Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَتَمَنَّوْهُ: इसकी कामना करें (अर्थात मृत्यु की कामना करें)।
- بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ: उन कर्मों के कारण जो उन्होंने आगे भेजे हैं (अर्थात अपने किए हुए कर्म)।
- عَلِيمٌ بِالظَّالِمِينَ: अत्याचारियों को भली-भाँति जानने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यहूदियों ने अपने दावे में कहा था कि आख़िरत का घर (जन्नत) विशेष रूप से उन्हीं के लिए है, और वे मृत्यु की कामना करते हुए कहते थे कि यदि यह दावा सच है तो वे मृत्यु की कामना करें। लेकिन अल्लाह तआला ने बताया कि वे इस मृत्यु की कामना कभी नहीं करेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में क्या कुछ किया है — अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, उसकी आयतों को झुठलाया, उसके रसूलों को नकारा और उसकी किताबों में हेर-फेर किया। ये सारे कर्म उनके आगे भेजे हुए हैं, और इन्हीं के कारण वे जानते हैं कि यदि उन्होंने मृत्यु की कामना की तो वे कभी जन्नत में नहीं जा सकते, बल्कि उनका ठिकाना जहन्नम है। इसलिए वे मृत्यु की कामना कभी नहीं करते। अल्लाह तआला उन अत्याचारियों को भली-भाँति जानता है जो सत्य को छिपाते हैं और अपने झूठे दावों पर अड़े रहते हैं, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देगा। यह उनके लिए एक सख्त चेतावनी और धमकी है।
फ़ायदे (सीख):
- यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने कर्मों का हिसाब हमेशा याद रखना चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति जानता है कि उसके कर्म बुरे हैं, वह मृत्यु से डरता है और उसकी कामना नहीं करता।
- अल्लाह तआला का इल्म हर चीज़ पर हावी है — वह जानता है कि कौन सच्चा है और कौन झूठा, कौन नेक है और कौन ज़ालिम। इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी से धोखा नहीं खाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सब कुछ देख रहा है।
- यह आयत मुसलमानों को यह सिखाती है कि वे अपने दावों में सच्चे हों और अपने कर्मों को सुधारें, क्योंकि केवल दावा करने से कुछ नहीं होता — असली कसौटी अच्छे कर्म हैं।
- अल्लाह की ओर से ज़ालिमों के लिए सख्त चेतावनी है, जो हमें यह सिखाती है कि हमें कभी ज़ुल्म नहीं करना चाहिए, चाहे वह किसी पर भी हो, क्योंकि अल्लाह ज़ालिमों को जानता है और उन्हें उनका बदला देगा।
- यह आयत हमें मृत्यु की याद दिलाती है और यह कि मृत्यु के बाद का जीवन ही असली जीवन है, इसलिए हमें उसकी तैयारी करनी चाहिए — नेक कर्म करके, ताकि मृत्यु हमारे लिए बेहतर जीवन का द्वार बने, न कि अफसोस और पछतावे का।
📜 आयत 93-97 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 95
सूरा अल-बकरा आयत 95 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ताकि जल्दी बेहिश्त में जाओ) लेकिन वह उन आमाले बद…सूरा आयत 95/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 93–97. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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