मरियम · 56/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِدْرِيسَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَّبِيًّا ۝٥٦
Wazkur fil Kitaabi Idrees; innahoo kaana siddeeqan Nabiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) कुरान में इदरीस का भी तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह बड़े सच्चे (बन्दे और) नबी थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِدْرِيسَ (इद्रीस): अल्लाह के नबी, जो आदम (अलैहिस्सलाम) के बाद के युग में आए। कुछ विद्वानों के अनुसार वे नूह (अलैहिस्सलाम) के दादा थे।
  • صِدِّيقًا (सिद्दीक़न): बहुत सत्यवादी, सच्चा, जो अपने क़ौल (बात) और अमल (कर्म) दोनों में सच्चा हो, और अल्लाह की आयतों की पुष्टि करने वाला।
  • نَّبِيًّا (नबिय्यन): अल्लाह का नबी, जिसे वही (प्रकाशना) मिलती थी।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! इस क़ुरआन में इद्रीस (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र कीजिए, जो अल्लाह के नेक और चुने हुए नबियों में से थे। वह सिद्दीक़ थे—यानी उनकी ज़ुबान हमेशा सच बोलती थी, उनका दिल सच्चाई पर क़ायम रहता था, और उनके कर्म भी पूरी तरह सच्चाई और ईमानदारी पर आधारित थे। वह अल्लाह की हर आयत और निशानी की तस्दीक़ करते थे और अपनी उम्मत को भी सच्चाई और नेकी की तरफ़ बुलाते थे।

अल्लाह ने उन्हें नबुव्वत का शरीफ़ मर्तबा अता किया था, और वह उन पैग़म्बरों में से थे जिन्हें अल्लाह की तरफ़ से वही मिलती थी। उनका ज़िक्र क़ुरआन में इसलिए किया गया ताकि मुसलमानों को उनके सब्र, सच्चाई और अल्लाह की इबादत में मशग़ूल रहने का नमूना मिले। इद्रीस (अलैहिस्सलाम) की सच्चाई और नेकी उन्हें उन लोगों में शामिल करती है जिन्हें अल्लाह ने अपनी ख़ास रहमत से नवाज़ा।

यह ज़िक्र हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि सच्चाई (सिद्क़) अल्लाह के नबियों की सबसे बड़ी सिफ़त थी। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़ुबान, अपने दिल और अपने अमल में सच्चाई को अपनाएँ, क्योंकि सच्चाई इंसान को जन्नत की तरफ़ ले जाती है। अल्लाह के नेक बंदों का तरीक़ा यही रहा है—सच बोलना, सच पर चलना और अल्लाह के दीन की दावत देना। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रज़ा तक पहुँचाता है।



📜 आयत 54-58 — मरियम

54وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِسْمَاعِيلَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صَادِقَ الْوَعْدِ وَكَانَ رَسُولًا نَّبِيًّا
(ऐ रसूल) कुरान में इसमाईल का (भी) तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह वायदे के सच्चे थे और भेजे हुए पैग़म्बर थे
55وَكَانَ يَأْمُرُ أَهْلَهُ بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ وَكَانَ عِندَ رَبِّهِ مَرْضِيًّا
और अपने घर के लोगों को नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ताकीद किया करते थे और अपने परवरदिगार की बारगाह में पसन्दीदा थे
56وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِدْرِيسَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَّبِيًّا
और (ऐ रसूल) कुरान में इदरीस का भी तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह बड़े सच्चे (बन्दे और) नबी थे
57وَرَفَعْنَاهُ مَكَانًا عَلِيًّا
और हमने उनको बहुत ऊँची जगह (बेहिश्त में) बुलन्द कर (के पहुँचा) दिया
58أُولَٰئِكَ الَّذِينَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ النَّبِيِّينَ مِن ذُرِّيَّةِ آدَمَ وَمِمَّنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍ وَمِن ذُرِّيَّةِ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْرَائِيلَ وَمِمَّنْ هَدَيْنَا وَاجْتَبَيْنَا ۚ إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُ الرَّحْمَٰنِ خَرُّوا سُجَّدًا وَبُكِيًّا ۩
ये अम्बिया लोग जिन्हें खुदा ने अपनी नेअमत दी आदमी की औलाद से हैं और उनकी नस्ल से जिन्हें हमने (तूफ़ान के वक्त) नूह के साथ (कश्ती पर) सवारकर लिया था और इबराहीम व याकूब की औलाद से हैं और उन लोगों में से हैं जिनकी हमने हिदायत की और मुन्तिख़ब किया जब उनके सामने खुदा की (नाज़िल की हुई) आयतें पढ़ी जाती थीं तो सजदे में ज़ारोक़तार रोते हुए गिर पड़ते थे (58) सजदा
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीRevelation
56आयत

अनुवाद — मरियम 56

सूरा मरियम आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) कुरान में इदरीस का भी तज़किरा करो…

सूरा आयत 56/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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