मरियम · 15/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
وَسَلَامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَيَوْمَ يَمُوتُ وَيَوْمَ يُبْعَثُ حَيًّا ۝١٥
Wa salaamun `alaihi yawma wulida wa yawma yamootu wa yawma yub`asu haiyaa
📖 हिंदी अर्थ
और (हमारी तरफ से) उन पर (बराबर) सलाम है जिस दिन पैदा हुए और जिस दिन मरेंगे और जिस दिन (दोबारा) ज़िन्दा उठा खड़े किए जाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَلَامٌ: शांति, सुरक्षा और अमन।
  • يَوْمَ وُلِدَ: जिस दिन वह पैदा हुए।
  • يَوْمَ يَمُوتُ: जिस दिन उनकी मृत्यु होगी।
  • يَوْمَ يُبْعَثُ حَيًّا: जिस दिन वह (क़ियामत के दिन) जीवित करके उठाए जाएँगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए उन्हें तीन बड़े अवसरों पर अपनी ओर से सलाम और अमान (सुरक्षा) अता की है। ये तीन अवसर इंसान की ज़िंदगी के सबसे कठिन और डरावने लम्हात हैं:

  1. जन्म का दिन: जब बच्चा दुनिया में आता है, तो वह एक नई और अनजान दुनिया में प्रवेश करता है। इस दिन शैतान हर नवजात को छूने की कोशिश करता है, लेकिन हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह ने इससे महफ़ूज़ रखा।
  2. मृत्यु का दिन: मौत का समय इंसान के लिए सबसे भयावह होता है, जब आँखों से दुनिया ओझल होती है और आख़िरत की दुनिया शुरू होती है। इस दिन भी अल्लाह की ओर से उन्हें पूरी सलामती और अमन अता की गई।
  3. दोबारा उठाए जाने का दिन (क़ियामत): जब सभी इंसान अपनी क़ब्रों से उठेंगे और हश्र के मैदान में खड़े होंगे, उस दिन का खौफ़ सबसे बड़ा होगा। उस दिन भी अल्लाह ने हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) को अपनी ख़ास रहमत और सलामती से नवाज़ा।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को हर मुश्किल घड़ी में अपनी पनाह में रखता है। जो लोग अल्लाह के फरमानों पर चलते हैं और उसकी राह में सब्र करते हैं, उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में सलामती और अमन मिलता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि अगर हम अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें, तो हम भी इसी सलामती के हक़दार बन सकते हैं।

याद रखिए, यह ज़िंदगी एक इम्तिहान है। जो लोग इस इम्तिहान में अल्लाह के फरमानबरदार बनकर कामयाब होते हैं, उनके लिए तीनों मुश्किल घड़ियाँ (जन्म, मौत और हश्र) अमन और सलामती का ज़रिया बन जाती हैं। अल्लाह हम सबको अपनी रहमत से नवाज़े और हमें हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) जैसे नेक बंदों की सीरत पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 13-17 — सूरा मरियम

13وَحَنَانًا مِّن لَّدُنَّا وَزَكَاةً ۖ وَكَانَ تَقِيًّا
और हमने उन्हें बचपन ही में अपनी बारगाह से नुबूवत और रहमदिली और पाक़ीज़गी अता फरमाई
14وَبَرًّا بِوَالِدَيْهِ وَلَمْ يَكُن جَبَّارًا عَصِيًّا
और वह (ख़ुद भी) परहेज़गार और अपने माँ बाप के हक़ में सआदतमन्द थे और सरकश नाफरमान न थे
15وَسَلَامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَيَوْمَ يَمُوتُ وَيَوْمَ يُبْعَثُ حَيًّا
और (हमारी तरफ से) उन पर (बराबर) सलाम है जिस दिन पैदा हुए और जिस दिन मरेंगे और जिस दिन (दोबारा) ज़िन्दा उठा खड़े किए जाएँगे
16وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ مَرْيَمَ إِذِ انتَبَذَتْ مِنْ أَهْلِهَا مَكَانًا شَرْقِيًّا
और (ऐ रसूल) कुरान में मरियम का भी तज़किरा करो कि जब वह अपने लोगों से अलग होकर पूरब की तरफ़ वाले मकान में (गुस्ल के वास्ते) जा बैठें
17فَاتَّخَذَتْ مِن دُونِهِمْ حِجَابًا فَأَرْسَلْنَا إِلَيْهَا رُوحَنَا فَتَمَثَّلَ لَهَا بَشَرًا سَوِيًّا
फिर उसने उन लोगों से परदा कर लिया तो हमने अपनी रूह (जिबरील) को उन के पास भेजा तो वह अच्छे ख़ासे आदमी की सूरत बनकर उनके सामने आ खड़ा हुआ
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — मरियम 15

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Friday, October 2, 2026

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