Wa latajidannahum ahrasannaasi `alaa hayaatinw wa minal lazeena ashrakoo; yawaddu ahaduhum law yu`ammaru alfa sanatinw wa maa huwa bi muzahzihihee minal `azaabi ai yu`ammar; wallaahu baseerum bimaa ya`maloon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम उन ही को ज़िन्दगी का सबसे ज्यादा हरीस पाओगे और मुशरिक़ों में से हर एक शख्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खुदा उसे देख रहा है
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بلکہ ان کو تم اور لوگوں سے زندگی کے کہیں حریص دیکھو گے، یہاں تک کہ مشرکوں سے بھی۔ ان میں سے ہر ایک یہی خواہش کرتا ہے کہ کاش وہ ہزار برس جیتا رہے، مگر اتنی لمبی عمر اس کو مل بھی جائے تو اسے عذاب سے تو نہیں چھڑا سکتی۔ اور جو کام یہ کرتے ہیں، خدا ان کو دیکھ رہا ہے
और (ऐ रसूल) तुम उन ही को ज़िन्दगी का सबसे ज्यादा हरीस पाओगे और मुशरिक़ों में से हर एक शख्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खुदा उसे देख रहा है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
أَحْرَصَ النَّاسِ: सबसे अधिक लालची और इच्छुक।
يَوَدُّ: चाहता है, कामना करता है।
يُعَمَّرُ: लंबी उम्र दी जाए, अर्थात् जीवित रहे।
بِمُزَحْزِحِهِ: उसे दूर करने वाला, हटाने वाला।
الْعَذَابِ: यातना, दंड।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप निश्चित रूप से पाएँगे कि यहूदी जीवन के प्रति सभी लोगों में सबसे अधिक लालची हैं। वे जीवन से इतना प्रेम करते हैं कि चाहे वह जीवन कितना ही अपमानजनक, तुच्छ और कष्टदायक क्यों न हो, फिर भी वे उसे छोड़ना नहीं चाहते। उनकी यह लालच मुश्किलों से भरी ज़िंदगी के प्रति उन मुश्किलों से भी अधिक है जो मूर्तिपूजकों (जो आख़िरत और हिसाब-किताब पर ईमान नहीं रखते) में पाई जाती है। यहूदी आख़िरत और हिसाब पर ईमान रखने के बावजूद, उनमें से हर एक यह कामना करता है कि उसे हज़ार साल की लंबी उम्र मिले। लेकिन यह लंबी उम्र उसे अल्लाह की यातना से बिल्कुल भी नहीं बचा सकती, चाहे वह हज़ार साल ही क्यों न जिए। अल्लाह तआला उनके सभी कर्मों को देख रहा है और उनके बारे में पूरी तरह जानता है, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
दुनिया की मोहब्बत और आख़िरत की ग़फ़लत: यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की लंबी उम्र और उसके सुखों से मोहब्बत इंसान को आख़िरत से ग़ाफ़िल कर देती है। सच्चा मुसलमान वह है जो दुनिया को आख़िरत की खेती समझे और अपने जीवन को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा में बिताए।
लंबी उम्र का कोई फ़ायदा नहीं अगर अमल सही न हों: यह आयत स्पष्ट करती है कि लंबी उम्र पाना अपने आप में कोई नेमत नहीं है, बल्कि असली नेमत यह है कि इंसान अपनी उम्र को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारे। अगर जीवन अल्लाह की नाफ़रमानी में बीते, तो हज़ार साल की उम्र भी इंसान को अल्लाह की यातना से नहीं बचा सकती।
अल्लाह की निगरानी का एहसास: अल्लाह तआला हर काम को देख रहा है और हर नीयत को जानता है। इस एहसास से इंसान में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा होता है और वह गुनाहों से बचता है। यही ख़ौ�़ इंसान को अच्छे अमल की तरफ़ ले जाता है।
ईमानदारों के लिए नसीहत: यह आयत मुसलमानों के लिए एक सबक़ है कि वे यहूदियों की तरह दुनिया की मोहब्बत में न पड़ें, बल्कि अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा और उसके दीन की ख़िदमत में लगाएँ, क्योंकि असली कामयाबी आख़िरत में है, न कि दुनिया की लंबी उम्र में।
(ऐ रसूल) इन लोगों से कह दो कि अगर खुदा के नज़दीक आख़ेरत का घर (बेहिश्त) ख़ास तुम्हारे वास्ते है और लोगों के वासते नहीं है पस अगर तुम सच्चे हो तो मौत की आरजू क़रो
(ताकि जल्दी बेहिश्त में जाओ) लेकिन वह उन आमाले बद की वजह से जिनको उनके हाथों ने पहले से आगे भेजा है हरगिज़ मौत की आरज़ू न करेंगे और खुदा ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है
और (ऐ रसूल) तुम उन ही को ज़िन्दगी का सबसे ज्यादा हरीस पाओगे और मुशरिक़ों में से हर एक शख्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खुदा उसे देख रहा है
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खुदा दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खुदा के हुक्म से (इस कुरान को) तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले नाज़िल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते खुशख़बरी है
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