Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَبَقَتْ لَهُم مِّنَّا الْحُسْنَىٰ: जिनके लिए हमारी ओर से पहले ही भलाई (सौभाग्य) लिख दी गई।
- مُبْعَدُونَ: दूर रखे जाने वाले, अलग किए गए।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जिनके लिए अल्लाह तआला की ओर से पहले ही भलाई और सज़ाए-ख़ैर (सौभाग्य) का फ़ैसला लिख दिया गया है। ये वे लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने अपने इल्म-ए-अज़ली (पूर्व ज्ञान) में नेक और जन्नती ठहराया है। जब मुशरिकीन (बहुदेववादी) ये कहते थे कि जिन्हें हम पूजते हैं — जैसे हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) और फ़रिश्ते — वे भी जहन्नम में जाएँगे, तो अल्लाह तआला ने इस ग़लतफ़हमी को दूर किया और फ़रमाया कि ये लोग जहन्नम की आग से बिल्कुल दूर रखे जाएँगे। वे न तो कभी उसमें दाखिल होंगे और न ही उसके पास भी फटकेंगे।
यह आयत अल्लाह के नेक बंदों के लिए बड़ी ख़ुशख़बरी है। जो लोग अल्लाह की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारते हैं, उनके लिए अल्लाह ने अपनी रहमत और भलाई का वादा किया है। यहाँ से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह अपने मुख़लिस (सच्चे) बंदों को कभी निराश नहीं करता। जो लोग उसकी इबादत में किसी को शरीक नहीं करते, उनके लिए अल्लाह की जानिब से सिर्फ़ भलाई ही भलाई है।
इस आयत में एक और बात सीखने को मिलती है कि अल्लाह तआला ने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) और फ़रिश्तों को उन लोगों से अलग किया है जिन्हें मुशरिकीन पूजते थे। यानी अल्लाह के नेक बंदे, चाहे वो इंसान हों या फ़रिश्ते, उनकी इबादत करना ग़लत है, लेकिन वे ख़ुद अल्लाह के पास मुअज़्ज़ज़ (सम्मानित) हैं और उन्हें अल्लाह की रहमत से कोई महरूम नहीं कर सकता।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है। जो लोग उसकी राह में चलते हैं, उनके लिए अल्लाह ने जन्नत का रास्ता आसान कर दिया है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत के मुताबिक बनाएँ, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिनके लिए "हुस्ना" (भलाई) लिखी जा चुकी है और जो जहन्नम की आग से महफ़ूज़ (सुरक्षित) रहेंगे। अल्लाह हम सबको इस तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 99-103 — सूरा अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 101
सूरा अल-अंबिया आयत 101 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ज़बान अलबत्ता जिन लोगों के वास्ते हमारी तरफ से पहले…सूरा आयत 101/112 — सूरा अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंबिया सुनें, सूरा अल-अंबिया अनुवाद, सूरा अल-अंबिया mp3, सूरा अल-अंबिया pdf. आयत 99–103. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंबिया
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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