Wa lai yatamannawhu abadam bimaa qaddamat aydeehim; wallaahu `aleemum bizzaalimeen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ताकि जल्दी बेहिश्त में जाओ) लेकिन वह उन आमाले बद की वजह से जिनको उनके हाथों ने पहले से आगे भेजा है हरगिज़ मौत की आरज़ू न करेंगे और खुदा ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है
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لیکن ان اعمال کی وجہ سے، جو ان کے ہاتھ آگے بھیج چکے ہیں، یہ کبھی اس کی آرزو نہیں کریں گے، اور خدا ظالموں سے (خوب) واقف ہے
(ताकि जल्दी बेहिश्त में जाओ) लेकिन वह उन आमाले बद की वजह से जिनको उनके हाथों ने पहले से आगे भेजा है हरगिज़ मौत की आरज़ू न करेंगे और खुदा ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
يَتَمَنَّوْهُ: इसकी कामना करें (अर्थात मृत्यु की कामना करें)।
بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ: उन कर्मों के कारण जो उन्होंने आगे भेजे हैं (अर्थात अपने किए हुए कर्म)।
عَلِيمٌ بِالظَّالِمِينَ: अत्याचारियों को भली-भाँति जानने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यहूदियों ने अपने दावे में कहा था कि आख़िरत का घर (जन्नत) विशेष रूप से उन्हीं के लिए है, और वे मृत्यु की कामना करते हुए कहते थे कि यदि यह दावा सच है तो वे मृत्यु की कामना करें। लेकिन अल्लाह तआला ने बताया कि वे इस मृत्यु की कामना कभी नहीं करेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में क्या कुछ किया है — अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, उसकी आयतों को झुठलाया, उसके रसूलों को नकारा और उसकी किताबों में हेर-फेर किया। ये सारे कर्म उनके आगे भेजे हुए हैं, और इन्हीं के कारण वे जानते हैं कि यदि उन्होंने मृत्यु की कामना की तो वे कभी जन्नत में नहीं जा सकते, बल्कि उनका ठिकाना जहन्नम है। इसलिए वे मृत्यु की कामना कभी नहीं करते। अल्लाह तआला उन अत्याचारियों को भली-भाँति जानता है जो सत्य को छिपाते हैं और अपने झूठे दावों पर अड़े रहते हैं, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देगा। यह उनके लिए एक सख्त चेतावनी और धमकी है।
फ़ायदे (सीख):
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने कर्मों का हिसाब हमेशा याद रखना चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति जानता है कि उसके कर्म बुरे हैं, वह मृत्यु से डरता है और उसकी कामना नहीं करता।
अल्लाह तआला का इल्म हर चीज़ पर हावी है — वह जानता है कि कौन सच्चा है और कौन झूठा, कौन नेक है और कौन ज़ालिम। इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी से धोखा नहीं खाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सब कुछ देख रहा है।
यह आयत मुसलमानों को यह सिखाती है कि वे अपने दावों में सच्चे हों और अपने कर्मों को सुधारें, क्योंकि केवल दावा करने से कुछ नहीं होता — असली कसौटी अच्छे कर्म हैं।
अल्लाह की ओर से ज़ालिमों के लिए सख्त चेतावनी है, जो हमें यह सिखाती है कि हमें कभी ज़ुल्म नहीं करना चाहिए, चाहे वह किसी पर भी हो, क्योंकि अल्लाह ज़ालिमों को जानता है और उन्हें उनका बदला देगा।
यह आयत हमें मृत्यु की याद दिलाती है और यह कि मृत्यु के बाद का जीवन ही असली जीवन है, इसलिए हमें उसकी तैयारी करनी चाहिए — नेक कर्म करके, ताकि मृत्यु हमारे लिए बेहतर जीवन का द्वार बने, न कि अफसोस और पछतावे का।
और (वह वक्त याद करो) जब हमने तुमसे अहद लिया और (क़ोहे) तूर को (तुम्हारी उदूले हुक्मी से) तुम्हारे सर पर लटकाया और (हमने कहा कि ये किताब तौरेत) जो हमने दी है मज़बूती से लिए रहो और (जो कुछ उसमें है) सुनो तो कहने लगे सुना तो (सही लेकिन) हम इसको मानते नहीं और उनकी बेईमानी की वजह से (गोया) बछड़े की उलफ़त घोल के उनके दिलों में पिला दी गई (ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि अगर तुम ईमानदार थे तो तुमको तुम्हारा ईमान क्या ही बुरा हुक्म करता था
(ऐ रसूल) इन लोगों से कह दो कि अगर खुदा के नज़दीक आख़ेरत का घर (बेहिश्त) ख़ास तुम्हारे वास्ते है और लोगों के वासते नहीं है पस अगर तुम सच्चे हो तो मौत की आरजू क़रो
(ताकि जल्दी बेहिश्त में जाओ) लेकिन वह उन आमाले बद की वजह से जिनको उनके हाथों ने पहले से आगे भेजा है हरगिज़ मौत की आरज़ू न करेंगे और खुदा ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है
और (ऐ रसूल) तुम उन ही को ज़िन्दगी का सबसे ज्यादा हरीस पाओगे और मुशरिक़ों में से हर एक शख्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खुदा उसे देख रहा है
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खुदा दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खुदा के हुक्म से (इस कुरान को) तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले नाज़िल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते खुशख़बरी है
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