अल-कहफ · 25/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
وَلَبِثُوا فِي كَهْفِهِمْ ثَلَاثَ مِائَةٍ سِنِينَ وَازْدَادُوا تِسْعًا ۝٢٥
Wa labisoo fee kahfihim salaasa mi`atin sineena wazdaadoo tis`aa
📖 हिंदी अर्थ
और असहाब कहफ अपने ग़ार में नौ ऊपर तीन सौ बरस रहे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَبِثُوا – वे ठहरे रहे (निवास किया)
  • كَهْفِهِمْ – अपनी गुफा में
  • ثَلَاثَ مِائَةٍ سِنِينَ – तीन सौ वर्ष
  • وَازْدَادُوا تِسْعًا – और नौ (वर्ष) और बढ़ गए (अर्थात् कुल तीन सौ नौ वर्ष)

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में हमें अहले-कहफ (गुफा वालों) के चमत्कारी वृत्तांत से अवगत करा रहे हैं। ये नौजवान ईमानवाले थे जो अपने दीन की हिफ़ाज़त के लिए एक गुफा में छिप गए थे। अल्लाह ने उन्हें गहरी नींद सुला दिया और वे उसी गुफा में तीन सौ नौ (309) वर्षों तक नींद की हालत में जीवित रहे। यह अल्लाह की क़ुदरत का एक अज़ीम नमूना है कि वे न तो मरे और न ही उनके शरीर ख़राब हुए, बल्कि इतनी लंबी अवधि तक सोते रहे।

यहाँ अल्लाह ने पहले तीन सौ वर्ष का ज़िक्र किया, फिर नौ वर्ष अलग से बताए। इसका एक हिकमत यह भी हो सकती है कि चंद्र वर्ष (हिजरी) के हिसाब से वे तीन सौ नौ वर्ष रहे, जबकि शम्सी (सौर) वर्ष के हिसाब से तीन सौ वर्ष। यह अल्लाह की बारीकी और सटीक जानकारी को दर्शाता है, ताकि इंसान अल्लाह के इल्म की कमालियत को समझे।

दावती पहलू:

यह क़िस्सा हमारे लिए सबक है कि जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करके अपने ईमान की हिफ़ाज़त करता है, तो अल्लाह उसे हर मुश्किल से निकालने का रास्ता निकालता है। ये नौजवान अकेले थे, मगर अल्लाह ने उन्हें सदियों तक महफ़ूज़ रखा। आज भी अगर हम अपने दीन पर साबित-क़दम रहें, तो अल्लाह हमारी हिफ़ाज़त करेगा। यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह की क़ुदरत की कोई हद नहीं, और उसका वादा सच्चा है। जो लोग अल्लाह की राह में अपनी जान, माल और आराम कुर्बान करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में बेहतरीन बदला देता है। हमें चाहिए कि इस क़िस्से से सबक लेकर अपने ईमान को मज़बूत करें और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें।



📜 आयत 23-27 — सूरा अल-कहफ

23وَلَا تَقُولَنَّ لِشَيْءٍ إِنِّي فَاعِلٌ ذَٰلِكَ غَدًا
और किसी काम की निस्बत न कहा करो कि मै इसको कल करुँगा
24إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ وَاذْكُر رَّبَّكَ إِذَا نَسِيتَ وَقُلْ عَسَىٰ أَن يَهْدِيَنِ رَبِّي لِأَقْرَبَ مِنْ هَٰذَا رَشَدًا
मगर इन्शा अल्लाह कह कर और अगर (इन्शा अल्लाह कहना) भूल जाओ तो (जब याद आए) अपने परवरदिगार को याद कर लो (इन्शा अल्लाह कह लो) और कहो कि उम्मीद है कि मेरा परवरदिगार मुझे ऐसी बात की हिदायत फरमाए जो रहनुमाई में उससे भी ज्यादा क़रीब हो
25وَلَبِثُوا فِي كَهْفِهِمْ ثَلَاثَ مِائَةٍ سِنِينَ وَازْدَادُوا تِسْعًا
और असहाब कहफ अपने ग़ार में नौ ऊपर तीन सौ बरस रहे
26قُلِ اللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا لَبِثُوا ۖ لَهُ غَيْبُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ أَبْصِرْ بِهِ وَأَسْمِعْ ۚ مَا لَهُم مِّن دُونِهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا يُشْرِكُ فِي حُكْمِهِ أَحَدًا
(ऐ रसूल) अगर वह लोग इस पर भी न मानें तो तुम कह दो कि ख़ुदा उनके ठहरने की मुद्दत से बखूबी वाक़िफ है सारे आसमान और ज़मीन का ग़ैब उसी के वास्ते ख़ास है (अल्लाह हो अकबर) वो कैसा देखने वाला क्या ही सुनने वाला है उसके सिवा उन लोगों का कोई सरपरस्त नहीं और वह अपने हुक्म में किसी को अपना दख़ील (शरीक) नहीं बनाता
27وَاتْلُ مَا أُوحِيَ إِلَيْكَ مِن كِتَابِ رَبِّكَ ۖ لَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِهِ وَلَن تَجِدَ مِن دُونِهِ مُلْتَحَدًا
और (ऐ रसूल) जो किताब तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वही के ज़रिए से नाज़िल हुईहै उसको पढ़ा करो उसकी बातों को कोई बदल नहीं सकता और तुम उसके सिवा कहीं कोई हरगिज़ पनाह की जगह (भी) न पाओगे
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
25आयत

अनुवाद — अल-कहफ 25

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Friday, October 2, 2026

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