मरियम · 32/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
وَبَرًّا بِوَالِدَتِي وَلَمْ يَجْعَلْنِي جَبَّارًا شَقِيًّا ۝٣٢
Wa barram biwaalidatee wa lam yaj`alnee jabbaaran shaqiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और (अलहमदोलिल्लाह कि) मुझको सरकश नाफरमान नहीं बनाया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बَرًّا: अपनी माँ के प्रति अत्यंत दयालु, आज्ञाकारी और भलाई करने वाला।
  • جَبَّارًا: अत्याचारी, घमंडी, जो लोगों पर ज़ुल्म करे और सत्य को न माने।
  • شَقِيًّا: अभागा, दुखी, जो अपने रब की आज्ञा का उल्लंघन करे और गुनाहों में डूबा रहे।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) अपनी पैदाइश के समय से ही अल्लाह की क़ुदरत का एक अज़ीम निशान थे। जब उन्होंने पालने में बोलना शुरू किया, तो अल्लाह ने उन्हें यह घोषणा करने की तौफ़ीक़ दी कि वह अल्लाह के नेक बंदे हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने यह भी बताया कि अल्लाह ने उन्हें अपनी माँ के प्रति अत्यंत दयालु और आज्ञाकारी बनाया है। उनकी माँ मरियम (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें अकेले पाला, और उन्होंने अपनी माँ का पूरा सम्मान किया, उनकी सेवा की और उनके साथ नर्मी और मुहब्बत से पेश आए।

इसके साथ ही, अल्लाह ने उन्हें "जब्बार" (अत्याचारी, घमंडी) और "शक़ी" (अभागा, नाफ़रमान) नहीं बनाया। यानी वह न तो लोगों पर ज़ुल्म करने वाले थे, न ही अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ने वाले। वह हमेशा अल्लाह के आज्ञाकारी, नम्र और सच्चे बंदे रहे। यह उनकी महान शख्सियत का एक और गुण था कि उन्होंने अपनी माँ के साथ भलाई और अल्लाह की इबादत को एक साथ निभाया।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि एक सच्चा इंसान वही है जो अपने माता-पिता के साथ भलाई करे, उनके साथ नर्मी और मुहब्बत से पेश आए, और साथ ही अल्लाह की आज्ञा का पालन करे। घमंड, अत्याचार और नाफ़रमानी इंसान को अभागा बना देती है, जबकि नम्रता, आज्ञाकारिता और माता-पिता की सेवा इंसान को अल्लाह के करीब लाती है। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की यह सीख हम सबके लिए एक रोशनी है कि हम अपने माता-पिता का सम्मान करें और अल्लाह की राह पर चलें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 30-34 — सूरा मरियम

30قَالَ إِنِّي عَبْدُ اللَّهِ آتَانِيَ الْكِتَابَ وَجَعَلَنِي نَبِيًّا
(इस पर वह बच्चा कुदरते खुदा से) बोल उठा कि मैं बेशक खुदा का बन्दा हूँ मुझ को उसी ने किताब (इन्जील) अता फरमाई है और मुझ को नबी बनाया
31وَجَعَلَنِي مُبَارَكًا أَيْنَ مَا كُنتُ وَأَوْصَانِي بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ مَا دُمْتُ حَيًّا
और मै (चाहे) कहीं रहूँ मुझ को मुबारक बनाया और मुझ को जब तक ज़िन्दा रहूँ नमाज़ पढ़ने ज़कात देने की ताकीद की है और मुझ को अपनी वालेदा का फ़रमाबरदार बनाया
32وَبَرًّا بِوَالِدَتِي وَلَمْ يَجْعَلْنِي جَبَّارًا شَقِيًّا
और (अलहमदोलिल्लाह कि) मुझको सरकश नाफरमान नहीं बनाया
33وَالسَّلَامُ عَلَيَّ يَوْمَ وُلِدتُّ وَيَوْمَ أَمُوتُ وَيَوْمَ أُبْعَثُ حَيًّا
और (खुदा की तरफ़ से) जिस दिन मैं पैदा हुआ हूँ और जिस दिन मरूँगा मुझ पर सलाम है और जिस दिन (दोबारा) ज़िन्दा उठा कर खड़ा किया जाऊँगा
34ذَٰلِكَ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ ۚ قَوْلَ الْحَقِّ الَّذِي فِيهِ يَمْتَرُونَ
ये है कि मरियम के बेटे ईसा का सच्चा (सच्चा) क़िस्सा जिसमें ये लोग (ख्वाहमख्वाह) शक किया करते हैं
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
32आयत

अनुवाद — मरियम 32

सूरा मरियम आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (अलहमदोलिल्लाह कि) मुझको सरकश नाफरमान नहीं बनाया

सूरा आयत 32/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए