अल-बकरा · 96/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَلَتَجِدَنَّهُمْ أَحْرَصَ النَّاسِ عَلَىٰ حَيَاةٍ وَمِنَ الَّذِينَ أَشْرَكُوا ۚ يَوَدُّ أَحَدُهُمْ لَوْ يُعَمَّرُ أَلْفَ سَنَةٍ وَمَا هُوَ بِمُزَحْزِحِهِ مِنَ الْعَذَابِ أَن يُعَمَّرَ ۗ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِمَا يَعْمَلُونَ ۝٩٦
Wa latajidannahum ahrasannaasi `alaa hayaatinw wa minal lazeena ashrakoo; yawaddu ahaduhum law yu`ammaru alfa sanatinw wa maa huwa bi muzahzihihee minal `azaabi ai yu`ammar; wallaahu baseerum bimaa ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम उन ही को ज़िन्दगी का सबसे ज्यादा हरीस पाओगे और मुशरिक़ों में से हर एक शख्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खुदा उसे देख रहा है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَحْرَصَ النَّاسِ: सबसे अधिक लालची और इच्छुक।
  • يَوَدُّ: चाहता है, कामना करता है।
  • يُعَمَّرُ: लंबी उम्र दी जाए, अर्थात् जीवित रहे।
  • بِمُزَحْزِحِهِ: उसे दूर करने वाला, हटाने वाला।
  • الْعَذَابِ: यातना, दंड।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप निश्चित रूप से पाएँगे कि यहूदी जीवन के प्रति सभी लोगों में सबसे अधिक लालची हैं। वे जीवन से इतना प्रेम करते हैं कि चाहे वह जीवन कितना ही अपमानजनक, तुच्छ और कष्टदायक क्यों न हो, फिर भी वे उसे छोड़ना नहीं चाहते। उनकी यह लालच मुश्किलों से भरी ज़िंदगी के प्रति उन मुश्किलों से भी अधिक है जो मूर्तिपूजकों (जो आख़िरत और हिसाब-किताब पर ईमान नहीं रखते) में पाई जाती है। यहूदी आख़िरत और हिसाब पर ईमान रखने के बावजूद, उनमें से हर एक यह कामना करता है कि उसे हज़ार साल की लंबी उम्र मिले। लेकिन यह लंबी उम्र उसे अल्लाह की यातना से बिल्कुल भी नहीं बचा सकती, चाहे वह हज़ार साल ही क्यों न जिए। अल्लाह तआला उनके सभी कर्मों को देख रहा है और उनके बारे में पूरी तरह जानता है, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. दुनिया की मोहब्बत और आख़िरत की ग़फ़लत: यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की लंबी उम्र और उसके सुखों से मोहब्बत इंसान को आख़िरत से ग़ाफ़िल कर देती है। सच्चा मुसलमान वह है जो दुनिया को आख़िरत की खेती समझे और अपने जीवन को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा में बिताए।
  2. लंबी उम्र का कोई फ़ायदा नहीं अगर अमल सही न हों: यह आयत स्पष्ट करती है कि लंबी उम्र पाना अपने आप में कोई नेमत नहीं है, बल्कि असली नेमत यह है कि इंसान अपनी उम्र को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारे। अगर जीवन अल्लाह की नाफ़रमानी में बीते, तो हज़ार साल की उम्र भी इंसान को अल्लाह की यातना से नहीं बचा सकती।
  3. अल्लाह की निगरानी का एहसास: अल्लाह तआला हर काम को देख रहा है और हर नीयत को जानता है। इस एहसास से इंसान में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा होता है और वह गुनाहों से बचता है। यही ख़ौ�़ इंसान को अच्छे अमल की तरफ़ ले जाता है।
  4. ईमानदारों के लिए नसीहत: यह आयत मुसलमानों के लिए एक सबक़ है कि वे यहूदियों की तरह दुनिया की मोहब्बत में न पड़ें, बल्कि अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा और उसके दीन की ख़िदमत में लगाएँ, क्योंकि असली कामयाबी आख़िरत में है, न कि दुनिया की लंबी उम्र में।
🎧 सुनें

📜 आयत 94-98 — अल-बकरा

94قُلْ إِن كَانَتْ لَكُمُ الدَّارُ الْآخِرَةُ عِندَ اللَّهِ خَالِصَةً مِّن دُونِ النَّاسِ فَتَمَنَّوُا الْمَوْتَ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(ऐ रसूल) इन लोगों से कह दो कि अगर खुदा के नज़दीक आख़ेरत का घर (बेहिश्त) ख़ास तुम्हारे वास्ते है और लोगों के वासते नहीं है पस अगर तुम सच्चे हो तो मौत की आरजू क़रो
95وَلَن يَتَمَنَّوْهُ أَبَدًا بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِالظَّالِمِينَ
(ताकि जल्दी बेहिश्त में जाओ) लेकिन वह उन आमाले बद की वजह से जिनको उनके हाथों ने पहले से आगे भेजा है हरगिज़ मौत की आरज़ू न करेंगे और खुदा ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है
96وَلَتَجِدَنَّهُمْ أَحْرَصَ النَّاسِ عَلَىٰ حَيَاةٍ وَمِنَ الَّذِينَ أَشْرَكُوا ۚ يَوَدُّ أَحَدُهُمْ لَوْ يُعَمَّرُ أَلْفَ سَنَةٍ وَمَا هُوَ بِمُزَحْزِحِهِ مِنَ الْعَذَابِ أَن يُعَمَّرَ ۗ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِمَا يَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम उन ही को ज़िन्दगी का सबसे ज्यादा हरीस पाओगे और मुशरिक़ों में से हर एक शख्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खुदा उसे देख रहा है
97قُلْ مَن كَانَ عَدُوًّا لِّجِبْرِيلَ فَإِنَّهُ نَزَّلَهُ عَلَىٰ قَلْبِكَ بِإِذْنِ اللَّهِ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَهُدًى وَبُشْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खुदा दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खुदा के हुक्म से (इस कुरान को) तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले नाज़िल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते खुशख़बरी है
98مَن كَانَ عَدُوًّا لِّلَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَرُسُلِهِ وَجِبْرِيلَ وَمِيكَالَ فَإِنَّ اللَّهَ عَدُوٌّ لِّلْكَافِرِينَ
जो शख्स ख़ुदा और उसके फरिश्तों और उसके रसूलों और (ख़ासकर) जिबराईल व मीकाइल का दुशमन हो तो बेशक खुदा भी (ऐसे) काफ़िरों का दुश्मन है
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अनुवाद — अल-बकरा 96

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Tuesday, August 18, 2026

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