अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तमासील (تماثيل): मूर्तियाँ, बुत, वे नक्काशीदार आकार जिन्हें लोग पूजते थे।
- आकिफ़ून (عاكفون): मुक़ीम रहने वाले, लगातार इबादत में लगे रहने वाले, किसी चीज़ से चिपके रहने वाले।
तफ़सीर:
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपने बाप आज़र और अपनी क़ौम से फ़रमाया: "ये मूर्तियाँ क्या हैं जिनके सामने तुम लोग इबादत के लिए मुक़ीम रहते हो? तुमने इन्हें अपने हाथों से बनाया है, फिर इन्हें अपना माबूद बना लिया। ये न तो कोई नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न ही कोई फ़ायदा दे सकती हैं। तुम इनके आगे झुकते हो, इनके सामने अपनी हाजतें रखते हो, और इन्हीं की इबादत में लगे रहते हो। क्या ये अक़्ल की बात है कि इंसान अपने हाथ से बनी चीज़ को अपना रब बना ले?"
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का यह सवाल उनके दिल की गहराई से निकला था। वे अपनी क़ौम को अंधेरे से निकालकर रोशनी की तरफ़ लाना चाहते थे। उन्होंने इस सवाल के ज़रिए अपनी क़ौम के सामने एक ऐसा आईना रखा जिसमें उन्हें अपनी ग़लती साफ़ नज़र आए। यह सवाल सिर्फ़ इस्तेहज़ा नहीं था, बल्कि एक दावत थी — दावत तौहीद की, दावत अक़्ल और फ़ितरत की तरफ़।
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने अक़्ल का इस्तेमाल करना चाहिए और उन चीज़ों की पूजा नहीं करनी चाहिए जो ख़ुद बनाई हुई हों। असली इबादत सिर्फ़ उस ख़ालिक़ की है जिसने इस कायनात को बनाया, जो सुनता है, देखता है और हर चीज़ पर क़ादिर है। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का यह अंदाज़ हमारे लिए एक नमूना है कि हमें अपने घर और समाज में अल्लाह की इबादत की दावत प्यार और हिकमत से देनी चाहिए, और बुत-परस्ती — चाहे वह पत्थर की मूर्तियाँ हों या दुनिया की चीज़ों की मोहब्बत — से बचना चाहिए। अल्लाह ही वह हस्ती है जो सच्ची इबादत के क़ाबिल है, और उसी की तरफ़ लौटना है।
📜 आयत 50-54 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 52
सूरा अल-अंबिया आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से…सूरा आयत 52/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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