Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَجَدْنَا: हमने पाया
- آبَاءَنَا: हमारे बाप-दादाओं को
- لَهَا عَابِدِينَ: उन्हीं (मूर्तियों) की पूजा करने वाले
तफ़सीर (व्याख्या):
जब पैग़म्बर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से पूछा कि वे इन मूर्तियों की पूजा क्यों करते हैं, तो उनकी क़ौम का जवाब बेहद सोचनीय और दुखदायी था। उन्होंने कहा: "हमने अपने बाप-दादाओं को इन्हीं की पूजा करते हुए पाया है, इसलिए हम भी उन्हीं की पूजा करते हैं।"
यह जवाब दरअसल उनकी बौद्धिक दिवालियेपन और अंधी परंपरा की पैरवी को दर्शाता है। उनके पास न तो कोई तर्क था, न कोई प्रमाण, और न ही कोई ठोस आधार। उन्होंने केवल यह कहा कि हमने अपने पूर्वजों को ऐसा करते देखा है, इसलिए हम भी वही करते हैं। यह एक ऐसी ग़लती है जो इंसान को सत्य की खोज से दूर कर देती है और उसे अंधी नक़ल का आदी बना देती है।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि सच्चाई की पहचान के लिए अकेले परंपरा और पूर्वजों की नक़ल काफ़ी नहीं है। हर इंसान पर फ़र्ज़ है कि वह अपनी अक़्ल और समझ से काम ले, और जो बातें उसे विरासत में मिली हैं, उन्हें क़ुरआन और सुन्नत की कसौटी पर परखे। अगर वह सच्चाई के अनुरूप हैं तो उन्हें अपनाए, वरना उन्हें छोड़ दे।
इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि इस्लाम एक ऐसा दीन है जो अक़्ल और दलील पर आधारित है। इस्लाम ने हमें अंधी नक़ल से आज़ादी दी है और हमें सोचने, समझने और सत्य की खोज करने की तरग़ीब दी है। अल्लाह तआला ने क़ुरआन में कई जगहों पर लोगों से कहा है कि वे सोचें और विचार करें। यही वह चीज़ है जो इंसान को जहालत से निकालकर रोशनी की तरफ़ ले जाती है।
आज भी बहुत से लोग अपने बुज़ुर्गों की राह पर चलते हुए ग़लत रस्मों और रिवाजों में डूबे हुए हैं, बिना यह जाने कि वे सही हैं या ग़लत। यह आयत उन्हें जगाने की कोशिश करती है कि सच्चाई की पहचान करो, उसे अपनाओ, और जो ग़लत है उसे छोड़ दो, चाहे वह कितने ही बड़े लोगों से जुड़ी हुई क्यों न हो।
📜 आयत 51-55 — सूरा अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 53
सूरा अल-अंबिया आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग बोले (और तो कुछ नहीं जानते मगर) अपने…सूरा आयत 53/112 — सूरा अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंबिया सुनें, सूरा अल-अंबिया अनुवाद, सूरा अल-अंबिया mp3, सूरा अल-अंबिया pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंबिया
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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