Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- عَلَىٰ أَعْيُنِ النَّاسِ: लोगों के सामने, सबके देखते हुए, खुलेआम।
- يَشْهَدُونَ: गवाह बनें, देखें और सुनें।
तफसीर:
जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने उन मूर्तियों को तोड़ दिया, जिन्हें उनकी क़ौम पूजती थी, और इसका सबूत उनके पास मौजूद था, तो उनके सरदारों और बुज़ुर्गों ने आपस में मशवरा किया। उन्होंने कहा: "इब्राहीम को लोगों के सामने, सबके देखते हुए लाओ, ताकि वे उसके सामने उसका इल्ज़ाम साबित कर सकें और लोग गवाह बनें कि उसने हमारे देवताओं के साथ यह हरकत की है।" उनका मक़सद यह था कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के ख़िलाफ़ सबूत मज़बूत हो जाए और लोगों के सामने उसे रुसवा किया जा सके, ताकि उसे सज़ा देना आसान हो जाए और कोई उसके पक्ष में खड़ा न हो सके।
यह उनकी चालाकी थी, लेकिन अल्लाह तआला ने इसी को इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के लिए दलील का ज़रिया बनाया। जब वे उसे सबके सामने लाए, तो इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें जवाब दिया: "बल्कि उनके बड़े ने यह किया है, उनसे पूछो, अगर वे बोलते हैं।" इस तरह अल्लाह ने अपने नबी की ज़ुबान से सच्चाई को ज़ाहिर किया और उनकी चाल को नाकाम कर दिया।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता। कुफ्फार चाहे कितनी भी साज़िशें कर लें, अल्लाह का फैसला हमेशा सच्चाई के पक्ष में होता है। जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसे हर मुश्किल से निकालने का रास्ता दिखाता है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सच्चाई के लिए खड़ा होना और अकेले होने पर भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफाज़त करता है और उनकी मदद के लिए ऐसे हालात पैदा करता है जिनका अंदाज़ा कोई नहीं लगा सकता।
यह वाकया हमारे लिए नमूना है कि बातिल (झूठ) चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसका अंजाम हमेशा ज़िल्लत और नाकामी है, और हक़ (सच्चाई) चाहे कितनी भी कमज़ोर क्यों न दिखे, उसकी मदद अल्लाह करता है। इसलिए हमें हमेशा सच्चाई पर क़ायम रहना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
📜 आयत 59-63 — सूरा अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 61
सूरा अल-अंबिया आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : लोगों ने कहा तो अच्छा उसको सब लोगों के सामने…सूरा आयत 61/112 — सूरा अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंबिया सुनें, सूरा अल-अंबिया अनुवाद, सूरा अल-अंबिया mp3, सूरा अल-अंबिया pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंबिया
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


