अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ضَلَالٍ مُبِينٍ: स्पष्ट और प्रत्यक्ष गुमराही, जिसमें कोई संदेह न हो।
तफ़सीर:
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: "निश्चय ही तुम और तुम्हारे पूर्वज स्पष्ट गुमराही में थे।" यह वह समय था जब उन्होंने अपनी क़ौम को मूर्तियों की पूजा करते देखा और उनसे पूछा कि ये मूर्तियाँ क्या हैं। जब क़ौम ने उत्तर दिया कि हमने अपने बाप-दादाओं को इन्हीं की पूजा करते पाया है, तो इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में बता दिया कि यह रास्ता बिल्कुल गलत है।
इस आयत में हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने दो बातें स्पष्ट कीं:
- तुम और तुम्हारे पूर्वज दोनों गुमराह थे — उन्होंने सिर्फ़ वर्तमान पीढ़ी को ही नहीं बल्कि उनके पूर्वजों को भी गुमराह क़रार दिया, क्योंकि सत्य की कसौटी पूर्वजों की नक़ल नहीं बल्कि अक़्ल और वही (ईश्वरीय संदेश) है।
- यह गुमराही "स्पष्ट" थी — यानी यह कोई जटिल या अस्पष्ट मामला नहीं था कि लोग समझ न पाएं। बल्कि यह बिल्कुल ज़ाहिर था कि पत्थर की मूर्तियाँ जो न कुछ सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, न किसी को नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न फ़ायदा — वे पूजा के योग्य नहीं हैं।
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अंधी नक़ल से बचना चाहिए। सिर्फ़ इसलिए कि हमारे बुज़ुर्गों ने कोई रास्ता अपनाया था, वह सही नहीं हो जाता। हमें हमेशा सत्य को अक़्ल और वही की रोशनी में परखना चाहिए। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का यह तरीक़ा हमारे लिए एक आदर्श है कि उन्होंने बड़ी हिम्मत और स्पष्टता से अपनी क़ौम को सच बताया, चाहे वह उनके बुज़ुर्गों की परंपरा के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सच्चाई को कहने में झिझक नहीं होनी चाहिए। अगर हमारे समाज में कोई गलत रिवाज़ या अंधविश्वास है, तो हमें उसे स्पष्ट शब्दों में बताना चाहिए, जैसा कि हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने किया। यही ईमान की मज़बूती और सच्चाई के प्रति समर्पण की निशानी है।
📜 आयत 52-56 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 54
सूरा अल-अंबिया आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इबराहीम ने कहा यक़ीनन तुम भी और तुम्हारे बुर्जुग़ भी…सूरा आयत 54/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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