अल-अंबिया · 101/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
إِنَّ الَّذِينَ سَبَقَتْ لَهُم مِّنَّا الْحُسْنَىٰ أُولَٰئِكَ عَنْهَا مُبْعَدُونَ ۝١٠١
Innal lazeena sabaqat lahum minnal husnaaa ulaaa`ika `anhaa mub`adoon
📖 हिंदी अर्थ
ज़बान अलबत्ता जिन लोगों के वास्ते हमारी तरफ से पहले ही भलाई (तक़दीर में लिखी जा चुकी) वह लोग दोज़ख़ से दूर ही दूर रखे जाएँगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَبَقَتْ لَهُم مِّنَّا الْحُسْنَىٰ: जिनके लिए हमारी ओर से पहले ही भलाई (सौभाग्य) लिख दी गई।
  • مُبْعَدُونَ: दूर रखे जाने वाले, अलग किए गए।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिनके लिए अल्लाह तआला की ओर से पहले ही भलाई और सज़ाए-ख़ैर (सौभाग्य) का फ़ैसला लिख दिया गया है। ये वे लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने अपने इल्म-ए-अज़ली (पूर्व ज्ञान) में नेक और जन्नती ठहराया है। जब मुशरिकीन (बहुदेववादी) ये कहते थे कि जिन्हें हम पूजते हैं — जैसे हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) और फ़रिश्ते — वे भी जहन्नम में जाएँगे, तो अल्लाह तआला ने इस ग़लतफ़हमी को दूर किया और फ़रमाया कि ये लोग जहन्नम की आग से बिल्कुल दूर रखे जाएँगे। वे न तो कभी उसमें दाखिल होंगे और न ही उसके पास भी फटकेंगे।

यह आयत अल्लाह के नेक बंदों के लिए बड़ी ख़ुशख़बरी है। जो लोग अल्लाह की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारते हैं, उनके लिए अल्लाह ने अपनी रहमत और भलाई का वादा किया है। यहाँ से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह अपने मुख़लिस (सच्चे) बंदों को कभी निराश नहीं करता। जो लोग उसकी इबादत में किसी को शरीक नहीं करते, उनके लिए अल्लाह की जानिब से सिर्फ़ भलाई ही भलाई है।

इस आयत में एक और बात सीखने को मिलती है कि अल्लाह तआला ने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) और फ़रिश्तों को उन लोगों से अलग किया है जिन्हें मुशरिकीन पूजते थे। यानी अल्लाह के नेक बंदे, चाहे वो इंसान हों या फ़रिश्ते, उनकी इबादत करना ग़लत है, लेकिन वे ख़ुद अल्लाह के पास मुअज़्ज़ज़ (सम्मानित) हैं और उन्हें अल्लाह की रहमत से कोई महरूम नहीं कर सकता।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है। जो लोग उसकी राह में चलते हैं, उनके लिए अल्लाह ने जन्नत का रास्ता आसान कर दिया है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत के मुताबिक बनाएँ, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिनके लिए "हुस्ना" (भलाई) लिखी जा चुकी है और जो जहन्नम की आग से महफ़ूज़ (सुरक्षित) रहेंगे। अल्लाह हम सबको इस तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 99-103 — अल-अंबिया

99لَوْ كَانَ هَٰؤُلَاءِ آلِهَةً مَّا وَرَدُوهَا ۖ وَكُلٌّ فِيهَا خَالِدُونَ
अगर ये (सच्चे) माबूद होते तो उन्हें दोज़ख़ में न जाना पड़ता और (अब तो) सबके सब उसी में हमेशा रहेंगे
100لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌ وَهُمْ فِيهَا لَا يَسْمَعُونَ
उन लोगों की दोज़ख़ में चिंघाड़ होगी और ये लोग (अपने शोर व ग़ुल में) किसी की बात भी न सुन सकेंगे
101إِنَّ الَّذِينَ سَبَقَتْ لَهُم مِّنَّا الْحُسْنَىٰ أُولَٰئِكَ عَنْهَا مُبْعَدُونَ
ज़बान अलबत्ता जिन लोगों के वास्ते हमारी तरफ से पहले ही भलाई (तक़दीर में लिखी जा चुकी) वह लोग दोज़ख़ से दूर ही दूर रखे जाएँगे
102لَا يَسْمَعُونَ حَسِيسَهَا ۖ وَهُمْ فِي مَا اشْتَهَتْ أَنفُسُهُمْ خَالِدُونَ
(यहाँ तक) कि ये लोग उसकी भनक भी न सुनेंगे और ये लोग हमेशा अपनी मनमाँगी मुरादों में (चैन से) रहेंगे
103لَا يَحْزُنُهُمُ الْفَزَعُ الْأَكْبَرُ وَتَتَلَقَّاهُمُ الْمَلَائِكَةُ هَٰذَا يَوْمُكُمُ الَّذِي كُنتُمْ تُوعَدُونَ
और उनको (क़यामत का) बड़े से बड़ा ख़ौफ़ भी दहशत में न लाएगा और फ़रिश्ते उन से खुशी-खुशी मुलाक़ात करेंगे और ये खुशख़बरी देंगे कि यही वह तुम्हारा (खुशी का) दिन है जिसका (दुनिया में) तुमसे वायदा किया जाता था
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अनुवाद — अल-अंबिया 101

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Tuesday, August 18, 2026

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