मरियम · 55/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
وَكَانَ يَأْمُرُ أَهْلَهُ بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ وَكَانَ عِندَ رَبِّهِ مَرْضِيًّا ۝٥٥
Wa kaana yaamuru ahlahoo bis Salaati waz zakaati wa kaana `inda Rabbihee mardiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और अपने घर के लोगों को नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ताकीद किया करते थे और अपने परवरदिगार की बारगाह में पसन्दीदा थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَهْلَهُ — अपने परिवार वालों को, अपनी क़ौम को
  • بِالصَّلَاةِ — नमाज़ की पाबंदी की ओर
  • الزَّكَاةِ — अनिवार्य दान (ज़कात) देने की ओर
  • مَرْضِيًّا — अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) प्राप्त, पसंदीदा

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) के गुणों का वर्णन कर रही है, जो अल्लाह के नेक और चुने हुए नबी थे। वे केवल स्वयं नमाज़ पढ़ते ही नहीं थे, बल्कि अपने परिवार और अपनी क़ौम के लोगों को भी हमेशा नमाज़ क़ायम करने और ज़कात देने का आदेश देते थे। यानी उन्होंने केवल अपनी निजी इबादत को ही महत्व नहीं दिया, बल्कि अपने घर और समाज को भी अल्लाह की इबादत और बंदों के हक़ अदा करने की तालीम दी।

नमाज़ बंदे और अल्लाह के बीच का रिश्ता है, जो इंसान को अल्लाह से जोड़ती है, और ज़कात बंदों के हक़ हैं, जो समाज में भाईचारे और हमदर्दी पैदा करती है। इस्माईल (अलैहिस्सलाम) ने दोनों को एक साथ जोड़ा — एक ओर अल्लाह के हुक़ूक़ (अधिकार) अदा किए, दूसरी ओर लोगों के हुक़ूक़ भी। यही वजह है कि अल्लाह ने उन्हें "मरज़ी" (अपनी रज़ा प्राप्त) कहा — यानी वे अल्लाह के यहाँ पूरी तरह पसंदीदा, पाक और नेक थे, क्योंकि उन्होंने अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में ढाल लिया था।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि एक अच्छा इंसान वही है जो खुद भी अच्छा हो और अपने घर वालों को भी अच्छाई की तरफ बुलाए। हमें चाहिए कि अपने परिवार में नमाज़ की पाबंदी और ज़कात व खैरात की आदत डालें, ताकि हम भी अल्लाह के यहाँ पसंदीदा बन सकें। याद रखें, जो लोग अल्लाह के हुक्मों पर चलते हैं और दूसरों को भी उसकी तरफ बुलाते हैं, उनके लिए अल्लाह की रज़ा और जन्नत की खुशखबरी है।



📜 आयत 53-57 — मरियम

53وَوَهَبْنَا لَهُ مِن رَّحْمَتِنَا أَخَاهُ هَارُونَ نَبِيًّا
और हमने उन्हें अपनी ख़ास मेहरबानी से उनके भाई हारून को (उनका वज़ीर बनाकर) इनायत फ़रमाया
54وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِسْمَاعِيلَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صَادِقَ الْوَعْدِ وَكَانَ رَسُولًا نَّبِيًّا
(ऐ रसूल) कुरान में इसमाईल का (भी) तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह वायदे के सच्चे थे और भेजे हुए पैग़म्बर थे
55وَكَانَ يَأْمُرُ أَهْلَهُ بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ وَكَانَ عِندَ رَبِّهِ مَرْضِيًّا
और अपने घर के लोगों को नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ताकीद किया करते थे और अपने परवरदिगार की बारगाह में पसन्दीदा थे
56وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِدْرِيسَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَّبِيًّا
और (ऐ रसूल) कुरान में इदरीस का भी तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह बड़े सच्चे (बन्दे और) नबी थे
57وَرَفَعْنَاهُ مَكَانًا عَلِيًّا
और हमने उनको बहुत ऊँची जगह (बेहिश्त में) बुलन्द कर (के पहुँचा) दिया
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीRevelation
55आयत

अनुवाद — मरियम 55

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सूरा आयत 55/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.




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Wednesday, August 19, 2026

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