Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- جَزَيْتُهُمُ — मैंने उन्हें बदला दिया, उन्हें पुरस्कृत किया।
- بِمَا صَبَرُوا — उनके धैर्य के कारण, उनके सब्र की वजह से।
- الْفَائِزُونَ — कामयाब होने वाले, सफलता पाने वाले, अपनी मंज़िल को पाने वाले।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नेक और मोमिन बंदों के बारे में फ़रमा रहा है कि आज — यानी क़ियामत के दिन — मैंने उन्हें उनके सब्र का पूरा बदला दे दिया है। यह वही लोग हैं जिन्होंने दुनिया में ईमान की राह पर चलते हुए मुश्किलों, तकलीफों और अज़िय्यतों को सहा। उन्होंने अल्लाह की इबादत पर साबित क़दम रहे, उसकी ताअत (आज्ञा) का पालन किया, और दुश्मनों के ज़ुल्म व सितम को बर्दाश्त किया। उन्होंने हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखा और उसके वादे पर यक़ीन किया।
आज उसी सब्र का नतीजा है कि अल्लाह ने उन्हें जन्नत की नेमतें अता कर दीं, उन्हें हर दुख और रंज से पाक कर दिया, और उन्हें वह कामयाबी दी जो असल कामयाबी है। यह फ़ौज़ (कामयाबी) सिर्फ़ उन्हीं का हिस्सा है जिन्होंने दुनिया में सब्र किया। यानी जिसने दुनिया में सब्र किया, उसने आख़िरत में कामयाबी पाई। यह अल्लाह का इन्साफ़ और उसका फ़ज़ल दोनों है — इन्साफ़ इसलिए कि उन्होंने सब्र किया, और फ़ज़ल इसलिए कि अल्लाह ने उन्हें ऐसा बदला दिया जो उनके आमाल से कहीं बढ़कर है।
दावती पहलू:
यह आयत हर उस मुसलमान के लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है जो आज किसी मुश्किल, बीमारी, ग़रीबी, ज़ुल्म या तकलीफ़ में है। अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि तुम्हारा सब्र ज़ाया नहीं जाएगा। जितनी देर तक तुम सब्र करोगे, उतना ही बड़ा इनाम तुम्हारे लिए तैयार हो रहा है। यह दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी है, और आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा की है। जो आज की छोटी सी तकलीफ़ सह लेता है, वह कल की हमेशा की खुशियों का हक़दार बन जाता है। अल्लाह ने वादा किया है कि सब्र करने वालों को उसका पूरा-पूरा बदला मिलेगा — बिना किसी कमी के। तो आओ, हम भी अपनी ज़िंदगी में सब्र को अपनाएँ, अल्लाह की राह पर जुड़े रहें, और उस कामयाबी के हक़दार बनें जो कभी ख़त्म नहीं होती — यानी जन्नत की हमेशा की नेमतें।
📜 आयत 109-113 — सूरा अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 111
सूरा अल-मोमिनुन आयत 111 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मैने आज उनको उनके सब्र का अच्छा बदला दिया कि…सूरा आयत 111/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 109–113. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मोमिनुन
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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