Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- عَدُوًّا: शत्रु, दुश्मन
- نَزَّلَهُ: उसे उतारा (यहाँ अर्थ है क़ुरआन को)
- بِإِذْنِ اللّهِ: अल्लाह की आज्ञा से
- مُصَدِّقًا: पुष्टि करने वाला, सत्यापित करने वाला
- لِمَا بَيْنَ يَدَيْهِ: जो उससे पहले आ चुका है (पिछली किताबें)
- هُدًى: मार्गदर्शन
- بُشْرَى: शुभ सूचना
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! आप उन यहूदियों से कह दीजिए जिन्होंने कहा था कि जिब्रील हमारा शत्रु है — कि जो कोई भी जिब्रील का शत्रु हो, वह जान ले कि जिब्रील ही वह (महान) फ़रिश्ता है जिसने अल्लाह की आज्ञा से यह क़ुरआन आपके हृदय पर उतारा है। यह क़ुरआन उन सभी किताबों की पुष्टि करता है जो इससे पहले उतारी गईं, जैसे तौरात और इंजील। यह लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने का मार्गदर्शन देता है और उन ईमानवालों के लिए शुभ सूचना है जो इस पर ईमान लाते हैं, कि उनके लिए अल्लाह की ओर से बड़ी नेमतें और आनंद तैयार हैं।
जो व्यक्ति ऐसे फ़रिश्ते का दुश्मन हो जिसका कार्य अल्लाह की रहमत और मार्गदर्शन को लोगों तक पहुँचाना है, वह वास्तव में सत्य से भटक गया है और अपने ही नुक़सान का कारण बन रहा है। जिब्रील अलैहिस्सलाम अल्लाह के विश्वसनीय दूत हैं, और उनका शत्रु होना अल्लाह की रहमत से दूर हो जाना है।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह के नेक फ़रिश्तों से मुहब्बत करना ईमान का हिस्सा है। जिब्रील अलैहिस्सलाम जैसे फ़रिश्ते अल्लाह के पैग़ाम को पहुँचाने का सम्माननीय कार्य करते हैं, और उनसे दुश्मनी रखना अल्लाह की रहमत से दूर होना है।
- यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन अल्लाह की ओर से उतारा गया सच्चा ग्रंथ है, जो पिछली सभी दिव्य किताबों की पुष्टि करता है। यह किसी इंसान की रचना नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है, जो हृदय पर उतारा गया — यह इस बात का प्रमाण है कि नबी ﷺ का दिल पवित्र और सत्य का पात्र था।
- क़ुरआन हमारे लिए मार्गदर्शन (हिदायत) और शुभ सूचना (बशारत) है। जो भी इसे अपनाएगा, उसे दुनिया में सही रास्ता मिलेगा और आख़िरत में अल्लाह की जन्नत की खुशखबरी मिलेगी। यह हर उस इंसान के लिए रहमत है जो इसे समझकर उस पर अमल करता है।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने नबी ﷺ की हिफ़ाज़त करता है और उनके दुश्मनों के हमलों का जवाब देता है। यह हमें सिखाता है कि सच्चाई पर क़ायम रहने वालों की अल्लाह मदद करता है, चाहे दुश्मन कितने भी ताकतवर क्यों न हों।
📜 आयत 95-99 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 97
सूरा अल-बकरा आयत 97 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील…सूरा आयत 97/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 95–99. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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