अल-हज · 61/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَأَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ بَصِيرٌ ۝٦١
Zaalika bi annal laaha yoolijul laila fin nahaari wa yoolijun nahaara fil laili wa annal laaha Samee`um Baseer
📖 हिंदी अर्थ
बेशक खुदा बड़ा माफ करने वाला बख़शने वाला है ये (मदद) इस वजह से दी जाएगी कि खुदा (बड़ा क़ादिर है वही) तो रात को दिन में दाख़िल करता है और दिन को रात में दाख़िल करता है और इसमें भी शक नहीं कि खुदा सब कुछ जानता है

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अनुवाद — Tafsir

यह आयत अल्लाह तआला की क़ुदरत और उसके दीन की सच्चाई को बयान करती है। पहले कुछ अहम शब्दों के मानी समझ लीजिए:

  • يُولِجُ (यूलिजु): दाखिल करना, डालना, एक चीज़ को दूसरी में मिलाना या बदलना।
  • اللَّيْلَ (अल-लैल): रात, अंधेरा।
  • النَّهَارَ (अन-नहार): दिन, उजाला।
  • سَمِيعٌ (समीउन): सब कुछ सुनने वाला।
  • بَصِيرٌ (बसीरुन): सब कुछ देखने वाला।

अब आयत का विस्तृत तफ़सीर मुलाहिज़ा फ़रमाइए:

यह वो बात है जो अल्लाह तआला ने अपने बंदों को सिखाई है कि जो क़ानून और हिदायात उसने दिए हैं, वो सब अदल और हिकमत पर आधारित हैं। यह इसलिए है कि अल्लाह ही सच्चा मालिक है, और उसकी क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है। उसकी क़ुदरत की सबसे बड़ी निशानी यह है कि वह रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखिल करता है। यानी जब सूरज डूबता है तो दिन की रोशनी खत्म होकर रात का अंधेरा छा जाता है, और जब सूरज निकलता है तो रात का अंधेरा मिटकर दिन का उजाला फैल जाता है। इस तरह अल्लाह एक को दूसरे में बदलता रहता है, कभी दिन लंबा होता है और रात छोटी, कभी रात लंबी होती है और दिन छोटा। यह नियमित बदलाव उसी की क़ुदरत का नतीजा है।

और अल्लाह तआला सब कुछ सुनने वाला है — हर बंदे की दुआ, हर ज़ुबान की आवाज़, हर दिल की पुकार उस तक पहुँचती है। वह सब कुछ देखने वाला है — हर अमल, हर नीयत, हर छोटी-बड़ी चीज़ उसकी नज़र से ओझल नहीं है। जो लोग उस पर भरोसा करते हैं और उसके दीन की मदद करते हैं, अल्लाह उनकी मदद करता है, क्योंकि वह जानता है कि कौन सच्चा है और कौन झूठा, कौन मज़लूम है और कौन ज़ालिम। यह आयत मोमिनों के दिलों को तसल्ली देती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कोई ताकत टिक नहीं सकती। जिस तरह वह रात और दिन को बदलता है, उसी तरह वह हालात को भी बदल सकता है — मुसीबत को राहत में, कमज़ोरी को ताकत में, और हार को जीत में।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें, उसकी क़ुदरत पर यक़ीन करें, और याद रखें कि वह हमारी हर बात सुनता है और हर काम देखता है। जो लोग उसकी राह में सब्र करते हैं, उनके लिए उसकी मदद ज़रूर आती है। यह ईमान की ताकत है कि इंसान यक़ीन करे कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है — चाहे वह रात और दिन का बदलाव हो या इंसानों के हालात का। यही वजह है कि अल्लाह ने अपने बंदों को अदल और इंसाफ़ का हुक्म दिया है, और ज़ालिमों को सज़ा का डर दिखाया है। मोमिन के लिए यह आयत एक प्यारा पैग़ाम है कि अल्लाह की नज़र में उसकी कोई भी कोशिश, कोई भी दुआ, कोई भी आँसू बेकार नहीं जाता। अल्लाह सब सुनता है, सब देखता है, और सबका हिसाब रखता है।



📜 आयत 59-63 — अल-हज

59لَيُدْخِلَنَّهُم مُّدْخَلًا يَرْضَوْنَهُ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَعَلِيمٌ حَلِيمٌ
और बेशक तमाम रोज़ी देने वालों में खुदा ही सबसे बेहतर है वह उन्हें ज़रूर ऐसी जगह (बेहिश्त) पहुँचा देगा जिससे वह निहाल हो जाएँगे
60۞ ذَٰلِكَ وَمَنْ عَاقَبَ بِمِثْلِ مَا عُوقِبَ بِهِ ثُمَّ بُغِيَ عَلَيْهِ لَيَنصُرَنَّهُ اللَّهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌ
और खुदा तो बेशक बड़ा वाक़िफकार बुर्दवार है यही (ठीक) है और जो शख्स (अपने दुश्मन को) उतना ही सताए जितना ये उसके हाथों से सताया गया था उसके बाद फिर (दोबारा दुशमन की तरफ़ से) उस पर ज्यादती की जाए तो खुदा उस मज़लूम की ज़रूर मदद करेगा
61ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَأَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ بَصِيرٌ
बेशक खुदा बड़ा माफ करने वाला बख़शने वाला है ये (मदद) इस वजह से दी जाएगी कि खुदा (बड़ा क़ादिर है वही) तो रात को दिन में दाख़िल करता है और दिन को रात में दाख़िल करता है और इसमें भी शक नहीं कि खुदा सब कुछ जानता है
62ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ هُوَ الْحَقُّ وَأَنَّ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِ هُوَ الْبَاطِلُ وَأَنَّ اللَّهَ هُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ
(और) इस वजह से (भी) कि यक़ीनन खुदा ही बरहक़ है और उसके सिवा जिनको लोग (वक्ते मुसीबत) पुकारा करते हैं (सबके सब) बातिल हैं और (ये भी) यक़ीनी (है कि) खुदा ही (सबसे) बुलन्द मर्तबा बुर्जुग़ है
63أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَتُصْبِحُ الْأَرْضُ مُخْضَرَّةً ۗ إِنَّ اللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٌ
अरे क्या तूने इतना भी नहीं देखा कि खुदा ही आसमान से पानी बरसाता है तो ज़मीन सर सब्ज़ (व शादाब) हो जाती है बेशक खुदा (बन्दों के हाल पर) बड़ा मेहरबान वाक़िफ़कार है
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अनुवाद — अल-हज 61

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Tuesday, August 18, 2026

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