Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَحْرَصَ النَّاسِ: सबसे अधिक लालची और इच्छुक।
- يَوَدُّ: चाहता है, कामना करता है।
- يُعَمَّرُ: लंबी उम्र दी जाए, अर्थात् जीवित रहे।
- بِمُزَحْزِحِهِ: उसे दूर करने वाला, हटाने वाला।
- الْعَذَابِ: यातना, दंड।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप निश्चित रूप से पाएँगे कि यहूदी जीवन के प्रति सभी लोगों में सबसे अधिक लालची हैं। वे जीवन से इतना प्रेम करते हैं कि चाहे वह जीवन कितना ही अपमानजनक, तुच्छ और कष्टदायक क्यों न हो, फिर भी वे उसे छोड़ना नहीं चाहते। उनकी यह लालच मुश्किलों से भरी ज़िंदगी के प्रति उन मुश्किलों से भी अधिक है जो मूर्तिपूजकों (जो आख़िरत और हिसाब-किताब पर ईमान नहीं रखते) में पाई जाती है। यहूदी आख़िरत और हिसाब पर ईमान रखने के बावजूद, उनमें से हर एक यह कामना करता है कि उसे हज़ार साल की लंबी उम्र मिले। लेकिन यह लंबी उम्र उसे अल्लाह की यातना से बिल्कुल भी नहीं बचा सकती, चाहे वह हज़ार साल ही क्यों न जिए। अल्लाह तआला उनके सभी कर्मों को देख रहा है और उनके बारे में पूरी तरह जानता है, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- दुनिया की मोहब्बत और आख़िरत की ग़फ़लत: यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की लंबी उम्र और उसके सुखों से मोहब्बत इंसान को आख़िरत से ग़ाफ़िल कर देती है। सच्चा मुसलमान वह है जो दुनिया को आख़िरत की खेती समझे और अपने जीवन को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा में बिताए।
- लंबी उम्र का कोई फ़ायदा नहीं अगर अमल सही न हों: यह आयत स्पष्ट करती है कि लंबी उम्र पाना अपने आप में कोई नेमत नहीं है, बल्कि असली नेमत यह है कि इंसान अपनी उम्र को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारे। अगर जीवन अल्लाह की नाफ़रमानी में बीते, तो हज़ार साल की उम्र भी इंसान को अल्लाह की यातना से नहीं बचा सकती।
- अल्लाह की निगरानी का एहसास: अल्लाह तआला हर काम को देख रहा है और हर नीयत को जानता है। इस एहसास से इंसान में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा होता है और वह गुनाहों से बचता है। यही ख़ौ�़ इंसान को अच्छे अमल की तरफ़ ले जाता है।
- ईमानदारों के लिए नसीहत: यह आयत मुसलमानों के लिए एक सबक़ है कि वे यहूदियों की तरह दुनिया की मोहब्बत में न पड़ें, बल्कि अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा और उसके दीन की ख़िदमत में लगाएँ, क्योंकि असली कामयाबी आख़िरत में है, न कि दुनिया की लंबी उम्र में।
📜 आयत 94-98 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 96
सूरा अल-बकरा आयत 96 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम उन ही को ज़िन्दगी का सबसे…सूरा आयत 96/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 94–98. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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