अल-अंबिया · 30/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
أَوَلَمْ يَرَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ كَانَتَا رَتْقًا فَفَتَقْنَاهُمَا ۖ وَجَعَلْنَا مِنَ الْمَاءِ كُلَّ شَيْءٍ حَيٍّ ۖ أَفَلَا يُؤْمِنُونَ ۝٣٠
Awalam yaral lazeena kafarooo annas samaawaati wal arda kaanataa ratqan faftaqnaahumaa wa ja`alnaa minal maaa`i kulla shai`in haiyin afalaa yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग काफिर हो बैठे क्या उन लोगों ने इस बात पर ग़ौर नहीं किया कि आसमान और ज़मीन दोनों बस्ता (बन्द) थे तो हमने दोनों को शिगाफ़ता किया (खोल दिया) और हम ही ने जानदार चीज़ को पानी से पैदा किया इस पर भी ये लोग ईमान न लाएँगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रत्क़न (رَتْقًا): आपस में जुड़ा हुआ, मिला हुआ, बंद और सटा हुआ।
  • फ़तक़ना (فَتَقْنَاهُمَا): हमने उन्हें अलग-अलग किया, खोला, फाड़ा।
  • कुल्ला शै'इन हय्यिन (كُلَّ شَيْءٍ حَيٍّ): हर जीवित चीज़।

तफ़सीर:

क्या इनकार करने वालों ने यह नहीं देखा और जाना कि आसमान और ज़मीन दोनों पहले आपस में जुड़े हुए थे, एक ही चीज़ थे, उनके बीच कोई दरार या फासला नहीं था। न आसमान से बारिश होती थी और न ज़मीन से पेड़-पौधे उगते थे। फिर हमने अपनी कुदरत से उन्हें अलग-अलग कर दिया, आसमान को सात आसमान बनाया और ज़मीन को सात ज़मीनें बनाईं। हमने आसमान से बारिश उतारी और ज़मीन से नबातात (वनस्पति) उगाई। और हमने पानी से हर जीवित चीज़ पैदा की — चाहे वह जानवर हो या पौधा — क्योंकि पानी ही हर जीवन का ज़रिया है।

यह कितनी बड़ी निशानी है! यह कुदरत का ऐसा करिश्मा है जो आँखों के सामने है। फिर भी क्या ये लोग ईमान नहीं लाते? क्या वे इन आयतों को देखकर भी अल्लाह की वहदानियत (एकता) को नहीं मानते? क्या वे उस अल्लाह की इबादत नहीं करते जिसने यह सब कुछ बनाया?

यह आयत हमें गहरी सोच की दावत देती है। जब हम इस कायनात (ब्रह्मांड) को देखते हैं — आसमान की बुलंदियाँ, ज़मीन की फ़राख़ी, बारिश का नुज़ूल, और हर तरफ फैली हुई ज़िंदगी — तो हमारा दिल अपने रब की अज़मत (महानता) के सामने झुक जाता है। यह सब कुछ अल्लाह की कुदरत का नतीजा है।

अगर हम सिर्फ़ एक बार ग़ौर करें कि पानी के बिना कोई जीवित चीज़ नहीं रह सकती, और अल्लाह ने पानी को हर जीवन का ज़रिया बनाया है, तो हमें समझ आ जाता है कि यह सब कुछ एक ही क़ादिर (शक्तिशाली) अल्लाह का बनाया हुआ है।

तो फिर ईमान क्यों नहीं लाते? यह आयत हमें बुला रही है कि हम अपनी आँखें खोलें, अपने दिलों को जगाएँ, और उस रब की इबादत करें जिसने यह सब कुछ पैदा किया। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अल्लाह को पहचानें, उस पर ईमान लाएँ, और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। क्योंकि जिसने यह कायनात बनाई, वही हमारी परवरिश करने वाला है, और उसी की राह पर चलने में ही हमारी भलाई है।

🎧 सुनें

📜 आयत 28-32 — अल-अंबिया

28يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يَشْفَعُونَ إِلَّا لِمَنِ ارْتَضَىٰ وَهُم مِّنْ خَشْيَتِهِ مُشْفِقُونَ
जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे है (ग़रज़ सब कुछ) वह (खुदा) जानता है और ये लोग उस शख्स के सिवा जिससे खुदा राज़ी हो किसी की सिफारिश भी नहीं करते और ये लोग खुद उसके ख़ौफ से (हर वक्त) ड़रते रहते हैं
29۞ وَمَن يَقُلْ مِنْهُمْ إِنِّي إِلَٰهٌ مِّن دُونِهِ فَذَٰلِكَ نَجْزِيهِ جَهَنَّمَ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ
और उनमें से जो कोई ये कह दे कि खुदा नहीं (बल्कि) मैं माबूद हूँ तो वह (मरदूद बारगाह हुआ) हम उसको जहन्नुम की सज़ा देंगे और सरकशों को हम ऐसी ही सज़ा देते हैं
30أَوَلَمْ يَرَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ كَانَتَا رَتْقًا فَفَتَقْنَاهُمَا ۖ وَجَعَلْنَا مِنَ الْمَاءِ كُلَّ شَيْءٍ حَيٍّ ۖ أَفَلَا يُؤْمِنُونَ
जो लोग काफिर हो बैठे क्या उन लोगों ने इस बात पर ग़ौर नहीं किया कि आसमान और ज़मीन दोनों बस्ता (बन्द) थे तो हमने दोनों को शिगाफ़ता किया (खोल दिया) और हम ही ने जानदार चीज़ को पानी से पैदा किया इस पर भी ये लोग ईमान न लाएँगे
31وَجَعَلْنَا فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِهِمْ وَجَعَلْنَا فِيهَا فِجَاجًا سُبُلًا لَّعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ
और हम ही ने ज़मीन पर भारी बोझल पहाड़ बनाए ताकि ज़मीन उन लोगों को लेकर किसी तरफ झुक न पड़े और हम ने ही उसमें लम्बे-चौड़े रास्ते बनाए ताकि ये लोग अपने-अपने मंज़िलें मक़सूद को जा पहुँचे
32وَجَعَلْنَا السَّمَاءَ سَقْفًا مَّحْفُوظًا ۖ وَهُمْ عَنْ آيَاتِهَا مُعْرِضُونَ
और हम ही ने आसमान को छत बनाया जो हर तरह महफूज़ है और ये लोग उसकी आसमानी निशानियों से मुँह फेर रहे हैं
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अनुवाद — अल-अंबिया 30

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Tuesday, August 18, 2026

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