अल-अंबिया · 31/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَجَعَلْنَا فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِهِمْ وَجَعَلْنَا فِيهَا فِجَاجًا سُبُلًا لَّعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ ۝٣١
Wa ja`alnaa fil ardi rawaasiya an tameeda bihim wa ja`alnaa feehaa fijaajan subulal la`allahum yahtadoon
📖 हिंदी अर्थ
और हम ही ने ज़मीन पर भारी बोझल पहाड़ बनाए ताकि ज़मीन उन लोगों को लेकर किसी तरफ झुक न पड़े और हम ने ही उसमें लम्बे-चौड़े रास्ते बनाए ताकि ये लोग अपने-अपने मंज़िलें मक़सूद को जा पहुँचे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रवासी (رواسي): पहाड़, जो ज़मीन को जमाए रखते हैं।
  • तमीद (تميد): हिलना-डुलना, लहराना, अस्थिर होना।
  • फ़िजाजन (فجاجًا): चौड़े रास्ते, खुले मार्ग।
  • सुबुलन (سبلًا): रास्ते, सड़कें (यह 'फ़िजाज' की व्याख्या है)।
  • यहतदून (يهتدون): हिदायत पाना, अपनी मंज़िल तक पहुँचना, सही रास्ता पाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपनी क़ुदरत के नमूने पेश करते हुए बताया कि उसने ज़मीन में पहाड़ों को गाड़ दिया है, जैसे खूँटे गाड़े जाते हैं। ये पहाड़ ज़मीन को जमाए रखते हैं ताकि वह अपने रहने वालों को लेकर हिले-डुले नहीं, और न ही उन्हें परेशानी में डाले। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है कि उसने ज़मीन को स्थिर रखा, वरना इंसानों का जीवन असंभव हो जाता।

इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि उसने इन्हीं पहाड़ों में चौड़े रास्ते और खुले मार्ग बनाए, ताकि लोग अपनी ज़रूरतों के लिए एक जगह से दूसरी जगह जा सकें, अपनी रोज़ी-रोज़गार की तलाश कर सकें, और अपने सफ़र में अपनी मंज़िलों तक आसानी से पहुँच सकें। यह रास्ते सिर्फ़ शारीरिक सफ़र के लिए नहीं हैं, बल्कि इनमें अल्लाह की क़ुदरत की निशानियाँ हैं कि इंसान इन पर चलते हुए सोचे कि जिसने ये रास्ते बनाए, वही उसे उसके असली मक़सद — यानी अपने रब की पहचान और उसकी इबादत — तक पहुँचाने वाला है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जिस तरह अल्लाह ने ज़मीन को पहाड़ों से स्थिर किया और उसमें रास्ते बनाए, उसी तरह उसने हमारे लिए हिदायत के रास्ते भी खोले हैं। जो इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करे, वह अपने रब की तरफ़ रुजू करता है और अपनी ज़िंदगी को सही दिशा देता है। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें दुनिया की मंज़िलें तो दीं ही, साथ ही आख़िरत की मंज़िल तक पहुँचने का ज़रिया भी बताया। कितना ख़ूबसूरत है यह इंतज़ाम! हमें चाहिए कि इन नेअमतों पर शुक्र करें और अपने रब की तरफ़ रुजू करें, क्योंकि वही है जो हमें हर मुश्किल से निकालता है और हर भटकाव से बचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 29-33 — अल-अंबिया

29۞ وَمَن يَقُلْ مِنْهُمْ إِنِّي إِلَٰهٌ مِّن دُونِهِ فَذَٰلِكَ نَجْزِيهِ جَهَنَّمَ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ
और उनमें से जो कोई ये कह दे कि खुदा नहीं (बल्कि) मैं माबूद हूँ तो वह (मरदूद बारगाह हुआ) हम उसको जहन्नुम की सज़ा देंगे और सरकशों को हम ऐसी ही सज़ा देते हैं
30أَوَلَمْ يَرَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ كَانَتَا رَتْقًا فَفَتَقْنَاهُمَا ۖ وَجَعَلْنَا مِنَ الْمَاءِ كُلَّ شَيْءٍ حَيٍّ ۖ أَفَلَا يُؤْمِنُونَ
जो लोग काफिर हो बैठे क्या उन लोगों ने इस बात पर ग़ौर नहीं किया कि आसमान और ज़मीन दोनों बस्ता (बन्द) थे तो हमने दोनों को शिगाफ़ता किया (खोल दिया) और हम ही ने जानदार चीज़ को पानी से पैदा किया इस पर भी ये लोग ईमान न लाएँगे
31وَجَعَلْنَا فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِهِمْ وَجَعَلْنَا فِيهَا فِجَاجًا سُبُلًا لَّعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ
और हम ही ने ज़मीन पर भारी बोझल पहाड़ बनाए ताकि ज़मीन उन लोगों को लेकर किसी तरफ झुक न पड़े और हम ने ही उसमें लम्बे-चौड़े रास्ते बनाए ताकि ये लोग अपने-अपने मंज़िलें मक़सूद को जा पहुँचे
32وَجَعَلْنَا السَّمَاءَ سَقْفًا مَّحْفُوظًا ۖ وَهُمْ عَنْ آيَاتِهَا مُعْرِضُونَ
और हम ही ने आसमान को छत बनाया जो हर तरह महफूज़ है और ये लोग उसकी आसमानी निशानियों से मुँह फेर रहे हैं
33وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ كُلٌّ فِي فَلَكٍ يَسْبَحُونَ
और वही वह (क़ादिरे मुत्तलिक़) है जिसने रात और दिन और आफ़ताब और माहताब को पैदा किया कि सब के सब एक (एक) आसमान में पैर कर चक्मर लगा रहे हैं
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अनुवाद — अल-अंबिया 31

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Tuesday, August 18, 2026

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