अल-अंबिया · 21/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
أَمِ اتَّخَذُوا آلِهَةً مِّنَ الْأَرْضِ هُمْ يُنشِرُونَ ۝٢١
Amit takhazooo aalihatam minal ardi hum yunshiroon
📖 हिंदी अर्थ
उन लोगों जो माबूद ज़मीन में बना रखे हैं क्या वही (लोगों को) ज़िन्दा करेंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَمِ (अम): यहाँ इसका अर्थ "बल्कि" (بل) है, और यह प्रश्नवाचक है जो इन्कार (अस्वीकृति) के लिए आया है।
  • آلِهَةً (आलिहतन): पूज्य वस्तुएँ, देवता।
  • مِنَ الْأَرْضِ (मिनल अर्ज़): धरती से बनी हुई, यानी मिट्टी, पत्थर या लकड़ी की बनी मूर्तियाँ।
  • يُنشِرُونَ (युनशिरून): जीवित करते हैं, मृतकों को उठाते हैं (पुनर्जीवित करते हैं)।

व्याख्या:

यह आयत उन लोगों पर कड़ी फटकार और तर्कपूर्ण प्रश्न है जो अल्लाह को छोड़कर मूर्तियों और पत्थरों की पूजा करते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है: "क्या उन्होंने धरती से बनी हुए ऐसे पूज्य बना लिए हैं जो मृतकों को जीवित कर सकें?"

यानी, ये मूर्तियाँ तो स्वयं धरती की मिट्टी, पत्थर और लकड़ी से बनी हैं—वे न तो किसी को जीवन दे सकती हैं, न ही किसी को मौत। वे न तो सुनती हैं, न देखती हैं, न किसी की सहायता कर सकती हैं। फिर ऐसी बेजान चीज़ों को पूजना कैसी बुद्धिमानी है?

एक सच्चे पूज्य (इलाह) की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह जीवन और मृत्यु पर पूर्ण अधिकार रखता है, वह मृतकों को जीवित कर सकता है, और क़यामत के दिन सबको दोबारा उठाने की शक्ति रखता है। ये सारी विशेषताएँ केवल अल्लाह तआला में हैं, जो आकाशों और धरती का रचयिता है।

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किसे अपना सहारा बनाते हैं? क्या हम उस पर भरोसा करते हैं जो स्वयं बेजान है, या उस पर जो सब कुछ सुनता, देखता और कर सकता है?

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हम अपने दिल को केवल अल्लाह से जोड़ें, उसी से मदद माँगें, और उसी की इबादत करें। क्योंकि वही है जो मुर्दों को ज़िंदा करेगा, और वही है जो हमें हमारे अच्छे और बुरे कर्मों का बदला देगा। जो व्यक्ति अल्लाह पर पूर्ण विश्वास रखता है, उसका दिल कभी निराश नहीं होता, क्योंकि उसे यकीन होता है कि उसका रब हर चीज़ पर क़ादिर (सक्षम) है।

तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी के हर मामले में अल्लाह को ही अपना सच्चा मददगार और पूज्य बनाएँ, और उसकी रहमत और क़ुदरत पर भरोसा रखें। यही सच्ची सफलता और कामयाबी का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — अल-अंबिया

19وَلَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَمَنْ عِندَهُ لَا يَسْتَكْبِرُونَ عَنْ عِبَادَتِهِ وَلَا يَسْتَحْسِرُونَ
हालाँकि जो लोग (फरिश्ते) आसमान और ज़मीन में हैं (सब) उसी के (बन्दे) हैं और जो (फरिश्ते) उस सरकार में हैं न तो वह उसकी इबादत की शेख़ी करते हैं और न थकते हैं
20يُسَبِّحُونَ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ لَا يَفْتُرُونَ
रात और दिन उसकी तस्बीह किया करते हैं (और) कभी काहिली नहीं करते
21أَمِ اتَّخَذُوا آلِهَةً مِّنَ الْأَرْضِ هُمْ يُنشِرُونَ
उन लोगों जो माबूद ज़मीन में बना रखे हैं क्या वही (लोगों को) ज़िन्दा करेंगे
22لَوْ كَانَ فِيهِمَا آلِهَةٌ إِلَّا اللَّهُ لَفَسَدَتَا ۚ فَسُبْحَانَ اللَّهِ رَبِّ الْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ
अगर बफ़रने मुहाल) ज़मीन व आसमान में खुदा कि सिवा चन्द माबूद होते तो दोनों कब के बरबाद हो गए होते तो जो बातें ये लोग अपने जी से (उसके बारे में) बनाया करते हैं खुदा जो अर्श का मालिक है उन तमाम ऐबों से पाक व पाकीज़ा है
23لَا يُسْأَلُ عَمَّا يَفْعَلُ وَهُمْ يُسْأَلُونَ
जो कुछ वह करता है उसकी पूछगछ नहीं हो सकती
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अनुवाद — अल-अंबिया 21

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सूरा आयत 21/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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