अल-अंबिया · 62/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
قَالُوا أَأَنتَ فَعَلْتَ هَٰذَا بِآلِهَتِنَا يَا إِبْرَاهِيمُ ۝٦٢
Qaalooo `a-anta fa`alta haazaa bi aalihatinaa yaaa Ibraaheem
📖 हिंदी अर्थ
(ग़रज़ इबराहीम आए) और लोगों ने उनसे पूछा कि क्यों इबराहीम क्या तुमने माबूदों के साथ ये हरकत की है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • आलिहतिना: हमारे पूज्यों (देवताओं) के साथ — यहाँ आशय उनके बुतों (मूर्तियों) से है।
  • फ़अल्त: तूने किया — अर्थात यह काम तूने अंजाम दिया।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम के बुतों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और कुल्हाड़ी बड़े बुत के गले में डाल दी, तो क़ौम के लोगों ने जब यह मंज़र देखा तो वे हैरान और ग़ुस्से से भर गए। उन्होंने हज़रत इब्राहीम को पकड़कर लाया और उनसे पूछा: "क्या तूने ही हमारे इन पूज्यों (बुतों) के साथ यह हरकत की है, ऐ इब्राहीम?"

यह सवाल उन्होंने इंकार और अंदाज़े से पूछा, क्योंकि वे जानते थे कि इब्राहीम अलैहिस्सलाम ही हैं जो इन बुतों की पूजा के ख़िलाफ़ बोलते रहे हैं और उन्हें बेवजह और बेकार बताते रहे हैं। उन्होंने यह सवाल इसलिए किया ताकि वे उन्हें जवाबदेह ठहरा सकें और उनके ख़िलाफ़ सबूत जुटा सकें।

इस आयत में हमें हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की दिलेरी और सच्चाई पर क़ायम रहने का सबक मिलता है। वे अकेले थे, लेकिन सच्चाई पर डटे रहे। उन्होंने झूठ और बुतपरस्ती के खिलाफ़ आवाज़ उठाई, चाहे उन्हें अकेले ही क्यों न पड़ना पड़े। यह हमें सिखाता है कि सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को अकेलेपन का डर नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह उनके साथ होता है।

यह भी याद रखने की बात है कि हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने बुतों को तोड़कर यह साबित कर दिया कि ये बुत न तो अपनी रक्षा कर सकते हैं और न ही किसी को नुकसान पहुँचा सकते हैं। यह एक ज़बरदस्त दलील थी उन लोगों के लिए जो निर्जीव चीज़ों की पूजा करते थे। अल्लाह तआला हमें भी सच्चाई पर क़ायम रहने और बातिल के खिलाफ़ आवाज़ उठाने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 60-64 — अल-अंबिया

60قَالُوا سَمِعْنَا فَتًى يَذْكُرُهُمْ يُقَالُ لَهُ إِبْرَاهِيمُ
(कुछ लोग) कहने लगे हमने एक नौजवान को जिसको लोग इबराहीम कहते हैं उन बुतों का (बुरी तरह) ज़िक्र करते सुना था
61قَالُوا فَأْتُوا بِهِ عَلَىٰ أَعْيُنِ النَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَشْهَدُونَ
लोगों ने कहा तो अच्छा उसको सब लोगों के सामने (गिरफ्तार करके) ले आओ ताकि वह (जो कुछ कहें) लोग उसके गवाह रहें
62قَالُوا أَأَنتَ فَعَلْتَ هَٰذَا بِآلِهَتِنَا يَا إِبْرَاهِيمُ
(ग़रज़ इबराहीम आए) और लोगों ने उनसे पूछा कि क्यों इबराहीम क्या तुमने माबूदों के साथ ये हरकत की है
63قَالَ بَلْ فَعَلَهُ كَبِيرُهُمْ هَٰذَا فَاسْأَلُوهُمْ إِن كَانُوا يَنطِقُونَ
इबराहीम ने कहा बल्कि ये हरकत इन बुतों (खुदाओं) के बड़े (खुदा) ने की है तो अगर ये बुत बोल सकते हों तो उनही से पूछ देखो
64فَرَجَعُوا إِلَىٰ أَنفُسِهِمْ فَقَالُوا إِنَّكُمْ أَنتُمُ الظَّالِمُونَ
इस पर उन लोगों ने अपने जी में सोचा तो (एक दूसरे से) कहने लगे बेशक तुम ही लोग खुद बर सरे नाहक़ हो
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अनुवाद — अल-अंबिया 62

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Tuesday, August 18, 2026

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