अल-मोमिनुन · 110/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
فَاتَّخَذْتُمُوهُمْ سِخْرِيًّا حَتَّىٰ أَنسَوْكُمْ ذِكْرِي وَكُنتُم مِّنْهُمْ تَضْحَكُونَ ۝١١٠
Fattakhaztumoohum sikhriyyan hattaaa ansawkum zikree wa kuntum minhum tadhakoon
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम लोगों ने उन्हें मसखरा बना लिया-यहाँ तक कि (गोया) उन लोगों ने तुम से मेरी याद भुला दी और तुम उन पर (बराबर) हँसते रहे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • सिख़्रिय्यन: मज़ाक़ उड़ाना, उपहास करना
  • अंसकुम: तुम्हें भुला दिया
  • ज़िक्री: मेरी याद (अल्लाह की याद)
  • तज़्हकून: हँसते थे

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों को सम्बोधित कर रहे हैं जिन्होंने नबियों और उनके सच्चे पैरोकारों का मज़ाक़ उड़ाया। यह उस दिन की बात है जब ये लोग अपनी उस हालत को याद करेंगे और उन्हें अपनी शर्मनाक कारस्तानियाँ याद आएँगी।

अल्लाह फ़रमाता है कि तुमने उन ईमानवालों को, जो अल्लाह की इबादत करते थे और सच्चाई की तरफ़ बुलाते थे, अपना मज़ाक़ बना लिया था। तुम उन पर हँसते थे, उन्हें नीचा दिखाते थे और उनके ईमान का उपहास करते थे। यहाँ तक कि यह मज़ाक़ उड़ाना और उनका उपहास करना तुम्हारी आदत बन गई और इसी में इतने मशगूल हो गए कि अल्लाह की याद ही भूल गए। तुम्हारा यह कृत्य इतना बढ़ गया कि उसने तुम्हारे दिलों से अल्लाह का ज़िक्र ही मिटा दिया।

और यही वजह बनी कि तुम सच्चाई को क़बूल न कर सके और अपनी गुमराही पर ही डटे रहे। तुम उन मोमिनीन पर हँसते थे, उन्हें बेवक़ूफ़ समझते थे, लेकिन असल बेवक़ूफ़ी तुम्हारी थी कि तुमने अल्लाह की राह को छोड़कर बातिल को अपना लिया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ देती है। अल्लाह के नेक बन्दों का मज़ाक़ उड़ाना, उन्हें नीचा दिखाना और उन पर हँसना कितनी बड़ी ग़लती है। यह कृत्य इंसान को अल्लाह की याद से दूर कर देता है और दिल को सख़्त कर देता है।

इसके विपरीत, अल्लाह के नेक बन्दों से मुहब्बत करना, उनकी इज़्ज़त करना और उनसे सीखना हमें अल्लाह के करीब लाता है। हमें चाहिए कि हम किसी भी नेक इंसान का मज़ाक़ न उड़ाएँ, चाहे वह कितना ही साधारण क्यों न दिखे। अल्लाह के पास इज़्ज़त उसी की है जो उसके दीन पर चलता है, चाहे दुनिया में उसे कितना ही हक़ीर क्यों न समझा जाए।

याद रखिए! जो लोग आज हक़ पर हैं और उन्हें कमज़ोर समझा जाता है, कल क़यामत के दिन वही सरफ़राज़ होंगे। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो अपने आख़िरत को संवारते हैं और दुनिया के धोखे में नहीं आते। आमीन।



📜 आयत 108-112 — सूरा अल-मोमिनुन

108قَالَ اخْسَئُوا فِيهَا وَلَا تُكَلِّمُونِ
ख़ुदा फरमाएगा दूर हो इसी में (तुम को रहना होगा) और (बस) मुझ से बात न करो
109إِنَّهُ كَانَ فَرِيقٌ مِّنْ عِبَادِي يَقُولُونَ رَبَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ
मेरे बन्दों में से एक गिरोह ऐसा भी था जो (बराबर) ये दुआ करता था कि ऐ हमारे पालने वाले हम ईमान लाए तो तू हमको बख्श दे और हम पर रहम कर तू तो तमाम रहम करने वालों से बेहतर है
110فَاتَّخَذْتُمُوهُمْ سِخْرِيًّا حَتَّىٰ أَنسَوْكُمْ ذِكْرِي وَكُنتُم مِّنْهُمْ تَضْحَكُونَ
तो तुम लोगों ने उन्हें मसखरा बना लिया-यहाँ तक कि (गोया) उन लोगों ने तुम से मेरी याद भुला दी और तुम उन पर (बराबर) हँसते रहे
111إِنِّي جَزَيْتُهُمُ الْيَوْمَ بِمَا صَبَرُوا أَنَّهُمْ هُمُ الْفَائِزُونَ
मैने आज उनको उनके सब्र का अच्छा बदला दिया कि यही लोग अपनी (ख़ातिरख्वाह) मुराद को पहुँचने वाले हैं
112قَالَ كَمْ لَبِثْتُمْ فِي الْأَرْضِ عَدَدَ سِنِينَ
(फिर उनसे) ख़ुदा पूछेगा कि (आख़िर) तुम ज़मीन पर कितने बरस रहे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
110आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 110

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Friday, October 2, 2026

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