अल-अंबिया · 25/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رَّسُولٍ إِلَّا نُوحِي إِلَيْهِ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدُونِ ۝٢٥
Wa maaa arsalnaa min qablika mir Rasoolin illaa nooheee ilaihi annahoo laaa ilaaha illaaa Ana fa`budoon
📖 हिंदी अर्थ
तो (जब हक़ का ज़िक्र आता है) ये लोग मुँह फेर लेते हैं और (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले जब कभी कोई रसूल भेजा तो उसके पास ''वही'' भेजते रहे कि बस हमारे सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं तो मेरी इबादत किया करो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ (معاني الكلمات):

  • مِن قَبْلِكَ – आपसे पहले
  • رَسُولٍ – संदेशवाहक (पैगंबर)
  • نُوحِي – हम वह्य (प्रकाशना) भेजते हैं
  • لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا – मेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं
  • فَاعْبُدُونِ – अतः तुम मेरी ही इबादत (पूजा) करो

तफसीर (व्याख्या):

ऐ प्यारे नबी! आप यह जान लें कि हमने आपसे पहले जितने भी रसूल भेजे, उन सबको यही शिक्षा और वह्य दी कि मेरे सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं है। यही वह मूल संदेश है जो आदम से लेकर ईसा तक हर नबी लेकर आया। सभी पैगंबरों का यही एकमात्र धर्म था – अल्लाह की एकता (तौहीद) और उसकी विशेष इबादत।

यह आयत बताती है कि तौहीद (एकेश्वरवाद) ही वह केंद्रीय सत्य है जिस पर पूरी दुनिया की तमाम रसालतें (पैगंबरी मिशन) टिकी हुई हैं। किसी भी नबी ने कभी शिर्क (बहुदेववाद) की शिक्षा नहीं दी, न ही किसी को अल्लाह का साझी बनाया। यही वह आधारशिला है जिस पर इस्लाम की पूरी इमारत खड़ी है।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम कोई नया धर्म नहीं, बल्कि वही सच्चा और मूल धर्म है जो हर ज़माने में हर नबी लेकर आया। आज जब दुनिया में कई तरह की गुमराहियाँ और झूठे विश्वास फैले हुए हैं, तो यह आयत हमें सीधे रास्ते पर चलने की ताकत देती है। अल्लाह ने हर नबी को यही सिखाया कि वह अकेला ही इबादत के लायक है – कोई बुत, कोई इंसान, कोई सितारा या कोई और चीज़ उसका साझी नहीं हो सकती।

यह हमारे लिए कितनी बड़ी रहमत है कि हमें सीधा और साफ रास्ता दिखाया गया। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल में अल्लाह की इबादत को अपना निशाना बनाएँ, उसी से मदद माँगें और उसी के आगे सिर झुकाएँ। जब हम यह समझ लेंगे कि सारी कायनात का मालिक सिर्फ एक है, तो हमारा दिल सुकून पाएगा और हमारी ज़िंदगी में बरकत आएगी। यही वह पैगाम है जो हर नबी लेकर आया, और यही वह सच्चाई है जो हमें कामयाबी की राह दिखाती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अल-अंबिया

23لَا يُسْأَلُ عَمَّا يَفْعَلُ وَهُمْ يُسْأَلُونَ
जो कुछ वह करता है उसकी पूछगछ नहीं हो सकती
24أَمِ اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ آلِهَةً ۖ قُلْ هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ ۖ هَٰذَا ذِكْرُ مَن مَّعِيَ وَذِكْرُ مَن قَبْلِي ۗ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ الْحَقَّ ۖ فَهُم مُّعْرِضُونَ
(हाँ) और उन लोगों से बाज़पुर्स होगी क्या उन लोगों ने खुदा को छोड़कर कुछ और माबूद बना रखे हैं (ऐ रसूल) तुम कहो कि भला अपनी दलील तो पेश करो जो मेरे (ज़माने में) साथ है उनकी किताब (कुरान) और जो लोग मुझ से पहले थे उनकी किताबें (तौरेत वग़ैरह) ये (मौजूद) हैं (उनमें खुदा का शरीक बता दो) बल्कि उनमें से अक्सर तो हक़ (बात) को तो जानते ही नहीं
25وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رَّسُولٍ إِلَّا نُوحِي إِلَيْهِ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدُونِ
तो (जब हक़ का ज़िक्र आता है) ये लोग मुँह फेर लेते हैं और (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले जब कभी कोई रसूल भेजा तो उसके पास ''वही'' भेजते रहे कि बस हमारे सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं तो मेरी इबादत किया करो
26وَقَالُوا اتَّخَذَ الرَّحْمَٰنُ وَلَدًا ۗ سُبْحَانَهُ ۚ بَلْ عِبَادٌ مُّكْرَمُونَ
और (अहले मक्का) कहते हैं कि खुदा ने (फरिश्तों को) अपनी औलाद (बेटियाँ) बना रखा है (हालाँकि) वह उससे पाक व पकीज़ा हैं बल्कि (वह फ़रिश्ते) (खुदा के) मोअज्ज़ि बन्दे हैं
27لَا يَسْبِقُونَهُ بِالْقَوْلِ وَهُم بِأَمْرِهِ يَعْمَلُونَ
ये लोग उसके सामने बढ़कर बोल नहीं सकते और ये लोग उसी के हुक्म पर चलते हैं
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अनुवाद — अल-अंबिया 25

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Tuesday, August 18, 2026

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