अल-बकरा · 69/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا لَوْنُهَا ۚ قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ صَفْرَاءُ فَاقِعٌ لَّوْنُهَا تَسُرُّ النَّاظِرِينَ ۝٦٩
Qaalud-`u lanaa rabaaka yubaiyil lanaa maa lawnuhaa; qaala innahoo yaqoolu innahaa baqaratun safraaa`u faqi`ul lawnuhaa tasurrunnaazireen
📖 हिंदी अर्थ
वह कहने लगे (वाह) तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें ये बता दे कि उसका रंग आख़िर क्या हो मूसा ने कहा बेशक खुदा फरमाता है कि वह गाय खूब गहरे ज़र्द रंग की हो देखने वाले उसे देखकर खुश हो जाए
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَفْرَاءُ (सफ़रा): पीले रंग की।
  • فَاقِعٌ (फ़ाक़ि): अत्यधिक गहरा और शुद्ध रंग, जिसमें कोई मिलावट न हो।
  • تَسُرُّ النَّاظِرِينَ (तसुर्रुन नाज़िरीन): देखने वालों को खुशी और प्रसन्नता प्रदान करने वाली।

तफ़सीर (व्याख्या):

बनी इसराइल ने अपनी ज़िद और हठधर्मिता से बाज़ न आते हुए एक बार फिर मूसा (अलैहिस्सलाम) से कहा: "आप अपने रब से हमारे लिए दुआ कीजिए कि वह हमें स्पष्ट रूप से बता दे कि उस गाय का रंग क्या है?" इस पर मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें बताया कि अल्लाह का फरमान है: "वह गाय गहरे पीले रंग की है, जिसका रंग बिल्कुल शुद्ध और चमकीला होगा, और वह देखने वालों की आँखों को खुशी और सुकून देगी।" यह रंग इतना सुंदर और जीवंत होगा कि हर कोई उसे देखकर प्रसन्न हो जाएगा। यह उनकी ज़िद और सवालों के बावजूद अल्लाह की ओर से एक स्पष्ट और सुंदर विशेषता का वर्णन था, जो उनकी बार-बार की पूछताछ का उत्तर था।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह अपने बंदों के सवालों का जवाब देता है, भले ही वे ज़िद और हठधर्मिता से पूछें, लेकिन अल्लाह की रहमत और बंदों के प्रति उसका व्यवहार नर्मी और सहनशीलता पर आधारित है।
  2. इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह की बनाई हुई चीज़ों में भी सुंदरता और खूबसूरती होती है, और वह अपने बंदों को ऐसी चीज़ें देता है जो उनके लिए खुशी और सुकून का कारण बनें।
  3. बार-बार सवाल करना और ज़िद करना अच्छी आदत नहीं है, क्योंकि इससे काम में مشقت (मुश्किल) आ सकती है। बेहतर है कि अल्लाह और उसके रसूल के हुक्म को बिना किसी हिचकिचाहट के मान लिया जाए।
  4. अल्लाह की हर आज्ञा में भलाई और हिकमत (समझदारी) होती है, चाहे हमें उसका कारण समझ में आए या न आए।
🎧 सुनें

📜 आयत 67-71 — अल-बकरा

67وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُكُمْ أَن تَذْبَحُوا بَقَرَةً ۖ قَالُوا أَتَتَّخِذُنَا هُزُوًا ۖ قَالَ أَعُوذُ بِاللَّهِ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْجَاهِلِينَ
और (वह वक्त याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि खुदा तुम लोगों को ताकीदी हुक्म करता है कि तुम एक गाय ज़िबाह करो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमसे दिल्लगी करते हो मूसा ने कहा मैं खुदा से पनाह माँगता हूँ कि मैं जाहिल बनूँ
68قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَ ۚ قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ لَّا فَارِضٌ وَلَا بِكْرٌ عَوَانٌ بَيْنَ ذَٰلِكَ ۖ فَافْعَلُوا مَا تُؤْمَرُونَ
(तब वह लोग कहने लगे कि (अच्छा) तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें बता दे कि वह गाय कैसी हो मूसा ने कहा बेशक खुदा ने फरमाता है कि वह गाय न तो बहुत बूढ़ी हो और न बछिया बल्कि उनमें से औसत दरजे की हो, ग़रज़ जो तुमको हुक्म दिया गया उसको बजा लाओ
69قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا لَوْنُهَا ۚ قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ صَفْرَاءُ فَاقِعٌ لَّوْنُهَا تَسُرُّ النَّاظِرِينَ
वह कहने लगे (वाह) तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें ये बता दे कि उसका रंग आख़िर क्या हो मूसा ने कहा बेशक खुदा फरमाता है कि वह गाय खूब गहरे ज़र्द रंग की हो देखने वाले उसे देखकर खुश हो जाए
70قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَ إِنَّ الْبَقَرَ تَشَابَهَ عَلَيْنَا وَإِنَّا إِن شَاءَ اللَّهُ لَمُهْتَدُونَ
तब कहने लगे कि तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें ज़रा ये तो बता दे कि वह (गाय) और कैसी हो (वह) गाय तो और गायों में मिल जुल गई और खुदा ने चाहा तो हम ज़रूर (उसका) पता लगा लेगे
71قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ لَّا ذَلُولٌ تُثِيرُ الْأَرْضَ وَلَا تَسْقِي الْحَرْثَ مُسَلَّمَةٌ لَّا شِيَةَ فِيهَا ۚ قَالُوا الْآنَ جِئْتَ بِالْحَقِّ ۚ فَذَبَحُوهَا وَمَا كَادُوا يَفْعَلُونَ
मूसा ने कहा खुदा ज़रूर फरमाता है कि वह गाय न तो इतनी सधाई हो कि ज़मीन जोते न खेती सीचें भली चंगी एक रंग की कि उसमें कोई धब्बा तक न हो, वह बोले अब (जा के) ठीक-ठीक बयान किया, ग़रज़ उन लोगों ने वह गाय हलाल की हालाँकि उनसे उम्मीद न थी वह कि वह ऐसा करेंगे
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अनुवाद — अल-बकरा 69

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Tuesday, August 18, 2026

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