लेकिन क्या वह लोग (इतना भी) नहीं जानते कि वह लोग जो कुछ छिपाते हैं या ज़ाहिर करते हैं खुदा सब कुछ जानता है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
يُسِرُّونَ: छिपाते हैं, गुप्त रखते हैं।
يُعْلِنُونَ: प्रकट करते हैं, ज़ाहिर करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या ये लोग (यहूदी) यह नहीं जानते कि अल्लाह तआला उनके दिलों के राज़ और उनकी छिपी हुई बातों को भी जानता है, और उनके ज़ाहिरी कामों और खुले हुए अफ़वाल को भी देखता है? ये लोग जब अपने दोस्तों से मिलते हैं तो कहते हैं कि हम मुसलमानों के साथ हैं, लेकिन जब अकेले होते हैं तो आपस में कहते हैं कि हम उनके दुश्मन हैं। वे समझते हैं कि उनकी ये चालाकियाँ छिपी रहेंगी, लेकिन अल्लाह तआला उनके हर छोटे-बड़े, छिपे और खुले काम से पूरी तरह वाक़िफ़ है। वे अपने इन हरकतों से अल्लाह को धोखा देना चाहते हैं, जबकि वे यह नहीं समझते कि अल्लाह का इल्म उनके ज़ाहिर और बातिन सबको घेरे हुए है। यह उनकी बड़ी नादानी और अहमक़ी है कि वे ऐसे काम करते हैं जैसे उन्हें यक़ीन ही नहीं कि अल्लाह सब कुछ जानता है।
फ़ायदे (सबक़):
अल्लाह तआला का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है — चाहे वह सीने में छिपा हो या ज़बान पर ज़ाहिर। यह अक़ीदा हर मुसलमान के दिल में होना चाहिए।
जो इंसान अल्लाह के इल्म पर यक़ीन रखता है, वह कभी गुनाह नहीं कर सकता, क्योंकि उसे मालूम होता है कि अल्लाह उसे देख रहा है और उसके हर अमल का हिसाब लेगा।
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हमें अपने ज़ाहिर और बातिन दोनों को सुधारना चाहिए। सिर्फ़ लोगों को दिखाने के लिए अच्छे बनना काफ़ी नहीं, बल्कि अल्लाह के सामने भी सच्चे होने चाहिए।
यह आयत हमें धोखे और मक्कारी से बचाती है — क्योंकि जो यक़ीन रखता है कि अल्लाह सब देखता है, वह कभी किसी को धोखा देने की कोशिश नहीं करता।
इस आयत में मोमिन के लिए तसल्ली है कि उसका रब उसकी नीयतों को जानता है। अगर वह अच्छे काम छिपकर करता है, तो अल्लाह उसे जानता है और उसका अज्र ज़रूर देगा।
(मुसलमानों) क्या तुम ये लालच रखते हो कि वह तुम्हारा (सा) ईमान लाएँगें हालाँकि उनमें का एक गिरोह (साबिक़ में) ऐसा था कि खुदा का कलाम सुनाता था और अच्छी तरह समझने के बाद उलट फेर कर देता था हालाँकि वह खूब जानते थे और जब उन लोगों से मुलाक़ात करते हैं
जो ईमान लाए तो कह देते हैं कि हम तो ईमान ला चुके और जब उनसे बाज़-बाज़ के साथ तख़िलया करते हैं तो कहते हैं कि जो कुछ खुदा ने तुम पर (तौरेत) में ज़ाहिर कर दिया है क्या तुम (मुसलमानों को) बता दोगे ताकि उसके सबब से कल तुम्हारे खुदा के पास तुम पर हुज्जत लाएँ क्या तुम इतना भी नहीं समझते
पस वाए हो उन लोगों पर जो अपने हाथ से किताब लिखते हैं फिर (लोगों से कहते फिरते) हैं कि ये खुदा के यहाँ से (आई) है ताकि उसके ज़रिये से थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी फ़ायदा) हासिल करें पस अफसोस है उन पर कि उनके हाथों ने लिखा और फिर अफसोस है उनपर कि वह ऐसी कमाई करते हैं
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