अल-अंबिया · 54/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
قَالَ لَقَدْ كُنتُمْ أَنتُمْ وَآبَاؤُكُمْ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ ۝٥٤
Qaala laqad kuntum antum wa aabaaa`ukum fee dalaalim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
इबराहीम ने कहा यक़ीनन तुम भी और तुम्हारे बुर्जुग़ भी खुली हुईगुमराही में पड़े हुए थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضَلَالٍ مُبِينٍ: स्पष्ट और प्रत्यक्ष गुमराही, जिसमें कोई संदेह न हो।

तफ़सीर:

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: "निश्चय ही तुम और तुम्हारे पूर्वज स्पष्ट गुमराही में थे।" यह वह समय था जब उन्होंने अपनी क़ौम को मूर्तियों की पूजा करते देखा और उनसे पूछा कि ये मूर्तियाँ क्या हैं। जब क़ौम ने उत्तर दिया कि हमने अपने बाप-दादाओं को इन्हीं की पूजा करते पाया है, तो इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में बता दिया कि यह रास्ता बिल्कुल गलत है।

इस आयत में हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने दो बातें स्पष्ट कीं:

  1. तुम और तुम्हारे पूर्वज दोनों गुमराह थे — उन्होंने सिर्फ़ वर्तमान पीढ़ी को ही नहीं बल्कि उनके पूर्वजों को भी गुमराह क़रार दिया, क्योंकि सत्य की कसौटी पूर्वजों की नक़ल नहीं बल्कि अक़्ल और वही (ईश्वरीय संदेश) है।
  2. यह गुमराही "स्पष्ट" थी — यानी यह कोई जटिल या अस्पष्ट मामला नहीं था कि लोग समझ न पाएं। बल्कि यह बिल्कुल ज़ाहिर था कि पत्थर की मूर्तियाँ जो न कुछ सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, न किसी को नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न फ़ायदा — वे पूजा के योग्य नहीं हैं।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अंधी नक़ल से बचना चाहिए। सिर्फ़ इसलिए कि हमारे बुज़ुर्गों ने कोई रास्ता अपनाया था, वह सही नहीं हो जाता। हमें हमेशा सत्य को अक़्ल और वही की रोशनी में परखना चाहिए। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का यह तरीक़ा हमारे लिए एक आदर्श है कि उन्होंने बड़ी हिम्मत और स्पष्टता से अपनी क़ौम को सच बताया, चाहे वह उनके बुज़ुर्गों की परंपरा के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सच्चाई को कहने में झिझक नहीं होनी चाहिए। अगर हमारे समाज में कोई गलत रिवाज़ या अंधविश्वास है, तो हमें उसे स्पष्ट शब्दों में बताना चाहिए, जैसा कि हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने किया। यही ईमान की मज़बूती और सच्चाई के प्रति समर्पण की निशानी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 52-56 — अल-अंबिया

52إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ مَا هَٰذِهِ التَّمَاثِيلُ الَّتِي أَنتُمْ لَهَا عَاكِفُونَ
जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा ये मूर्ते जिनकी तुम लोग मुजाबिरी करते हो आख़िर क्या (बला) है
53قَالُوا وَجَدْنَا آبَاءَنَا لَهَا عَابِدِينَ
वह लोग बोले (और तो कुछ नहीं जानते मगर) अपने बडे बूढ़ों को इनही की परसतिश करते देखा है
54قَالَ لَقَدْ كُنتُمْ أَنتُمْ وَآبَاؤُكُمْ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
इबराहीम ने कहा यक़ीनन तुम भी और तुम्हारे बुर्जुग़ भी खुली हुईगुमराही में पड़े हुए थे
55قَالُوا أَجِئْتَنَا بِالْحَقِّ أَمْ أَنتَ مِنَ اللَّاعِبِينَ
वह लोग कहने लगे तो क्या तुम हमारे पास हक़ बात लेकर आए हो या तुम भी (यूँ ही) दिल्लगी करते हो
56قَالَ بَل رَّبُّكُمْ رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ الَّذِي فَطَرَهُنَّ وَأَنَا عَلَىٰ ذَٰلِكُم مِّنَ الشَّاهِدِينَ
इबराहीम ने कहा मज़ाक नहीं ठीक कहता हूँ कि तुम्हारे माबूद व बुत नहीं बल्कि तुम्हारा परवरदिगार आसमान व ज़मीन का मालिक है जिसने उनको पैदा किया और मैं खुद इस बात का तुम्हारे सामने गवाह हूँ
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अनुवाद — अल-अंबिया 54

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सूरा आयत 54/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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