अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- إِدْرِيسَ (इद्रीस): अल्लाह के नबी, जो आदम (अलैहिस्सलाम) के बाद के युग में आए। कुछ विद्वानों के अनुसार वे नूह (अलैहिस्सलाम) के दादा थे।
- صِدِّيقًا (सिद्दीक़न): बहुत सत्यवादी, सच्चा, जो अपने क़ौल (बात) और अमल (कर्म) दोनों में सच्चा हो, और अल्लाह की आयतों की पुष्टि करने वाला।
- نَّبِيًّا (नबिय्यन): अल्लाह का नबी, जिसे वही (प्रकाशना) मिलती थी।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! इस क़ुरआन में इद्रीस (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र कीजिए, जो अल्लाह के नेक और चुने हुए नबियों में से थे। वह सिद्दीक़ थे—यानी उनकी ज़ुबान हमेशा सच बोलती थी, उनका दिल सच्चाई पर क़ायम रहता था, और उनके कर्म भी पूरी तरह सच्चाई और ईमानदारी पर आधारित थे। वह अल्लाह की हर आयत और निशानी की तस्दीक़ करते थे और अपनी उम्मत को भी सच्चाई और नेकी की तरफ़ बुलाते थे।
अल्लाह ने उन्हें नबुव्वत का शरीफ़ मर्तबा अता किया था, और वह उन पैग़म्बरों में से थे जिन्हें अल्लाह की तरफ़ से वही मिलती थी। उनका ज़िक्र क़ुरआन में इसलिए किया गया ताकि मुसलमानों को उनके सब्र, सच्चाई और अल्लाह की इबादत में मशग़ूल रहने का नमूना मिले। इद्रीस (अलैहिस्सलाम) की सच्चाई और नेकी उन्हें उन लोगों में शामिल करती है जिन्हें अल्लाह ने अपनी ख़ास रहमत से नवाज़ा।
यह ज़िक्र हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि सच्चाई (सिद्क़) अल्लाह के नबियों की सबसे बड़ी सिफ़त थी। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़ुबान, अपने दिल और अपने अमल में सच्चाई को अपनाएँ, क्योंकि सच्चाई इंसान को जन्नत की तरफ़ ले जाती है। अल्लाह के नेक बंदों का तरीक़ा यही रहा है—सच बोलना, सच पर चलना और अल्लाह के दीन की दावत देना। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रज़ा तक पहुँचाता है।
📜 आयत 54-58 — मरियम
अनुवाद — मरियम 56
सूरा मरियम आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) कुरान में इदरीस का भी तज़किरा करो…सूरा आयत 56/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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