Qul man kaana `aduwwal li Jibreela fainnahoo nazzalahoo `alaa qalbika bi iznil laahi musaddiqal limaa baina yadihi wa hudanw wa bushraa lilmu`mineen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खुदा दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खुदा के हुक्म से (इस कुरान को) तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले नाज़िल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते खुशख़बरी है
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
کہہ دو کہ جو شخص جبرئیل کا دشمن ہو (اس کو غصے میں مر جانا چاہیئے) اس نے تو (یہ کتاب) خدا کے حکم سے تمہارے دل پر نازل کی ہے جو پہلی کتابوں کی تصدیق کرتی ہے، اور ایمان والوں کے لیے ہدایت اور بشارت ہے
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खुदा दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खुदा के हुक्म से (इस कुरान को) तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले नाज़िल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते खुशख़बरी है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
عَدُوًّا: शत्रु, दुश्मन
نَزَّلَهُ: उसे उतारा (यहाँ अर्थ है क़ुरआन को)
بِإِذْنِ اللّهِ: अल्लाह की आज्ञा से
مُصَدِّقًا: पुष्टि करने वाला, सत्यापित करने वाला
لِمَا بَيْنَ يَدَيْهِ: जो उससे पहले आ चुका है (पिछली किताबें)
هُدًى: मार्गदर्शन
بُشْرَى: शुभ सूचना
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! आप उन यहूदियों से कह दीजिए जिन्होंने कहा था कि जिब्रील हमारा शत्रु है — कि जो कोई भी जिब्रील का शत्रु हो, वह जान ले कि जिब्रील ही वह (महान) फ़रिश्ता है जिसने अल्लाह की आज्ञा से यह क़ुरआन आपके हृदय पर उतारा है। यह क़ुरआन उन सभी किताबों की पुष्टि करता है जो इससे पहले उतारी गईं, जैसे तौरात और इंजील। यह लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने का मार्गदर्शन देता है और उन ईमानवालों के लिए शुभ सूचना है जो इस पर ईमान लाते हैं, कि उनके लिए अल्लाह की ओर से बड़ी नेमतें और आनंद तैयार हैं।
जो व्यक्ति ऐसे फ़रिश्ते का दुश्मन हो जिसका कार्य अल्लाह की रहमत और मार्गदर्शन को लोगों तक पहुँचाना है, वह वास्तव में सत्य से भटक गया है और अपने ही नुक़सान का कारण बन रहा है। जिब्रील अलैहिस्सलाम अल्लाह के विश्वसनीय दूत हैं, और उनका शत्रु होना अल्लाह की रहमत से दूर हो जाना है।
फ़ायदे (लाभ):
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह के नेक फ़रिश्तों से मुहब्बत करना ईमान का हिस्सा है। जिब्रील अलैहिस्सलाम जैसे फ़रिश्ते अल्लाह के पैग़ाम को पहुँचाने का सम्माननीय कार्य करते हैं, और उनसे दुश्मनी रखना अल्लाह की रहमत से दूर होना है।
यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन अल्लाह की ओर से उतारा गया सच्चा ग्रंथ है, जो पिछली सभी दिव्य किताबों की पुष्टि करता है। यह किसी इंसान की रचना नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है, जो हृदय पर उतारा गया — यह इस बात का प्रमाण है कि नबी ﷺ का दिल पवित्र और सत्य का पात्र था।
क़ुरआन हमारे लिए मार्गदर्शन (हिदायत) और शुभ सूचना (बशारत) है। जो भी इसे अपनाएगा, उसे दुनिया में सही रास्ता मिलेगा और आख़िरत में अल्लाह की जन्नत की खुशखबरी मिलेगी। यह हर उस इंसान के लिए रहमत है जो इसे समझकर उस पर अमल करता है।
इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने नबी ﷺ की हिफ़ाज़त करता है और उनके दुश्मनों के हमलों का जवाब देता है। यह हमें सिखाता है कि सच्चाई पर क़ायम रहने वालों की अल्लाह मदद करता है, चाहे दुश्मन कितने भी ताकतवर क्यों न हों।
(ताकि जल्दी बेहिश्त में जाओ) लेकिन वह उन आमाले बद की वजह से जिनको उनके हाथों ने पहले से आगे भेजा है हरगिज़ मौत की आरज़ू न करेंगे और खुदा ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है
और (ऐ रसूल) तुम उन ही को ज़िन्दगी का सबसे ज्यादा हरीस पाओगे और मुशरिक़ों में से हर एक शख्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खुदा उसे देख रहा है
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खुदा दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खुदा के हुक्म से (इस कुरान को) तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले नाज़िल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते खुशख़बरी है
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