अल-अंबिया · 81/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
وَلِسُلَيْمَانَ الرِّيحَ عَاصِفَةً تَجْرِي بِأَمْرِهِ إِلَى الْأَرْضِ الَّتِي بَارَكْنَا فِيهَا ۚ وَكُنَّا بِكُلِّ شَيْءٍ عَالِمِينَ ۝٨١
Wa li Sulaimaanar reeha `aasifatan tajree bi amriheee ilal ardil latee baaraknaa feehaa; wa kunnaa bikulli shai`in `aalimeen
📖 हिंदी अर्थ
और (हम ही ने) बड़े ज़ोरों की हवा को सुलेमान का (ताबेए कर दिया था) कि वह उनके हुक्म से इस सरज़मीन (बैतुलमुक़द्दस) की तरफ चला करती थी जिसमें हमने तरह-तरह की बरकतें अता की थी और हम तो हर चीज़ से खूब वाक़िफ़ थे (और) है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • असिफ़ा (عَاصِفَةً): तेज़ हवा जो ज़ोर से चलती है।
  • तजरी (تَجْرِي): चलती है, बहती है।
  • अल-अर्द अल्लती बारकना फ़ीहा (الْأَرْضِ الَّتِي بَارَكْنَا فِيهَا): वह धरती जिसमें हमने बरकतें रखीं — यानी शाम (फ़िलिस्तीन/बैतुल मुक़द्दस) की धरती।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) पर जो बड़ी नेमतें और मोजिज़े इनायत फ़रमाए, उनमें से एक यह भी थी कि उन्होंने तेज़ चलने वाली हवा को उनके अधीन कर दिया। वह हवा उनके हुक्म से चलती थी — जब वह चाहते, वह उन्हें और उनके साथियों को उठाकर उस धरती तक ले जाती जहाँ अल्लाह ने बरकतें रखी थीं — यानी शाम (सीरिया, फ़िलिस्तीन) का इलाक़ा, जो बैतुल मुक़द्दस और अनगिनत नेमतों की वजह से बरकत वाली ज़मीन है। यह सब कुछ अल्लाह की क़ुदरत से था, और अल्लाह हर चीज़ का पूरा इल्म रखता है — उसके इल्म से कोई चीज़ पोशीदा नहीं, न ज़मीन की, न आसमान की, न हवा की, न इंसान के दिल की। वह सब कुछ जानता है और अपनी हिकमत के मुताबिक हर काम करता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत और अपने नेक बंदों पर उसकी ख़ास मेहरबानी का एहसास कराती है। जिस अल्लाह ने हवा जैसी बे-इंतहा ताक़त वाली चीज़ को अपने नबी के हुक्म के ताबे कर दिया, वही अल्लाह आज भी हर चीज़ पर क़ादिर है। अगर हम उसकी इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें, तो वह हमारी ज़िंदगी में भी ऐसी तदबीरें और सहूलतें पैदा कर सकता है जिनका हमने सोचा भी न हो। यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के करीब रहने वाले बंदों को दुनिया की ताक़तें भी अपने हुक्म से चलाने की तौफ़ीक़ मिलती है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इताअत को अपनाएँ और उसकी रहमतों के तलबगार बनें — क्योंकि वही है जो हर चीज़ का इल्म रखता है और हर मुश्किल को आसान कर सकता है।



📜 आयत 79-83 — सूरा अल-अंबिया

79فَفَهَّمْنَاهَا سُلَيْمَانَ ۚ وَكُلًّا آتَيْنَا حُكْمًا وَعِلْمًا ۚ وَسَخَّرْنَا مَعَ دَاوُودَ الْجِبَالَ يُسَبِّحْنَ وَالطَّيْرَ ۚ وَكُنَّا فَاعِلِينَ
तो हमने सुलेमान को (इसका सही फ़ैसला समझा दिया) और (यूँ तो) सबको हम ही ने फहमे सलीम और इल्म अता किया और हम ही ने पहाड़ों को दाऊद का ताबेए बना दिया था कि उनके साथ (खुदा की) तस्बीह किया करते थे और परिन्दों को (भी ताबेए कर दिया था) और हम ही (ये अज़ाब) किया करते थे
80وَعَلَّمْنَاهُ صَنْعَةَ لَبُوسٍ لَّكُمْ لِتُحْصِنَكُم مِّن بَأْسِكُمْ ۖ فَهَلْ أَنتُمْ شَاكِرُونَ
और हम ही ने उनको तुम्हारी जंगी पोशिश (ज़िराह) का बनाना सिखा दिया ताकि तुम्हें (एक दूसरे के) वार से बचाए तो क्या तुम (अब भी) उसके शुक्रगुज़ार बनोगे
81وَلِسُلَيْمَانَ الرِّيحَ عَاصِفَةً تَجْرِي بِأَمْرِهِ إِلَى الْأَرْضِ الَّتِي بَارَكْنَا فِيهَا ۚ وَكُنَّا بِكُلِّ شَيْءٍ عَالِمِينَ
और (हम ही ने) बड़े ज़ोरों की हवा को सुलेमान का (ताबेए कर दिया था) कि वह उनके हुक्म से इस सरज़मीन (बैतुलमुक़द्दस) की तरफ चला करती थी जिसमें हमने तरह-तरह की बरकतें अता की थी और हम तो हर चीज़ से खूब वाक़िफ़ थे (और) है
82وَمِنَ الشَّيَاطِينِ مَن يَغُوصُونَ لَهُ وَيَعْمَلُونَ عَمَلًا دُونَ ذَٰلِكَ ۖ وَكُنَّا لَهُمْ حَافِظِينَ
और जिन्नात में से जो लोग (समन्दर में) ग़ोता लगाकर (जवाहरात निकालने वाले) थे और उसके अलावा और काम भी करते थे (सुलेमान का ताबेए कर दिया था) और हम ही उनके निगेहबान थे
83۞ وَأَيُّوبَ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ
(कि भाग न जाएँ) और (ऐ रसूल) अय्यूब (का क़िस्सा याद करो) जब उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (ख़ुदा वन्द) बीमारी तो मेरे पीछे लग गई है और तू तो सब रहम करने वालोंसे (बढ़ कर है मुझ पर तरस खा)
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
81आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 81

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Sunday, October 4, 2026

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