मरियम · 57/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
وَرَفَعْنَاهُ مَكَانًا عَلِيًّا ۝٥٧
Wa rafa`naahu makaanan `aliyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उनको बहुत ऊँची जगह (बेहिश्त में) बुलन्द कर (के पहुँचा) दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَفَعْنَاهُ (रफ़ा'नाहु): हमने उसे ऊँचा किया
  • مَكَانًا عَلِيًّا (मकानन अलिय्यन): बुलंद मकाम (ऊँचा स्थान)

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत इदरीस (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र कर रहे हैं, जिन्हें कुरआन में "सिद्दीक़" और "नबी" कहा गया है। अल्लाह ने उन्हें बुलंद मकाम अता किया—यानी उनका ज़िक्र दुनिया भर में ऊँचा किया, उनकी नबुव्वत का दर्जा बुलंद किया, और उन्हें अपने करीबियों में शामिल किया। कुछ मुफ़स्सिरीन के अनुसार, उन्हें जन्नत में ऊँचे मुकाम पर रखा गया, और कुछ के अनुसार उन्हें चौथे आसमान पर उठाया गया।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की इज़्ज़त किस तरह बढ़ाता है। हज़रत इदरीस (अलैहिस्सलाम) ने अपनी ज़िंदगी में सच्चाई, इस्तिक़ामत और अल्लाह की इबादत का ऐसा नमूना पेश किया कि अल्लाह ने उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में बुलंदी अता की।

प्यारे भाइयों और बहनों! याद रखिए, अल्लाह के यहाँ असली बुलंदी पैसों या ओहदों से नहीं, बल्कि तक़वा और नेक अमल से मिलती है। जो बंदा अल्लाह की राह में अपने आपको पेश करता है, अल्लाह उसके ज़िक्र को ज़मीन से आसमान तक बुलंद कर देता है। आइए, हम भी हज़रत इदरीस (अलैहिस्सलाम) की सीख पर अमल करें—सच बोलें, नेकी करें, और अल्लाह से जुड़े रहें, ताकि हमारा भी मकाम उन लोगों में हो जिन्हें अल्लाह ने बुलंदी अता की। यही असली कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत के ऊँचे दर्जों तक पहुँचाता है।



📜 आयत 55-59 — सूरा मरियम

55وَكَانَ يَأْمُرُ أَهْلَهُ بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ وَكَانَ عِندَ رَبِّهِ مَرْضِيًّا
और अपने घर के लोगों को नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ताकीद किया करते थे और अपने परवरदिगार की बारगाह में पसन्दीदा थे
56وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِدْرِيسَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَّبِيًّا
और (ऐ रसूल) कुरान में इदरीस का भी तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह बड़े सच्चे (बन्दे और) नबी थे
57وَرَفَعْنَاهُ مَكَانًا عَلِيًّا
और हमने उनको बहुत ऊँची जगह (बेहिश्त में) बुलन्द कर (के पहुँचा) दिया
58أُولَٰئِكَ الَّذِينَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ النَّبِيِّينَ مِن ذُرِّيَّةِ آدَمَ وَمِمَّنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍ وَمِن ذُرِّيَّةِ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْرَائِيلَ وَمِمَّنْ هَدَيْنَا وَاجْتَبَيْنَا ۚ إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُ الرَّحْمَٰنِ خَرُّوا سُجَّدًا وَبُكِيًّا ۩
ये अम्बिया लोग जिन्हें खुदा ने अपनी नेअमत दी आदमी की औलाद से हैं और उनकी नस्ल से जिन्हें हमने (तूफ़ान के वक्त) नूह के साथ (कश्ती पर) सवारकर लिया था और इबराहीम व याकूब की औलाद से हैं और उन लोगों में से हैं जिनकी हमने हिदायत की और मुन्तिख़ब किया जब उनके सामने खुदा की (नाज़िल की हुई) आयतें पढ़ी जाती थीं तो सजदे में ज़ारोक़तार रोते हुए गिर पड़ते थे (58) सजदा
59۞ فَخَلَفَ مِن بَعْدِهِمْ خَلْفٌ أَضَاعُوا الصَّلَاةَ وَاتَّبَعُوا الشَّهَوَاتِ ۖ فَسَوْفَ يَلْقَوْنَ غَيًّا
फिर उनके बाद कुछ नाख़लफ (उनके) जानशीन हुए जिन्होंने नमाज़ें खोयी और नफ़सानी ख्वाहिशों के चेले बन बैठे अनक़रीब ही ये लोग (अपनी) गुमराही (के ख़ामयाजे) से जा मिलेंगे
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
57आयत

अनुवाद — मरियम 57

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Friday, October 2, 2026

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