ताहा · 122/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
ثُمَّ اجْتَبَاهُ رَبُّهُ فَتَابَ عَلَيْهِ وَهَدَىٰ ۝١٢٢
Summaj tabbahu Rabbuhoo fataaba `alaihi wa hadaa
📖 हिंदी अर्थ
तो (राहे सवाब से) बेराह हो गए इसके बाद उनके परवरदिगार ने बर गुज़ीदा किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اجْتَبَاهُ: उसे चुन लिया, अपनी ओर खींच लिया, विशेष सम्मान दिया।
  • فَتَابَ عَلَيْهِ: उसकी तौबा (क्षमा-याचना) को स्वीकार कर लिया।
  • وَهَدَىٰ: उसे सही मार्ग दिखाया, उसकी भलाई की ओर मार्गदर्शन किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला हमें हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की वह दिल को छू लेने वाली कहानी सुनाते हैं, जब उन्होंने भूलवश पेड़ का फल खा लिया था। उस समय अल्लाह ने उन्हें जन्नत से निकाल दिया, लेकिन यह अल्लाह की रहमत और कृपा का अद्भुत नमूना है कि उसके बाद अल्लाह ने उन्हें फिर से चुन लिया। यानी, जब आदम अलैहिस्सलाम ने अपनी गलती का एहसास किया, रो-रो कर तौबा की, और अल्लाह से माफ़ी मांगी, तो अल्लाह ने उन्हें अपनी विशेष रहमत से नवाज़ा। उन्हें अपने करीब किया, उनकी तौबा क़बूल की, और उन्हें फिर से हिदायत दी।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से कहीं बढ़कर है। इंसान चाहे कितनी भी बड़ी गलती कर ले, जब तक वह सच्चे दिल से अल्लाह की ओर लौटता है, अल्लाह उसे अपनाता है, उसकी तौबा क़बूल करता है, और उसे सही रास्ता दिखाता है। "وَهَدَىٰ" का मतलब है कि अल्लाह ने उन्हें सिर्फ़ माफ़ ही नहीं किया, बल्कि उन्हें हमेशा तौबा करते रहने, अल्लाह की इबादत करते रहने, और सीधे रास्ते पर चलते रहने की तौफ़ीक़ भी दी।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें कभी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए। चाहे हमसे कितनी भी गलतियाँ हुई हों, अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है। बस ज़रूरत है सच्चे दिल से तौबा करने की, अल्लाह की ओर लौटने की, और उसकी राह पर चलने की। अल्लाह अपने बंदे से इतना प्यार करता है कि जब बंदा उसकी ओर एक क़दम बढ़ाता है, तो अल्लाह उसकी ओर दौड़कर आता है। यही अल्लाह की महानता और उसकी असीम दया है।



📜 आयत 120-124 — सूरा ताहा

120فَوَسْوَسَ إِلَيْهِ الشَّيْطَانُ قَالَ يَا آدَمُ هَلْ أَدُلُّكَ عَلَىٰ شَجَرَةِ الْخُلْدِ وَمُلْكٍ لَّا يَبْلَىٰ
तो शैतान ने उनके दिल में वसवसा डाला (और) कहा ऐ आदम क्या मैं तम्हें (हमेशगी की ज़िन्दगी) का दरख्त और वह सल्तनत जो कभी ज़ाएल न हो बता दूँ
121فَأَكَلَا مِنْهَا فَبَدَتْ لَهُمَا سَوْآتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَانِ عَلَيْهِمَا مِن وَرَقِ الْجَنَّةِ ۚ وَعَصَىٰ آدَمُ رَبَّهُ فَغَوَىٰ
चुनान्चे दोनों मियाँ बीबी ने उसी में से कुछ खाया तो उनका आगा पीछा उनपर ज़ाहिर हो गया और दोनों बेहिश्त के (दरख्त के) पत्ते अपने आगे पीछे पर चिपकाने लगे और आदम ने अपने परवरदिगार की नाफ़रमानी की
122ثُمَّ اجْتَبَاهُ رَبُّهُ فَتَابَ عَلَيْهِ وَهَدَىٰ
तो (राहे सवाब से) बेराह हो गए इसके बाद उनके परवरदिगार ने बर गुज़ीदा किया
123قَالَ اهْبِطَا مِنْهَا جَمِيعًا ۖ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ ۖ فَإِمَّا يَأْتِيَنَّكُم مِّنِّي هُدًى فَمَنِ اتَّبَعَ هُدَايَ فَلَا يَضِلُّ وَلَا يَشْقَىٰ
फिर उनकी तौबा कुबूल की और उनकी हिदायत की फरमाया कि तुम दोनों बेहश्त से नीचे उतर जाओ तुम में से एक का एक दुशमन है फिर अगर तुम्हारे पास मेरी तरफ से हिदायत पहुँचे तो (तुम) उसकी पैरवी करना क्योंकि जो शख्स मेरी हिदायत पर चलेगा न तो गुमराह होगा और न मुसीबत में फँसेगा
124وَمَنْ أَعْرَضَ عَن ذِكْرِي فَإِنَّ لَهُ مَعِيشَةً ضَنكًا وَنَحْشُرُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَعْمَىٰ
और जिस शख्स ने मेरी याद से मुँह फेरा तो उसकी ज़िन्दगी बहुत तंगी में बसर होगी और हम उसको क़यामत के दिन अंधा बना के उठाएँगे
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
122आयत

अनुवाद — ताहा 122

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Saturday, October 3, 2026

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