अल-मोमिनुन · 118/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
وَقُل رَّبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ ۝١١٨
Wa qur Rabbigh fir warham wa Anta khairur raahimeen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम कह दो परवरदिगार तू (मेरी उम्मत को) बख्श दे और तरस खा और तू तो सब रहम करने वालों से बेहतर है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • اغْفِرْ – क्षमा कर दे
  • ارْحَمْ – दया कर
  • خَيْرُ الرَّاحِمِينَ – सबसे अच्छा दया करने वाला

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप कहिए: “ऐ मेरे रब! मेरे गुनाहों को माफ़ कर दे और मुझ पर रहम फ़रमा, और तू ही सबसे बेहतर रहम करने वाला है।”

यह दुआ हमें सिखाती है कि इंसान को चाहिए कि वह हमेशा अल्लाह से माफ़ी और रहमत की दरख्वास्त करे। अल्लाह तआला सबसे ज़्यादा रहम करने वाला है — उसकी रहमत माँ की रहमत से भी बढ़कर है, और इंसान की अपनी जान से भी ज़्यादा उसके साथ नेकी करने वाली है। जब कोई बंदा अपने गुनाहों पर पछतावा करके अल्लाह की तरफ़ लौटता है, तो अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उस पर रहम फ़रमाता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी कमज़ोरियों और गुनाहों का एहसास रखना चाहिए और हमेशा अल्लाह से दुआ करते रहना चाहिए। अल्लाह की रहमत की कोई हद नहीं — वह हर उस बंदे को माफ़ कर देता है जो सच्चे दिल से तौबा करता है। यह दुआ हमारे लिए रहमत का दरवाज़ा खोलती है और हमें अल्लाह के क़रीब लाती है।

इसलिए हमें भी इस दुआ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए और हर वक़्त अल्लाह से माफ़ी और रहमत की दरख्वास्त करते रहना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बेहतर रहम करने वाला है और उसकी रहमत से ही हमें जन्नत मिलेगी।



📜 आयत 116-118 — सूरा अल-मोमिनुन

116فَتَعَالَى اللَّهُ الْمَلِكُ الْحَقُّ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ
तो ख़ुदा जो सच्चा बादशाह (हर चीज़ से) बरतर व आला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वहीं) अर्श बुर्जुग़ का मालिक है
117وَمَن يَدْعُ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ لَا بُرْهَانَ لَهُ بِهِ فَإِنَّمَا حِسَابُهُ عِندَ رَبِّهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الْكَافِرُونَ
और जो शख्स ख़ुदा के साथ दूसरे माबूद की भी परसतिश करेगा उसके पास इस शिर्क की कोई दलील तो है नहीं तो बस उसका हिसाब (किताब) उसके परवरदिगार ही के पास होगा (मगर याद रहे कि कुफ्फ़ार हरगिज़ फलॉह पाने वाले नहीं)
118وَقُل رَّبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ
और (ऐ रसूल) तुम कह दो परवरदिगार तू (मेरी उम्मत को) बख्श दे और तरस खा और तू तो सब रहम करने वालों से बेहतर है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
118आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 118

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Sunday, October 4, 2026

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