अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ (معاني الكلمات):
- مِن قَبْلِكَ – आपसे पहले
- رَسُولٍ – संदेशवाहक (पैगंबर)
- نُوحِي – हम वह्य (प्रकाशना) भेजते हैं
- لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا – मेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं
- فَاعْبُدُونِ – अतः तुम मेरी ही इबादत (पूजा) करो
तफसीर (व्याख्या):
ऐ प्यारे नबी! आप यह जान लें कि हमने आपसे पहले जितने भी रसूल भेजे, उन सबको यही शिक्षा और वह्य दी कि मेरे सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं है। यही वह मूल संदेश है जो आदम से लेकर ईसा तक हर नबी लेकर आया। सभी पैगंबरों का यही एकमात्र धर्म था – अल्लाह की एकता (तौहीद) और उसकी विशेष इबादत।
यह आयत बताती है कि तौहीद (एकेश्वरवाद) ही वह केंद्रीय सत्य है जिस पर पूरी दुनिया की तमाम रसालतें (पैगंबरी मिशन) टिकी हुई हैं। किसी भी नबी ने कभी शिर्क (बहुदेववाद) की शिक्षा नहीं दी, न ही किसी को अल्लाह का साझी बनाया। यही वह आधारशिला है जिस पर इस्लाम की पूरी इमारत खड़ी है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम कोई नया धर्म नहीं, बल्कि वही सच्चा और मूल धर्म है जो हर ज़माने में हर नबी लेकर आया। आज जब दुनिया में कई तरह की गुमराहियाँ और झूठे विश्वास फैले हुए हैं, तो यह आयत हमें सीधे रास्ते पर चलने की ताकत देती है। अल्लाह ने हर नबी को यही सिखाया कि वह अकेला ही इबादत के लायक है – कोई बुत, कोई इंसान, कोई सितारा या कोई और चीज़ उसका साझी नहीं हो सकती।
यह हमारे लिए कितनी बड़ी रहमत है कि हमें सीधा और साफ रास्ता दिखाया गया। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल में अल्लाह की इबादत को अपना निशाना बनाएँ, उसी से मदद माँगें और उसी के आगे सिर झुकाएँ। जब हम यह समझ लेंगे कि सारी कायनात का मालिक सिर्फ एक है, तो हमारा दिल सुकून पाएगा और हमारी ज़िंदगी में बरकत आएगी। यही वह पैगाम है जो हर नबी लेकर आया, और यही वह सच्चाई है जो हमें कामयाबी की राह दिखाती है।
📜 आयत 23-27 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 25
सूरा अल-अंबिया आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (जब हक़ का ज़िक्र आता है) ये लोग मुँह…सूरा आयत 25/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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