabbik; inna fadlahoo kaana `alaika kabeeraa
📖 हिंदी अर्थ
मगर ये सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की रहमत है (कि उसने ऐसा किया) इसमें शक़ नहीं कि उसका तुम पर बड़ा फज़ल व करम है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِلَّا رَحْمَةً – लेकिन यह आपके रब की विशेष दया और कृपा से हुआ।
  • فَضْلَهُ – उसका अनुग्रह और उपकार।
  • كَبِيرًا – बहुत बड़ा और असीम।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमा रहे हैं कि यदि हम चाहते तो जो कुछ आप पर उतारा गया है (यानी क़ुरआन) उसे उठा लेते, और आपके पास उसे वापस लाने का कोई साधन न होता। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया, बल्कि इसे आपके सीने में महफ़ूज़ रखा और आपकी उम्मत तक पहुँचाने का ज़रिया बनाया। यह सब कुछ सिर्फ़ और सिर्फ़ आपके रब की रहमत और मेहरबानी से हुआ है।

अल्लाह तआला का आप पर बड़ा फज़ल है—उसने आपको आख़िरी नबी बनाया, आप पर क़ुरआन जैसी अज़ीम किताब उतारी, आपको शफ़ाअत का मुक़ाम अता किया, और आपकी उम्मत को दुनिया और आख़िरत की भलाइयाँ दीं। यह सब उसकी दया का नतीजा है, जो हर मुसलमान के लिए रहमत और बरकत का ज़रिया बना।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उसके बंदों पर कितनी बड़ी है। जब उसने अपने नबी ﷺ पर इतना बड़ा एहसान किया कि क़ुरआन को महफ़ूज़ रखा, तो हमें भी इस क़ुरआन की क़द्र करनी चाहिए, इसे पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए और अपनी ज़िंदगी में लागू करना चाहिए। यह किताब हमारे लिए रहमत है, अगर हम इसे अपनाएँ तो हमारी दुनिया और आख़िरत दोनों सँवर सकती हैं। अल्लाह का फज़ल असीम है, और उसकी रहमत से हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए। हमें चाहिए कि हम उसके इस एहसान का शुक्र अदा करें और उसकी राह पर चलें।

🎧 सुनें

📜 आयत 85-89 — अल-इसरा

85وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الرُّوحِ ۖ قُلِ الرُّوحُ مِنْ أَمْرِ رَبِّي وَمَا أُوتِيتُم مِّنَ الْعِلْمِ إِلَّا قَلِيلًا
और (ऐ रसूल) तुमसे लोग रुह के बारे में सवाल करते हैं तुम (उनके जवाब में) कह दो कि रूह (भी) मेरे परदिगार के हुक्म से (पैदा हुईहै) और तुमको बहुत थोड़ा सा इल्म दिया गया है
86وَلَئِن شِئْنَا لَنَذْهَبَنَّ بِالَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ بِهِ عَلَيْنَا وَكِيلًا
(इसकी हक़ीकत नहीं समझ सकते) और (ऐ रसूल) अगर हम चाहे तो जो (क़ुरान) हमने तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए भेजा है (दुनिया से) उठा ले जाएँ फिर तुम अपने वास्ते हमारे मुक़ाबले में कोई मददगार न पाओगे
87إِلَّا رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّ فَضْلَهُ كَانَ عَلَيْكَ كَبِيرًا
मगर ये सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की रहमत है (कि उसने ऐसा किया) इसमें शक़ नहीं कि उसका तुम पर बड़ा फज़ल व करम है
88قُل لَّئِنِ اجْتَمَعَتِ الْإِنسُ وَالْجِنُّ عَلَىٰ أَن يَأْتُوا بِمِثْلِ هَٰذَا الْقُرْآنِ لَا يَأْتُونَ بِمِثْلِهِ وَلَوْ كَانَ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ ظَهِيرًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (अगर सारे दुनिया जहाँन के) आदमी और जिन इस बात पर इकट्ठे हो कि उस क़ुरान का मिसल ले आएँ तो (ना मुमकिन) उसके बराबर नहीं ला सकते अगरचे (उसको कोशिश में) एक का एक मददगार भी बने
89وَلَقَدْ صَرَّفْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ فَأَبَىٰ أَكْثَرُ النَّاسِ إِلَّا كُفُورًا
और हमने तो लोगों (के समझाने) के वास्ते इस क़ुरान में हर क़िस्म की मसलें अदल बदल के बयान कर दीं उस पर भी अक्सर लोग बग़ैर नाशुक्री किए नहीं रहते
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अनुवाद — अल-इसरा 87

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सूरा आयत 87/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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