अल-मोमिनुन · 112/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
قَالَ كَمْ لَبِثْتُمْ فِي الْأَرْضِ عَدَدَ سِنِينَ ۝١١٢
Qaala kam labistum fil ardi `adada sineen
📖 हिंदी अर्थ
(फिर उनसे) ख़ुदा पूछेगा कि (आख़िर) तुम ज़मीन पर कितने बरस रहे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कम लबिस्तुम – तुम कितने समय तक रहे?
  • फ़िल-अर्ज़ – धरती पर (यानी दुनिया में)
  • अददे सिनीन – सालों की गिनती के रूप में

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला क़यामत के दिन जहन्नमियों से सवाल करेगा कि तुमने दुनिया में कितने साल गुज़ारे? यह सवाल उन्हें जवाबदेह बनाने और उन्हें उनकी ग़फ़लत और बर्बादी का एहसास दिलाने के लिए होगा। यानी अल्लाह उनसे पूछेगा: तुम धरती पर कितने साल रहे? तुमने अपनी ज़िंदगी के कितने साल दुनिया में बिताए?

यह सवाल उन लोगों से किया जाएगा जो दुनिया में अल्लाह की इबादत से ग़ाफ़िल रहे, जिन्होंने अपनी उम्र को अल्लाह की इताअत और उसकी राह में ख़र्च नहीं किया। यह पूछताछ उन्हें शर्मिंदा करने के लिए होगी, क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी दुनिया के मोह और माल-दौलत में गुज़ार दी और आख़िरत के लिए कुछ भी तैयार नहीं किया।

यह आयत हमें बताती है कि दुनिया की ज़िंदगी बहुत कम और सीमित है, और इसका हिसाब ज़रूर होगा। अल्लाह तआला हमें यह सिखाना चाहता है कि हम अपने हर पल को कीमती समझें और उसे अल्लाह की इबादत, नेक कामों और अच्छे आचरण में बिताएं। क्योंकि जब हमसे पूछा जाएगा कि तुमने दुनिया में कितने साल बिताए और कैसे बिताए, तो हमें जवाब देना होगा।

इसलिए ऐ इंसान! अपनी उम्र की क़द्र करो। यह ज़िंदगी जो अल्लाह ने तुम्हें दी है, यह कोई मज़ाक़ नहीं है। यह एक इम्तिहान है। जो लोग इस इम्तिहान में कामयाब हो जाएंगे, वे जन्नत में हमेशा रहेंगे। और जो नाकाम रहे, उनका अंजाम जहन्नम है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें अपनी इबादत में उम्र गुज़ारने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 110-114 — अल-मोमिनुन

110فَاتَّخَذْتُمُوهُمْ سِخْرِيًّا حَتَّىٰ أَنسَوْكُمْ ذِكْرِي وَكُنتُم مِّنْهُمْ تَضْحَكُونَ
तो तुम लोगों ने उन्हें मसखरा बना लिया-यहाँ तक कि (गोया) उन लोगों ने तुम से मेरी याद भुला दी और तुम उन पर (बराबर) हँसते रहे
111إِنِّي جَزَيْتُهُمُ الْيَوْمَ بِمَا صَبَرُوا أَنَّهُمْ هُمُ الْفَائِزُونَ
मैने आज उनको उनके सब्र का अच्छा बदला दिया कि यही लोग अपनी (ख़ातिरख्वाह) मुराद को पहुँचने वाले हैं
112قَالَ كَمْ لَبِثْتُمْ فِي الْأَرْضِ عَدَدَ سِنِينَ
(फिर उनसे) ख़ुदा पूछेगा कि (आख़िर) तुम ज़मीन पर कितने बरस रहे
113قَالُوا لَبِثْنَا يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ فَاسْأَلِ الْعَادِّينَ
वह कहेंगें (बरस कैसा) हम तो बस पूरा एक दिन रहे या एक दिन से भी कम
114قَالَ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا قَلِيلًا ۖ لَّوْ أَنَّكُمْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
तो तुम शुमार करने वालों से पूछ लो ख़ुदा फरमाएगा बेशक तुम (ज़मीन में) बहुत ही कम ठहरे काश तुम (इतनी बात भी दुनिया में) समझे होते
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 112

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Tuesday, August 18, 2026

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